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24 अगस्त 2026

मणिपुर में महिलाओं को 'नग्न घुमाने और गैंगरेप' की घटना....यह कोई अकेली घटना नहीं: SC ने सरकार से पूछा- ऐसी कितनी एफआईआर दर्ज़ की गई ?

Manipur Violence: मणिपुर में भीड़ द्वारा निर्वस्त्र परेड और गैंगरेप की शिकार हुईं दो आदिवासी महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है। मणिपुर में महिलाओं को 'नग्न' घुमाने की घटना…

मणिपुर में महिलाओं को 'नग्न घुमाने और गैंगरेप' की घटना....यह कोई अकेली घटना नहीं: SC ने सरकार से पूछा- ऐसी कितनी एफआईआर दर्ज़ की गई ?
मणिपुर में महिलाओं को 'नग्न घुमाने और गैंगरेप' की घटना....यह कोई अकेली घटना नहीं: SC ने सरकार से पूछा- ऐसी कितनी एफआईआर दर्ज़ की गई ? | फ़ोटो: TVL News

Manipur Violence:  मणिपुर में भीड़ द्वारा निर्वस्त्र परेड और गैंगरेप की शिकार हुईं दो आदिवासी महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है। मणिपुर में महिलाओं को 'नग्न' घुमाने की घटना को लेकर आज सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई हुई| मणिपुर की 2 पीड़ित महिलाओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल का कहना है कि महिलाएं मामले की CBI जांच और मामले को असम स्थानांतरित करने के खिलाफ हैं। 



सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का कहना है कि हमने कभी भी मुकदमे को असम स्थानांतरित करने का अनुरोध नहीं किया। हमने कहा है कि इस मामले को मणिपुर से बाहर स्थानांतरित किया जाए।



 सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़ का कहना है कि यह वीडियो सामने आया लेकिन यह एकमात्र घटना नहीं है जहां महिलाओं के साथ मारपीट या उत्पीड़न किया गया है। यह कोई अकेली घटना नहीं है। हमें महिलाओं के खिलाफ हिंसा के व्यापक मुद्दे को देखने के लिए एक तंत्र भी बनाना होगा।



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CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ ने पूछा कि 3 मई के बाद से जब मणिपुर में हिंसा शुरू हुई थी, ऐसी कितनी एफआईआर दर्ज़ की गई हैं। मणिपुर वायरल वीडियो पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि जब घटना 4 मई को हुई तो FIR 18 मई को क्यों दर्ज की गई? 4 मई से 18 मई तक पुलिस क्या कर रही थी? यह घटना सामने आई कि महिलाओं को नग्न कर घुमाया गया और कम से कम दो के साथ बलात्कार किया गया। पुलिस क्या कर रही थी?



सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा से निपटने के लिए तौर-तरीके विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया और केंद्र तथा राज्‍य सरकार से ऐसे सभी मामलों में दर्ज एफआईआर का विवरण मांगा। भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ उन आदिवासी महिलाओं द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिन्हें मणिपुर में निर्वस्‍त्र घुमाया गया था और उनका यौन उत्पीड़न किया गया था।



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