मुंबई: Maharashtra political turmoil: महाविकास आघाड़ी सरकार में सहयोगी रहे कुछ विधायकों द्वारा बगावत किए जाने से राज्य में सप्ताह भर से राजनीतिक अस्थिरता निर्माण हो गई। इस पार्श्वभूमि में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने बहुमत सिद्ध करने का आदेश दिया था। इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय में दायर की गई याचिका पर हुई सुनवाई के बाद न्यायालय ने राज्यपाल के निर्देशों का पालन करने का आदेश दिया। जिसके बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने फेसबुक लाइव के माध्यम से राज्य की जनता से संवाद साधा और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं, ऐसी घोषणा की।
मुझे बहुमत का खेल नहीं खेलना है, जिन्हें शिवसेना प्रमुख और शिवसैनिकों ने बड़ा किया उन शिवसेना प्रमुख के बेटे को मुख्यमंत्री के पद से नीचे उतारने का पुण्य मिलता होगा तो उन्हें मिलने दो। उनकी यह खुशी कोई छीनने की कोशिश न करे। मुझे कुर्सी से चिपककर नहीं बैठना है। मैं मुख्यमंत्री पद का त्याग करता हूं, इसी के साथ-साथ विधान परिषद के विधायक पद से भी इस्तीफा देता हूं, ऐसी घोषणा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कल की।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने कल बहुमत परीक्षण का आदेश दिया। न्याय देवता के पैâसले को स्वीकार करना होगा। राज्यपाल के निर्देश के अनुसार लोकतंत्र का पालन होना ही चाहिए। राज्यपाल द्वारा लोकतंत्र का मान रखने के लिए धन्यवाद। डेढ़-पौने दो वर्षों से विधान परिषद के 12 सदस्यों की प्रलंबित सूची को भी उसी तत्परता से मंजूर कर लेंगे तो राज्यपाल का आदर और बढ़ जाएगा, ऐसा उन्होंने कहा।
औरंगाबाद को संभाजीनगर ऐसा नामांतरण करने के दौरान कांग्रेस-राष्ट्रवादी ने विरोध किए बगैर तुरंत मंजूरी दे दी, उनका आभार मानता हूं। आज तक जिन्हें यह करना चाहिए था उन्होंने किया नहीं। जिनका विरोध होने का आभास कराया गया उन्होंने प्रस्ताव मंजूर करने में साथ दिया। जिन्होंने हमें बड़ा किया उन्हें ही भूल जाना। सत्ता आने के बाद जिन्हें बहुत कुछ दिया वे नाराज हो गए, ऐसा तंज मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बागी विधायकों पर कसा।
शिवसेनाप्रमुख रिक्शावाले, टपरीवाले से लेकर हाथभट्ठी वालों को भी अच्छे मार्ग पर ले आए। उन्हें नगरसेवक और विधायक बनाया, परंतु यही लोग बड़े बनने पर उन्हें भूलने लगे। जिन्हें हमने बड़ा किया, सत्ता आने पर जो संभव था वो सब दिया। वे आज नाराज हो गए हैं, परंतु आम शिवसैनिक ‘मातोश्री’ पर आकर हम आपके साथ होने की बात कहते हैं। जिन्हें इतना दिया वे नाराज हो गए और जिन्हें कुछ नहीं दिया वे आज हमारे साथ हैं। इसे ही मानवता कहते हैं। यही वास्तविक शिवसेना है, ऐसा उद्धव ठाकरे ने बागियों पर तंज कसते हुए कहा।
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कल रात राज्य की जनता से संवाद साधा। शिवराय के रायगड के लिए निधि देकर हमने सरकार के कार्य का शुभारंभ किया था, ऐसा उद्धव ठाकरे ने कहा। किसानों को दिए गए वचन के अनुसार उन्हें कर्ज से मुक्त किया और अभी भी हमने फसल बीमा योजना का बीड पैटर्न लागू किया है, ऐसा कहने के दौरान मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र की जनता को दी।
किसी की बुरी नजर लग गई!
ठाकरे ने कहा, ‘कुछ अच्छा चल रहा था कि उसे बुरी नजर लग गई, ऐसा कहते हैं। ये किसकी बुरी नजर है ये आप जानते हो।’ ऐसा कहते हुए उद्धव ठाकरे ने विरोधियों पर निशाना साधा।
संभाजीनगर और धाराशीव के नामांतरण का प्रस्ताव पेश करने के बाद कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस में से किसी ने भी एक अक्षर का विरोध नहीं किया और तुरंत मंजूरी दे दी, ऐसा कहते हुए उद्धव ठाकरे ने दोनों पार्टियों के सहयोगियों और पार्टी अध्यक्ष शरद पवार तथा सोनिया गांधी का आभार व्यक्त किया। सिर्फ इस प्रस्ताव के समय शिवसेना से मैं, आदित्य, सुभाष देसाई और अनिल परब ऐसे चार मंत्री ही उपस्थित थे इसका दुख है। ऐसी व्यथा भी उद्धव ठाकरे ने व्यक्त की। जिन्हें अब तक यह कर लेना चाहिए था वे इससे उदासीन रहे और जो विरोध में हैं, ऐसा एहसास कराया जा रहा था वे साथ में रहे, ऐसी भावना उन्होंने व्यक्त की।
रिक्शा वाला, पानवाला न जाने कितनों को मंत्री बनाया बाला साहेब ने आज वो लोग उन्हें भूल गए
शिवसेना ने आम लोगों को बड़ा बनाया। रिक्शावाले, टपरीवालों से लेकर हाथभट्ठी वालों तक को शिवसेना प्रमुख ने अच्छे मार्ग पर लाया। नगरसेवक, महापौर, विधायक, मंत्री, सांसद बनाया, परंतु वही लोग बड़ा बनने के बाद शिवसेना को ही भूलने लगे। जिन्हें दिया वे नाराज हैं और जिन्हें नहीं दिया वे पूरे साहस के साथ, साथ हैं। बीते चार-पांच दिनों में ‘मातोश्री’ पर आने के बाद लगातार आम लोग आते हैं और साहेब चिंता मत करो आप सिर्फ लड़ो हम आपके साथ हैं, ऐसा कहते हैं। इसे इंसानियत कहते हैं, इसे शिवसेना कहते हैं और इसे शिवसैनिक कहते हैं। यह जो हमारा नाता है उसे नाते के जोर पर सेना आज तक मजबूती से खड़ी रही है। कई चुनौतियां आई और इन सामान्य लोगों की मदद से उन्हें नाकाम करके शिवसेना खड़ी है।
मुझे आपके प्रेम और आशीर्वाद की मिठाई चाहिए। वारकरी कहते हैं कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के हाथों पूजा होनी चाहिए। जो अच्छा होगा वह होगा। वह अच्छा करने के लिए आशीर्वाद चाहिए, ऐसा उद्धव ठाकरे ने कहा।
‘जीवन सार्थक होने की आज मेरी भावना है क्योंकि शिवसेनाप्रमुख ने औरंगाबाद का संभाजीनगर नाम रखा था उसका संभाजीनगर नामकरण आज हमने किया। इसी तरह उस्मानाबाद को भी धाराशीव नाम हमने दिया है, ऐसा उद्धव ठाकरे ने कहा। जहां छोटे से बड़े हुए, मुख्यमंत्री बने, उस बांद्रा स्थित गवर्नमेंट कॉलोनी में रहनेवाले सरकारी कर्मचारियों को उनके अधिकारों का घर मिले इसके लिए भूखंड भी मंजूर किया, ऐसा भी उन्होंने कहा।