Ram Bahal Chaudhary,Basti
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फिर हम सब? वे किसके चक्कर में पड़े थे....जो हर पांच साल बाद संसद जाने के लिए घर -घर की दहलीजें नापते हैं? : ट्रैक्टर रैली में हुई हिंसा पर डॉ एम डी सिंह की कविता

  • by: news desk
  • 27 January, 2021
फिर हम सब? वे किसके चक्कर में पड़े थे....जो हर पांच साल बाद संसद जाने के लिए घर -घर की दहलीजें नापते हैं? : ट्रैक्टर रैली में हुई हिंसा पर डॉ एम डी सिंह की कविता

26 जनवरी के दिन दिल्ली में हुई हिंसा पर डॉ एम डी सिंह की कविता: फिर हम सब-----------?



फिर हम सब-----------?

वे सब अड़े थे

दिल्ली की सीमा पर खड़े थे 

भीतर जाने को बढ़े थे

लाल किले पर चढ़े थे

मैं पूछता हूं मेरे भाई

वे किसके चक्कर में पड़े थे ?



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उनके , जो निशदिन 

मालपुए चांपते हैं ?

जिनके डर से

मजदूरों के हाड़ कांपते हैं ?

या उन सबके

जो हर पांच साल बाद

संसद जाने के लिए

घर -घर की दहलीजें नापते हैं ?



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आँख तापते लोगों की 

छाती ठंडी हुई

चाहे राष्ट्र की इज्जत में 

भरपूर मंदी हुई 



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किसके कहने पर कबूतर 

इतने नंगे हुए

राजधानी की सड़कों पर 

दिनदहाड़े दंगे हुए ?



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आज तंत्र हिला है

फूंका बांधा मंत्र हिला है

फिर भी सारे गण दुखी नहीं हैं

चिकने चुपड़े शब्दों का एक किला

मालती के फूल की तरह खिला है



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किस गणतंत्र की बात कर रहे 

वह जो राज पथ पर चला

या वह जो लाल किले पर ढला ?

वे सब दुखी हैं 

जो सब कुछ कर चुके

वे सब चुप हैं 

जो कुछ न कर सके



फिर हम सब -------------?





डॉ एम डी सिंह

पीरनगर, गाजीपुर (UP)



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