नई दिल्ली: 2002 गुजरात दंगा: जाकिया जाफरी मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर कांग्रेस महासचिव और सांसद जयराम रमेश ने आज यानी सोमवार कहा,"जाकिया जाफरी मामले में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय अत्यंत निराशाजनक है। 24 जून, 2022 के निर्णय के बावजूद, निम्नलिखित मूलभूत प्रश्न अभी भी अनुत्तरित हैं-
1 व्यापक सांप्रदायिक दंगों के मामलों में मुख्यमंत्री और राज्य सरकार की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी क्या होती है?
2. क्या ऐसे मामलों में उत्तरदायित्व केवल कलेक्टर और उप पुलिस आयुक्त का होता है और राजनीतिक कार्यकारिणी की कोई जिम्मेदारी नहीं होती?
3. क्या मुख्यमंत्री, कैबिनेट और राज्य सरकार को कभी भी जवाबदेह नहीं ठहराया जा सकता, चाहे एक राज्य को हिंसा और दंगों की आग में झोंक दिया गया हो?
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा,"इन हालातों में हम अपने सहयोगी दिवंगत एहसान जाफरी और उनके परिवार के साथ खड़े हैं। अत्यंत दुखद घटनाक्रम में उनके साथ जो हुआ वह राज्य सरकार की ओर से एक बुनियादी चूक का परिणाम था।
इसके अतिरिक्त, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने अपना निर्णय दे दिया है, ऐसे पांच प्रश्न आज भी खड़े हैं, जो प्रधान मंत्री का पीछा करते रहेंगे|
जब वर्ष 2002 में, गुजरात में भयानक दंगे हुए, क्या उस समय नरेंद्र मोदी वहां के मुख्यमंत्री नहीं थे? | उनकी ( नरेन्द्र मोदी) इस अकर्मण्यता से तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी जी इतने उद्धवेलित क्यों थे कि उन्हें सार्वजनिक रुप से नरेन्द्र मोदी को अपना कर्तव्य निभाने और उनको 'राजधर्म' का पालन करने के लिए याद दिलाना पड़ा?
क्या सर्वोच्च न्यायालय ने ही गुजरात में (तत्कालीन) मोदी सरकार के आचरण को "आधुनिक युग के नीरो की संज्ञा दी थी, जो निर्दोष बच्चे और असहाय महिलाओं के जलने के समय कहीं और व्यस्त थे और शायद इस पर विचार कर रहे थे कि अपराधियों को इस अपराध के दोष से कैसे बचाया जाए या सुरक्षित किया जाए"?
यदि वह मुख्यमंत्री के रुप में किसी गलत काम के लिए दोषी नहीं थे, तो भाजपा के वर्तमान में मोदी मंत्रिमंडल की सदस्य श्रीमती स्मृति ईरानी समेत कुछ धड़ों ने उनका विरोध क्यों किया था और उनकी बरखास्तगी की मांग क्यों की थी?
गुजरात दंगों के संबंध में गठित एसआईटी द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर जिन अनेक लोगों को दोषी सिद्ध कर दिया गया है, उनका क्या होगा? क्या भाजपा यह दावा कर सकती है कि ये सभी दोष सिद्धियाँ अमान्य हो जाएंगी? भाजपा का कोई भी दुष्प्रचार तंत्र इन तथ्यों को कभी भी मिटा नहीं सकता है।
आपको बता दे कि,''सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जकिया जाफरी की याचिका खारिज कर दी और नरेंद्र मोदी व अन्य को दी गई क्लीन चिट को बरकरार रखा था| जकिया जाफरी के पति और कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी दंगों के दौरान मारे गए थे|