नई दिल्ली: दिल्ली में आबकारी नीति को लेकर मचे घमासान के बीच दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दावा किया है कि जांच एजेंसी के एक अधिकारी ने इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि उस (अधिकारी) पर उन्हें झूठे (मनीष सिसोदिया को) आबकारी मामले में फंसाने के लिए दबाव डाला गया था।सीबीआई के एक उप कानूनी सलाहकार जितेंद्र कुमार ने पिछले सप्ताह दक्षिण दिल्ली में अपने आवास पर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। सिसोदिया ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया, "सीबीआई अधिकारी पर मुझे झूठे मामले में फंसाने के लिए दबाव डाला गया। वह मानसिक दबाव नहीं झेल सका और आत्महत्या कर ली।"
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिसोदिया ने कहा कि,''CBI के Deputy Legal Advisor Jitender Kumar जी ने Suicide किया था। वो मेरे ख़िलाफ़ फ़र्ज़ी मामले की Legality देख रहे थे। पता चला है कि ग़लत Case बना कर मेरी गिरफ़्तारी को मंज़ूरी देने के लिए उन पर इतना दबाव डाला जा रहा था कि उन्होंने आत्महत्या कर ली।
सिसोदिया ने कहा कि, मैं प्रधानमंत्री से कहना चाहता हूं कि,'' मुझे ''Fake Case'' में फंसाइये लेकिन अधिकारियों को आत्महत्या के लिए मजबूर मत करिए। उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री से 3 सवाल पूछना चाहता हूं कि 1- अधिकारियों पर इतना दबाव क्यों डाला जा रहा है। उन्हें इतना बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर क्यों किया जा रहा है। 2- केंद्र का काम केवल '''Operation Lotus'' चलाना रह गया है?, 3- सरकारें कुचलने के लिए और कितनी कुर्बानियां?
सिसोदिया के दावों को सीबीआई ने किया खारिज
सीबीआई ने सोमवार को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के इस आरोप क?? 'एक शरारती और भ्रामक बयान' के रूप में वर्णित किया कि एक झूठे मामले में AAP नेता को फंसाने के लिए दबाव में आने के बाद जांच एजेंसी के एक अधिकारी की आत्महत्या से मौत हो गई। घंटों बाद, सिसोदिया के "शरारती और भ्रामक बयान" का "दृढ़ता से" खंडन करते हुए, केंद्रीय एजेंसी ने एक बयान में कहा, "यह स्पष्ट किया जाता है कि अधिकारी स्वर्गीय जितेंद्र कुमार इस मामले की जांच से किसी भी तरह से जुड़े नहीं थे।
वह अभियोजन के इंचार्ज उप कानूनी सलाहकार थे| वह उन अभियोजकों की निगरानी कर रहे थे जो दिल्ली में पहले से ही आरोप-पत्रित मामलों की सुनवाई कर रहे हैं। इसके अलावा, दिल्ली पुलिस के अनुसार, जो मौत की जांच कर रही है, अधिकारी (CBI) ने अपने सुसाइड नोट में उसकी मौत के लिए किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया है। मृत सीबीआई अधिकारी जितेंद्र कुमार का दिल्ली आबकारी नीति मामले से कोई लेना देना था ही नहीं। उनके द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं।”
सीबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली आबकारी नीति मामले की जांच चल रही है और इसलिए किसी भी आरोपी को क्लीन चिट नहीं दी गई है। एजेंसी ने कहा, "सिसोदिया का शरारती और भ्रामक बयान दिल्ली आबकारी नीति मामले में चल रही जांच से ध्यान हटाने का एक प्रयास है, और अधिकारी की मौत में जांच की कार्यवाही में हस्तक्षेप के समान है।"
सीबीआई के बयान पर सिसोदिया का जबाव
सीबीआई के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सिसोदिया ने ट्वीट किया, 'मैं मानता हूं कि सीबीआई अधिकारी जितेंद्र कुमार जांच अधिकारी नहीं थे। वह मेरे मामले को निपटाने वाले कानून अधिकारी थे। मुझ पर फंसाकर झूठी कहानी गढ़ने के लिए उन पर दबाव डाला गया। उन्होंने दबाव नहीं सहा और आत्महत्या कर ली।"
जितेंद्र कुमार की मृत्यु के कारणों की स्वतंत्र न्यायिक जांच हो: सिसोदिया
सिसोदिया ने कहा कि,''सीबीआई के उप कानूनी सलाहकार स्वर्गीय जितेंद्र कुमार की मृत्यु के कारणों की एक स्वतंत्र न्यायिक जांच - सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में होनी चाहिए।
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बता दें कि, दिल्ली में सेंट्रल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के एक लीगल एडवाइजर का शव उनके दक्षिणी दिल्ली स्थित आवास में गुरुवार को लटका मिला था। सीबीआई के लोधी रोड कार्यालय में उप कानूनी सलाहकार के पद पर तैनात 48 वर्षीय जितेंद्र कुमार एस-22 टाइप-4 हुडको प्लेस स्थित अपने घर में लटके पाए गए थे।
जितेंद्र कुमार हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के मूल निवासी थे। जितेंद्र कुमार के पास से एक सुसाइड नोट बरामद किया गया, जिसमें कहा गया है कि कुमार के इस चरम फैसले के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है।पुलिस ने आत्महत्या का मुकदमा दर्ज कर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है।
सरकार की तरफ से मिले फ्लैट में जितेंद्र कुमार अकेले रहते थे और उनका परिवार हिमाचल के मंडी जिले में रहता है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस जितेंद्र कुमार के घर पहुंची। वहां देखा कि फ्लैट की बालकनी में शव बेल्ट के सहारे लटका हुआ था। शव को तुरंत नीचे उतारा गया और फिर कब्जे में लिया।
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