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UP: NCERT के जीएसटी वसूले जाने के निर्णय से महंगी होंगी किताबें, गरीब बच्चों पर पड़ेगा असर

  • by: news desk
  • 27 September, 2019
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UP: NCERT के जीएसटी वसूले जाने के निर्णय से महंगी होंगी किताबें, गरीब बच्चों पर पड़ेगा असर

यूपी बोर्ड ने एक पाठ्यक्रम लागू करने के निर्णय के तहत पिछले सत्र से लागू की थीं एनसीईआरटी की किताबें



एनसीईआरटी, यूपी बोर्ड से रायल्टी-जीएसटी के नाम पर हर साल वसूलेगा नौ करोड़ से अधिक की राशि



 



 



प्रयागराज:  यूपी बोर्ड की किताबों पर एनसीईआरटी जीएसटी वसूले जाने के निर्णय से किताबें महंगी हो सकती हैं। एनसीईआरटी किताबों पर पहले से ही रायल्टी वसूल रहा है। अब इसके बाद जीएसटी लगाने की तैयारी की जा रही है और यूपी बोर्ड को पत्र भी भेज दिया गया है।पिछले वर्ष देश भर में एक पाठ्यक्रम की तर्ज पर एनसीईआरटी की किताबें लागू की गई थीं। यूपी बोर्ड ने नौवीं से बारहवीं तक की 24 विषयों की पुस्तकों को एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के आधार पर छापकर अपने छात्रों के लिए लागू किया। 



 



एनसीईआरटी के साथ बोर्ड के समझौते में प्रति किताब पांच फीसदी रायल्टी देने की बात तय हुई थी। इसके लिए बोर्ड ने एनसीईआरटी को पहले वर्ष में 7.98 करोड़ की रायल्टी अदा की। अब एनसीईआरटी ने बोर्ड से कुल रायल्टी पर 12 फीसदी जीएसटी थोप दिया है। 7.98 करोड़ की रायल्टी पर 12 फीसदी जीएसटी कुल मिलाकर 85.17 लाख रुपये हो रहे हैं। इसका असर सीधे तौर पर किताबों के मूल्य पर पड़ेगा। यूपी बोर्ड प्रकाशकों से रायल्टी का पैसा लेकर एनसीईआरटी को देता है, अब इसमें जीएसटी लागू कर देने के बाद प्रकाशक किताबों का मूल्य बढ़ा सकते हैं। 



 



गरीब बच्चों पर पड़ेगा असर



बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि किताब पर रायल्टी अथवा जीएसटी लागू करने के बाद कीमत में बहुत अधिक बढ़ोतरी नहीं होती। 50 रुपये की किताब पर 2.5 रुपये रायल्टी और 30 पैसे जीएसटी देने पड़ेंगे। उन्होंने उदाहरण सहित बताया कि यूपी बोर्ड की ग्यारहवीं की गणित की किताब की कीमत 77 रुपये है जबकि एनसीईआरटी में इसकी कीमत 180 रुपये है।



 



इसी प्रकार यूपी बोर्ड में नौवीं की अर्थशास्त्र की किताब 11 रुपये है जबकि एनसीईआरटी इसी किताब का 45 रुपये लेती है। लेकिन, अधिकारी इस बात का जवाब नहीं दे पाते कि सरकारी स्कूलों में अधिकतर ग्रामीण इलाकों के बच्चे ही पढ़ते हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। ऐसे में वे कैसे किताबों की बढ़ी हुई कीमत अदा करेंगे।



 



बोर्ड को देनी होगी बड़ी रकम



बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि बताया कि प्रदेश में 28 हजार से अधिक राजकीय, सहायता प्राप्त माध्यमिक एवं वित्तविहीन विद्यालय हैं जहां एनसीईआरटी की किताबें लागू की जाएंगी। इन विद्यालयों पढ़ रहे छात्रों की संख्या देखें तो यह सवा करोड़ से अधिक है, ऐसे में किताबों की कीमत कम होने के बाद भी बोर्ड को रायल्टी एवं जीएसटी की बड़ी धनराशि एनसीईआरटी को देनी पड़ेगी। यह मामला अभी एनसीईआरटी के साथ विचाराधीन है। अभिभावकों, छात्रों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। -नीना श्रीवास्तव, सचिव यूपी बोर्ड



 


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