नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने दिल्ली के मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने दिल्ली की आबकारी नीति की आलोचना करते हुए और सत्ता के नशे में चूर होने का आरोप लगाते हुए अपनी पुस्तक 'स्वराज' की कुछ पंक्तियों को याद दिलाया। अन्ना हजारे ने कहा,''हर वार्ड में उन्होंने (CM केजरीवाल) शराब की दुकान खोली और आयु सीमा 25 वर्ष से 21 वर्ष कर दी। वे शराब का प्रचार कर रहे हैं। मैंने इसके खिलाफ उनको पहली बार चिट्ठी लिखी। जब मैं विरोध कर रहा था तो वो मुझे अपना 'गुरु' कहते थे, अब वो भावनाएं कहां हैं?|
नई शराब नीति पर आम आदमी पार्टी के नेता और सीएम अरविंद केजरीवाल को लिखी चिट्ठी में अन्ना हजारे ने कहा,'दिल्ली राज्य सरकार द्वारा बनाई गई नई शराब नीति के बारें में आप मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार मैं आपको खत लिख रहा हूँ। पिछले कई दिनों से दिल्ली राज्य सरकार की शराब नीति के बारे में जो खबरे आ रही हैं, वह पढ़कर बड़ा दुख होता हैं।
गांधीजी के गाँव की ओर चलो...' इस विचारों से प्रेरित हो कर मैने अपना पुरा जीवन गाँव, समाज और देश के लिए समर्पित किया हैं। पिछले 47 सालों से ग्राम विकास के लिए काम और भ्रष्टाचार के विरोध में जन आंदोलन कर रहा हूँ।"
हजारे ने कहा,'महाराष्ट्र में 35 जिलो में 252 तहसिल में संगठन बनाया। भ्रष्टाचार के विरोध में तथा व्यवस्था परिवर्तन के लिए लगातार आंदोलन किए। इस कारण महाराष्ट्र में 10 कानून बन गए। शुरू में हमने गाँव में चलनेवाली 35 शराब की भट्टियां बंद की। आप लोकपाल आंदोलन के कारण हमारे साथ जुड़ गए। तब से आप और मनिष सिसोदिया कई बार रालेगणसिद्धी गाँव में आ चुके हैं। गाँववालों ने किया हुआ काम आपने देखा हैं। पिछले 35 साल से गाँव में शराब, बिडी, सिगारेट बिक्री के लिए नहीं हैं। यह देखकर आप प्रेरित हुए थे। आप ने इस बात की प्रशंसा भी की थी।
राजनीति में जाने से पहले आपने 'स्वराज' नाम से एक किताब लिखी थी। इस किताब की प्रस्तावना आपनेस मुझसे लिखवाई थी। इस ‘स्वराज' नाम की किताब में आपने ग्रामसभा, शराब नीति के बारें में बड़ी बड़ी बाते लिखी थी। किताब में आपने जो लिखा हैं, वह आप को याद दिलाने के लिए निचे दे रहा हूँ...
.गाँवो में शराब की लतः
समस्याः वर्तमान समय में शराब की दुकानों के लिए राजनेताओं की सिफारिश पर अधिकारियों द्वारा लाइसेंस दे दिया जाता हैं। वे प्रायः रिश्वत ले कर लाइसेंस देते हैं। शराब की दुकानों की कारण भारी समस्याएं पैदा होती हैं। लोगों का पारिवारिक जीवन तबाह हो जाता है। विडम्बना यह है की, जो लोग इससे सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं, उन्हें इस बात के लिए कोई नहीं पुछता कि, क्या शराब की दकान खुलनी चाहिए या नहीं? इन दुकानों को उनके उपर थोप दिया जाता हैं।
अन्ना ने कहा, कि,''आपने 'स्वराज' नाम की इस किताब में कितनी आदर्श बातें लिखी थी। तब आप से बड़ी उम्मीद थी। लेकिन राजनीति में जा कर मुख्यमंत्री बनने के बाद आप आदर्श विचारधारा को भूल गए हैं ऐसा लगता हैं। इसलिए दिल्ली राज्य में आपकी सरकारने नई शराब नीति बनाई। ऐसा लगता हैं की, जिससे शराब की बिक्री और शराब पिने को बढ़ावा मिल सकता हैं। गली गली में शराब की दुकानें खुलवाई जा सकती हैं। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता हैं। यह बात जनता के हित में नहीं हैं। फिर भी आपने ऐसी शराब नीति लाने का निर्णय लिया हैं। इससे ऐसा लगता हैं कि, जिस प्रकार शराब की नशा होती हैं, उस प्रकार सत्ता की भी नशा होती हैं। आप भी ऐसी सत्ता की नशा में डुब गये हो, ऐसा लग रहा
उन्होंने कहा,''10 साल पहले 18 सितंबर 2012 को दिल्ली में टिम अन्ना के सभी सदस्यों की मिटिंग हुई थी। उस वक्त आप ने राजनीतिक रास्ता अपनाने की बात रखी थी। लेकिन आप भूल गए की, राजनीतिक पार्टी बनाना यह हमारे आंदोलन का उद्देश्य नहीं था। उस वक्त टिम अन्ना के बारे में जनता के मन में विश्वास पैदा हुआ था। इसलिए उस वक्त मेरी सोच थी की, टिम अन्ना ने देशभर घुमकर लोकशिक्षण लोकजागृति का काम करना जरुरी था।
अन्ना ने कहा, कि,''अगर इस प्रकार लोकशिक्षण लोकजागृति का काम होता तो देश में कही पर भी शराब की ऐसी गलत नीति नहीं बनती। सरकार कौन सी भी पार्टी की हो, सरकार को जनहित में काम करने पर मजबूर करने के लिए समान विचारधारावाले लोगोंका एक प्रेशर ग्रुप होना जरुरी था। अगर ऐसा होता तो आज देश की स्थिती अलग होती और गरीब लोगों को लाभ मिलता। लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो पाया। उसके बाद आप, मनिष सिसोदिया और आपके अन्य साथियों ने मिलकर पार्टी बनाई और राजनीति में कदम रखा।
उन्होंने कहा,''दिल्ली सरकार की नई शराब नीति को देखकर अब पता चल रहा हैं कि, एक ऐतिहासिक आंदोलन का नुकसान कर के जो पार्टी बन गयी, वह भी बाकी पार्टीयों के रास्ते पर ही चलने लगी। यह बहुत ही दुख की बात हैं।
उन्होंने कहा,''भ्रष्टाचार मुक्त भारत के लिए ऐतिहासिक लोकपाल और लोकायुक्त आंदोलन हुआ। लाखों की संख्या में लोग रास्तेपर उतर आये। उस वक्त केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त की जरुरत के बारे में आप मंच से बड़े बड़े भाषण देते थे। आदर्श राजनीति और आदर्श व्यवस्था के बारें में अपने विचार रखते थे। लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने के बाद आप लोकपाल और लोकायुक्त कानून को भुल गए। इतनाही नहीं, दिल्ली विधानसभा में आपने एक सशक्त लोकायुक्त कानून बनाने की कोशिश तक नहीं की। और अब तो आप की सरकार ने लोगों का जीवन बरबाद करने वाली, महिलाओं को प्रभावित करने वाली शराब नीति बनाई हैं। इससे स्पष्ट होता हैं की, आपकी कथनी और करनी में फर्क हैं।
यह भी पढ़ें: सिसोदिया के आवास पर CBI ने की 14 घंटे छापेमारी
अन्ना ने कहा कि,'' मैं यह पत्र इसलिए लिख रहा हूँ की, हमने पहले रालेगणसिद्धी गाँव में शराब को बंद किया। फिर कई बार महाराष्ट्र में एक अच्छी शराब की नीति बने इसलिए आंदोलन किए। आंदोलन के कारण शराब बंदी का कानून बन गया। जिसमें किसी गाँव तथा शहर में अगर 51 प्रतिशत महिलाएं शराब बंदी के पक्ष में वोटिंग करती हैं, तो वहाँ शराब बंदी हो जाती हैं।
दुसरा ग्राम रक्षक दल का कानून बन गया। जिसके माध्यम से महिलाओं की मदद में हर गाँव में युवाओं का एक दल गाँव में अवैध शराब के विरोध में कानूनी अधिकार के साथ कार्रव??ई कर सकता हैं। इस कानून के तहत अंमल न करनेवाले पुलिस अधिकारी तथा एक्साइज अधिकारी पर भी कड़ी कार्रवाई करने का प्रावधान किया गया हैं। दिल्ली सरकार द्वारा भी इस प्रकार के नीति की उम्मीद थी। लेकिन आप ने ऐसा नहीं किया। आप लोग भी बाकी पार्टियों की तरह पैसा से सत्ता और सत्ता से पैसा इस दुष्टचक्र में फसे हुए दिखाई दे रहे हैं। एक बड़े आंदोलन से पैदा हुई राजनीतिक पार्टी को यह बात शोभा नहीं देती।
यह भी पढ़ें: FIR में 15 लोगों के नाम, अनुचित लाभ का आरोप
आपको बता दें दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने नई आबकारी नीति को लेकर आरोपों से घिरी हुई है| बीजेपी का आरोप है कि इस नीति के जरिए पार्टी के करीबियों को फायदा पहुंचाया गया| इसके साथ ही बीजेपी ने दावा किया है कि इस नीति के जरिए बड़ा घोटाला किया गया| फिलहाल इस मामले में सीबीआई जांच कर रही है| वहीं बीजेपी की तरफ से मनीष सिसोदिया के इस्तीफे की मांग भी की जा रही है|