मुंबई: शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र में मध्यावधि चुनाव की मांग की| उद्धव ठाकरे ने कहा,''सुप्रीम कोर्ट का 11 जुलाई का फैसला भारतीय लोकतंत्र का भविष्य तय करेगा, न कि केवल शिवसेना का| 11 जुलाई की सुनवाई से पहले उद्धव ठाकरे ने कहा,''सुप्रीम कोर्ट का 11 जुलाई का फैसला सिर्फ शिवसेना का नहीं बल्कि भारतीय लोकतंत्र का भविष्य तय करेगा|
उन्होंने कहा, ‘आज भी देश में असत्यमेव ये वाक्य नहीं, बल्कि सत्यमेव जयते ही वाक्य है। मेरा न्याय देवता पर विश्वास है। न्याय मंदिर पर विश्वास है। आगामी 11 तारीख को जो परिणाम आएगा वह लोकतंत्र का भविष्य तय करने वाला होगा|
ऐसा उद्धव ठाकरे ने कहा, देश में लोकतंत्र का अस्तित्व, लोकतंत्र का भविष्य कितने समय तक टिकेगा। लोकतंत्र कितना मजबूत रहेगा, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा तैयार किया गया जो संविधान है उस संविधान के अनुसार हमारे देश का कामकाज इससे आगे चलेगा कि नहीं, ये तय करनेवाला और देश की सभी कार्य प्रणालियों को दिशा दिखानेवाला वह परिणाम होगा,
दरअसल,'''सुप्रीम कोर्ट 11 जुलाई को शिवसेना के मुख्य सचेतक सुनील प्रभु की याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें एकनाथ शिंदे समेत शिवसेना के बागी विधायकों की विधानसभा से निलंबन की मांग की गई थी| सुप्रीम कोर्ट ने 29 जून, 2022 को कहा था कि फ्लोर टेस्ट का नतीजा 11 जुलाई की सुनवाई के अधीन होगा|
इस बीच, 11 जुलाई की सुनवाई से पहले शिवसेना के उद्धव गुट ने सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाए जाने के विरोध में शिवसेना (उद्धव गुट) द्वारा दायर याचिका पर 11 जुलाई को सुनवाई करने पर सहमति जतायी है|
शिवसेना महासचिव सुभाष देसाई की याचिका में शिंदे को सरकार बनाने का आमंत्रण देने के राज्यपाल के फैसले को चुनौती दी गई है। स्पीकर के निर्वाचन और विश्वासमत की प्रक्रिया को भी गलत बताया गया है।
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शिवसेना ने महाराष्ट्र में बगावत करके सत्ता में आई नई सरकार और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस याचिका के पहले सुप्रीम कोर्ट में दायर 16 विधायकों की अयोग्यता की याचिका पर 11 जुलाई सोमवार को सुनवाई होगी|
उद्धव सरकार के जाने के बाद राज्यपाल ने बागी विधायकों वाले शिंदे गुट और भाजपा को सरकार बनाने के लिए अपनी मंजूरी दे दी। साथ ही मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार का बहुमत परीक्षण और नए अध्यक्ष का चयन सभी अवैध और गलत तरीके से संपन्न किया गया है। इस पर आपत्ति जताते हुए शिवसेना के वरिष्ठ नेता सुभाष देसाई ने नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
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यह याचिका न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी और न्यायाधीश जे. के. माहेश्वरी की अवकाश पीठ के समक्ष दायर की गई। शिवसेना की ओर से एड. देवदत्त कामत ने कोर्ट के समक्ष शिवसेना का पक्ष रखा। इस बीच पूर्व में दायर याचिका पर आगामी 11 जुलाई को होने वाली सुनवाई के दौरान ही इस याचिका पर भी सुनवाई करने का निर्देश खंडपीठ ने दिया है।
मालूम हो कि, महाराष्ट्र में ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को हाल में वरिष्ठ नेता शिंदे की अगुवाई में विधायकों की बगावत का सामना करना पड़ा। पार्टी के अधिकतर विधायकों ने शिंदे का पक्ष लिया, जिससे महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार गिर गई। ठाकरे ने 29 जून को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और उसके एक दिन बाद शिंदे ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली
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