मुंबई: महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा और लाउडस्पीकर पर राजनीति तकरार बढ़ती जा रही है। अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत राणा और उनके विधायक पति रवि राणा को गिरफ़्तार करके खार पुलिस स्टेशन लाया गया। दोनों के खिलाफ अपने बयानों से धर्म, जाति के आधार पर विद्वेष फैलाने का आरोप है।
मुंबई पुलिस ने कहा,''विधायक रवि राणा और सांसद नवनीत राणा के ख़िलाफ़ खार पुलिस स्टेशन में धारा 153 (A), 34, IPC r/w 37 (1) 135 बॉम्बे पुलिस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। दोनों को खार स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया है। आगे की जांच खार पुलिस स्टेशन द्वारा की जा रही है|
राणा दंपत्ति के खिलाफ मुंबई के खार पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 153 ए (धर्म, जाति या भाषा के आधार पर 2 समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के लिए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल खार पुलिस स्टेशन में दोनों से पूछताछ चल रही है। रविवार को दोनों को बांद्रा कोर्ट में पेश किया जाएगा।
राणा की ओर से भी शिवसैनिकों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई है। इसमें आरोप लगाया गया कि एक रणनीति के तहत शिवसैनिकों को मेरे घर भेजा गया और तोड़फोड़ करवाई गई। हमारे खिलाफ बयानबाजी करवाई गई, साथ ही जान से मारने की बात भी कही गई।
अमरावती के सांसद नवनीत राणा और विधायक रवि राणा ने मुंबई पुलिस को लिखित शिकायत दी और कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, शिवसेना नेता अनिल परब और संजय राउत सहित सभी 700 लोगों पर भी धारा 120 B, 143, 147, 148, 149 , 452, 307, 153A, 294, 504, 506 के तहत मामला दर्ज़ किया जाना चाहिए।
DCP मुंबई मंजूनाथ सिंगे ने कहा,''नवनीत राणा और रवि राणा के आवास के बाहर जमा हुए शिवसैनिकों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज़ की गई है। हम नामों की जांच कर रहे हैं। दोनों का मेडिकल खार पुलिस स्टेशन में ही चल रहा था जिससे कानून-व्यवस्था से संबंधित स्थिति से बचा जा सके|
गिरफ़्तारी गैर क़ानूनी, अवैध और असंवैधानिक: रवि और नवनीत राणा के वकील
रवि और नवनीत राणा के वकील रिजवान मर्चेंट ने कहा,'''रवि राणा और नवनीत राणा के ख़िलाफ़ बॉम्बे पुलिस एक्ट की धारा 153A, 35, 37, 135 के तहत FIR दर्ज़ की गई है। मेरे मुवक्किल का कहना है कि गिरफ़्तारी गैर क़ानूनी, अवैध और असंवैधानिक है। एक महाराष्ट्र विधानसभा में विधायक और दूसरा सांसद हैं| गिरफ़्तारी से पहले स्पीकर की अनुमति लेनी चाहिए थी लेकिन किसी भी तरह की अनुमती नहीं ली गई। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, धारा 41(A) का नोटिस केस की स्थापना से 14 दिनों के अंदर दिया जाना चाहिए, जो नहीं दिया गया था|