गांधीनगर: Morbi Bridge Collapses: गुजरात हाईकोर्ट ने मोरबी ब्रिज हादसे का स्वत: संज्ञान लिया। गृह विभाग, शहरी आवास, मोरबी नगर पालिका, राज्य मानवाधिकार आयोग सहित राज्य सरकार के अधिकारियों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने राज्य से एक सप्ताह के भीतर पूरी घटना की रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी।
मोरबी शहर में स्थिति ऐतिहासिक केबल ब्रिज रविवार, 30 अक्टूबर की शाम को टूट गया था। हादसे में माच्छू नदी में डूबकर 141 लोगों की मौत हो गई थी| यह पुल पिछले 6 महीने से बंद था। कुछ दिन पहले ही इसकी मरम्मत की गई थी। हादसे से 4 दिन पहले 26 अक्टूबर को यह ब्रिज आम लोगों के लिए खोला गया था।
मरम्मत के नाम पर केवल पुल का बस फर्श बदला गया था, केबल नहीं बदला गया था, केबल पुरानी थी और सही से मेंटेनेंस नहीं किया गया था। “FSL रिपोर्ट में जांच अधिकारी ने कहा कि केबल (पुल का) जंग खा रहा था। यह एक पुरानी केबल थी और पुल का बस फर्श बदला गया, केबल नहीं बदला गया और सही से मेंटेनेंस नहीं किया गया| रिपोर्ट में जांच अधिकारी ने कहा कि निविदा प्रक्रिया नहीं हुई और अनुबंध सीधे आवंटित किया गया था|
ओरेवा समूह ने पुल के रेनोवेशन में महज 12 लाख रुपए ही खर्च किये। जबकि इसके लिए 2 करोड़ रुपए आवंटित किये गये थे। इस तरह देखें तो कंपनी ने नवीनीकरण में कुल बजट का 6% ही खर्च किया और बाकी पैसा डकार गई।
एक रिपोर्ट के अनुसार अहमदाबाद स्थित ओरेवा ग्रुप को पुल की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए 2 करोड़ की धनराशि दी गई थी, जिसमें से मात्र 12 लाख रुपये खर्च किए गए| बताते चलें कि मच्छु नदी के ऊपर ब्रिटिश कालीन इस पुल के गिरने की घटना में अभी तक 135 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है| हादसे में मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी
शामिल हैं|
ओरेवा कंपनी के मैनेजर और रिपेयरिंग करने वाले कॉन्ट्रैक्टर समेत 9 गिरफ़्तार
पुल गिरने की घटना के सिलसिले में पुलिस अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है| गुजरात सरकार ने मोरबी शहर में पुल गिरने की घटना के मद्देनजर मोरबी नगर पालिका के मुख्य अधिकारी संदीप सिंह जाला को निलंबित कर दिया है|
मोरबी के माच्छू नदी पर बना केबल ब्रिज 'टूटा'; 4 दिन पहले ही जनता के लिए खोला गया था पुल