नई दिल्ली: Maharashtra political turmoil: महाराष्ट्र विधानसभा में कल फ्लोर टेस्ट होगा। 3 घंटे से अधिक चली सुनवाई के बाद सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि फ्लोर टेस्ट गुरुवार को ही होगा| सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री नवाब मलिक और अनिल देशमुख को भी वोटिंग में हिस्सा लेने की इजाजत दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 30 जून को महाराष्ट्र विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के लिए राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के आदेश को चुनौती देने वाली शिवसेना के मुख्य सचेतक सुनील प्रभु की याचिका पर सुनवाई की|
शिवसेना की ओर से शिवसेना की तरफ से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने बहस की| एकनाथ शिंदे की तरफ से एडवोकेट नीरज किशन कौल ने पैरवी की। जबकि शिंदे गुट की तरफ से एडवोकेट मनिंदर सिंह पेश हुए। आखिर में राज्यपाल की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें रखीं।
सुनील प्रभु के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि,जो चिट्ठी हमें मिली है, उसमें लिखा गया है कि विपक्ष के नेता ने राज्यपाल से 28 जून को मुलाकात की और आज सुबह हमें कल फ्लोर टेस्ट के बारे में सूचना मिली। NCP के दो सदस्य COVID से पीड़ित हैं और कांग्रेस विधायक देश से बाहर है|
वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी ने SC को बताया," राकांपा के दो विधायक COVID से ग्रसित है, कांग्रेस के दो विधायक देश से बाहर हैं | 24 घंटे में बहुमत परीक्षण के लिए कहा गया है| इस मामले में राज्यपाल ने बहुत तेजी से काम किया| सिंघवी ने कहा, ये सुपरसोनिक स्पीड से आदेश दिया गया|
शिवसेना नेता सुनील प्रभु के लिए सिंघवी ने SC से कहा कि,' फ्लोर टेस्ट की अनुमति देने का मतलब दसवीं अनुसूची को 'मृत पत्र' बनाना होगा| सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि,"दसवीं अनुसूची मजबूत प्रावधानों में से एक है और हमें इसे मजबूत करना चाहिए|
सिंघवी ने SC से कहा,''सुपरसोनिक स्पीड से फ्लोर टेस्ट कराने का राज्यपाल का आदेश 'घोड़े के आगे गाड़ी' लगाने के बराबर है| सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि,''बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिका पर डिप्टी स्पीकर का फैसला होने तक कोर्ट को फ्लोर टेस्ट की अनुमति नहीं देनी चाहिए|
कोर्ट ने सिंघवी से कहा,''फ्लोर टेस्ट अयोग्यता प्रक्रिया को कैसे प्रभावित कर सकता है या अयोग्यता कार्यवाही करने के लिए अध्यक्ष की शक्तियों में हस्तक्षेप कर सकता है? कोर्ट ने कहा,''हमारी समझ यह है कि लोकतंत्र के इन मुद्दों को निपटाने का एकमात्र तरीका सदन का पटल है|
सिंघवी ने कोर्ट से कहा,'जिन लोगों ने पाला बदल लिया है, वे लोगों की इच्छा को नहीं दर्शाते हैं| अगर कल फ्लोर टेस्ट नहीं हुआ तो आसमान नहीं गिरेगा|
सिंघवी ने कहा,''फ्लोर टेस्ट के लिए सुपर सोनिक स्पीड दिखाई गई है। फ्लोर टेस्ट यह निर्धारित करता है कि कौन सी सरकार लोगों की इच्छा का प्रतिनिधित्व करती है। सही बहुमत का पता लगाने के लिए एक फ्लोर टेस्ट माना जाता है। सच्चे बहुमत में शामिल होने के योग्य लोग शामिल होंगे। स्पीकर के फैसले से पहले वोटिंग नहीं होनी चाहिए। उनके फैसले के बाद सदन सदस्यों की संख्या बदलेगी।
उन्होंने आगे कहा- यह चुनाव आयोग के चुनाव कराने के कहने के समान है कि मतदाताओं में 'मृत लोग या वे लोग शामिल होंगे जो बाहर चले गए हैं। यदि फ्लोर टेस्ट यह निर्धारित किए बिना किया जाता है कि क्या ए, बी, सी, डी अयोग्य हैं, तो जिस पूल में फ्लोर टेस्ट होगा, वह बदल जाएगा|
सुनील प्रभु के वकील ने कहा- स्पीकर के फैसले से पहले मतदान (फ्लोर टेस्ट में) नहीं होना चाहिए। उनके फैसले के बाद सदन के सदस्यों की संख्या में बदलाव होगा।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उनसे पूछा- अयोग्यता का मामला हमारे सामने लंबित है, हम तय करेंगे कि नोटिस वैध है या नहीं? लेकिन यह फ्लोर टेस्ट को कैसे प्रभावित कर रहा है?
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- अयोग्यता का मामला हमारे पास लंबित है, लेकिन इसका फ्लोर टेस्ट से क्या संबंध है, कृपया स्पष्ट करें। वकील सिंघवी बोले- एक तरफ कोर्ट ने अयोग्यता की कार्यवाही पर रोक लगाई है, दूसरी तरफ विधायक कल मतदान करने जा रहे हैं, यह सीधा विरोधाभास है।
सिंघवी ने प्रस्तुत किया कि यह न्यायालय अयोग्यता कार्यवाही की वैधता पर विचार कर रहा है और मामले को 11.07.2022 को सुनवाई के लिए रखा है। अयोग्यता का मुद्दा फ्लोर टेस्ट के मुद्दे से सीधे जुड़ा / आपस में जुड़ा हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनील प्रभु की ओर से पेश हुए वकील अभिषेक सिंघवी से पूछा- क्या आप इस बात पर विवाद कर रहे हैं कि आपकी पार्टी के 34 सदस्यों ने पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं?
सिंघवी जवाब देते हैं - बिल्कुल, कोई सत्यापन नहीं है। राज्यपाल ने एक सप्ताह तक पत्र रखा और केवल तभी कार्रवाई की जब एलओपी देवेंद्र फडणवीस उनसे मिले। राज्यपाल की हर कार्रवाई न्यायिक समीक्षा के अधीन है|
अधिवक्ता सिंघवी कहते हैं - ये विधायक 10वीं अनुसूची की शक्ति का प्रयोग करने से अक्षम करने के लिए एक असत्यापित ईमेल भेजकर सूरत और फिर गुवाहाटी जाते हैं कि उन्हें स्पीकर पर कोई भरोसा नहीं है।
अधिवक्ता सिंघवी ने कहा- जब मामला सुप्रीम कोर्ट में फैसले का इंतजार कर रहा है, तो विपक्ष के नेता के साथ बैठक के बाद कोविड से ठीक हुए राज्यपाल अगले दिन फ्लोर टेस्ट की मांग कैसे कर सकते हैं?
अधिवक्ता सिंघवी ने कहा- पक्ष बदल चुके और दलबदल कर चुके लोग जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते। क्या राज्यपाल कल फ्लोर टेस्ट नहीं बुलाने के लिए कोर्ट पर भरोसा नहीं कर सकते? कल फ्लोर टेस्ट नहीं हुआ तो क्या आसमान गिर जाएगा?
अधिवक्ता सिंघवी ने कहा-राज्यपाल को अनुच्छेद 361 के तहत अदालती कार्रवाई से अलग रहने की छूट दी गई है, लेकिन यह कोर्ट को राज्यपाल के आदेश की समीक्षा करने से नहीं रोकता है। स्पीकर को विधायकों की अयोग्यता पर निर्णय लेने से नहीं रोका जाना चाहिए। साथ ही इस बात का फैसला होने तक फ्लोर टेस्ट नहीं होना चाहिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने कहा कि ये कहना गलत होगा की गवर्नर पॉलिटिकल नहीं हो सकता| इन्हीं गवर्नर ने सालों तक 12 सदस्यों को नॉमिनेट नहीं होने दिया| गवर्नर के ऑफिस को भी देखा जाना जरूरी है| गवर्नर ने किसी भी विधायक से बात तक नहीं की| गवर्नर ने मुख्यमंत्री से बात तक नहीं की और एकतरफा फैसला ले लिया|
अभिषेकमनु सिंघवी ने कहा कि,'''राज्यपाल कोई देवदूत नहीं हैं, वे इंसान हैं और इसलिए पहले भी एसआर बोम्मई और रामेश्वर प्रसाद आदि मामलों में न्यायालय के फैसले आए हैं|
एकनाथ शिदे की ओर से पेश अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने कहा,''- सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अयोग्यता की कार्यवाही का फ्लोर टेस्ट पर कोई असर नहीं पड़ता है। जिस पर, SC ने कहा कि जिस क्षण कोई सीएम अनिच्छा दिखाता है, यह प्रथम दृष्टया यह विचार देता है कि वह सदन का विश्वास खो चुका है
अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने कहा- यह (फ्लोर टेस्ट) राज्यपाल के विवेक के लिए बनाया गया क्षेत्र है। जब तक राज्यपाल के निर्णय को घोर तर्कहीन या दुर्भावनापूर्ण नहीं माना जाता, तब तक कोई हस्तक्षेप नहीं हो सकता।
एकनाथ शिंदे की ओर से पेश नीरज किशन कौल का कहना है कि फ्लोर टेस्ट का सामना करने के लिए सीएम की अनिच्छा का प्रथम दृष्टया यह अर्थ लगाया जाएगा कि उन्होंने सदन में बहुमत खो दिया। फ्लोर टेस्ट का अंतर्निहित उद्देश्य राजनीतिक जवाबदेही और राजनीतिक नैतिकता को बनाए रखना है, और SC ने इसे माना है।
सुप्रीम कोर्ट ने नीरज किशन कौल से पूछा- असंतुष्ट गुट में कितने विधायक हैं? ..| अधिवक्ता कौल ने जबाव दिया कि,'' शिवसेना के 55 में से 39 विधायक है इसलिए है फ्लोर टेस्ट का सामना करने को लेकर बड़ी घबराहट हैं।
कौल ने कहा,''बागी विधायक शिवसेना नहीं छोड़ रहे हैं। हम हैं शिवसेना, हमारे पास है प्रचंड बहुमत| उन्होंने कहा, 9 निर्दलीय विधायक हैं जिन्होंने हमें भी समर्थन दिया है. यह 14 का निराशाजनक अल्पसंख्यक है जो हमारा विरोध कर रहा है।
शिवसेना के बागी विधायक समूह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने बहस शुरू की। उनका कहना है कि जब भी सुप्रीम कोर्ट इतनी देर से बैठा है, यह फ्लोर टेस्ट को रोकने के लिए नहीं है, यह फ्लोर टेस्ट आयोजित करने के लिए है। यह पहली बार है जब फ्लोर टेस्ट को रोकने का अनुरोध किया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह का कहना है कि शिवसेना के पास केवल 16 विधायक हैं। हमारे पास 39 विधायक हैं।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने महाराष्ट्र के राज्यपाल के लिए बहस शुरू की। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का कहना है कि,''सबसे पहले, यह तर्क कि इस अदालत ने स्पीकर को इंटरडिक्ट किया है, गलत है। यह आदेश नहीं है, बल्कि कानून है जिसने उसे प्रतिबंधित किया है।