रांची: झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने राज्य में आरक्षण की ऊपरी सीमा को 60 फीसदी से बढ़ाकर 77 फीसदी करने का एक विधेयक आज विधानसभा से पारित करा लिया। अब प्रदेश में अनुसूचित जनजाति (ST) को 28 फीसदी, पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 फीसदी और अनुसूचित जाति (SC) के लिए 12 फीसदी आरक्षण लाग?? हो जाएगा"|
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने विधानसभा के विशेष सत्र में झारखंड पदों और सेवाओं की रिक्तियों में आरक्षण अधिनियम, 2001 में एक संशोधन पारित करके एससी, एसटी, ईबीसी, ओबीसी और आर्थिक रूप से कमजोर तबके (ईडब्लयूएस) के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण 60 प्रतिशत से बढ़ा कर 77 फीसदी कर दिया है|
अभी झारखंड में अनुसूचित जनजाति (एसटी) को 26, अनुसूचित जाति (एससी) को 10, पिछड़ों को 14 फीसदी और ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी आरक्षण मिल रहा था। नई आरक्षण नीति के तहत OBC कोटे को 14 से बढ़ाकर 27 फ़ीसदी तक किया गया है|
इसके अलावा 1932 के खतियान पर आधारित स्थानीयता का बिल भी विधानसभा से पारित हो गया है। झारखंड विधानसभा के विशेष सत्र में हेमंत सोरेन सरकार ने 1932 आधारित स्थानीय नीति और आरक्षण संशोधन विधेयक पास कर दिया गया। इस विधेयक के अनुसार वे लोग झारखंड के स्थानीय या मूल निवासी कहे जाएंगे जिनका या जिनके पूर्वजों का नाम 1932 या उससे पहले के खतियान में दर्ज होगा।
गौरतलब है कि राज्य के आदिवासी लंबे समय से मांग कर रहे थे कि ब्रिटिश शासनकाल में 1932 में कराए गए जमीन सर्वेक्षण के रिकॉर्ड के आधार पर व्यक्ति के स्थानीय निवासी होने का सत्यापन किया जाए ना कि 1985 के सर्वे के आधार पर, जैसा अभी हो रहा है। इन दोनों विधेयकों को पारित कराए जाने को हेमंत सोरेन का मास्टरस्ट्रोक कहा जा रहा है।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि,'' झारखण्ड के वीर शहीदों और आंदोलनकारियों का सपना हुआ साकार। 1932 का खतियान आधारित स्थानीयता तथा एसटी-28%, पिछड़ा-27% और एससी-12% आरक्षण विधेयक माननीय विधानसभा के विशेष सत्र से हुआ पारित। जो कहते हैं, वो करते हैं। झारखण्ड के वीर शहीद अमर रहें! जय झारखण्ड! :