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देश में सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक लोकतंत्र का घोर अभाव: मायावती ने डॉ. अंबेडकर को उनकी पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि अर्पित की, केंद्र व यूपी सरकार पर बरसी

  • by: news desk
  • 06 December, 2022
देश में सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक लोकतंत्र का घोर अभाव: मायावती ने डॉ. अंबेडकर को उनकी पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि अर्पित की, केंद्र व यूपी सरकार पर बरसी

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 6 दिसम्बर 2022, मंगलवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर को उनकी पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने पार्टी के संस्थापक कांशीराम को भी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने बेहतरीन संविधान देकर देश दुनिया में नाम रोशन किया। मायावती ने कहा कि देश व यूपी सहित राज्यों में सत्ता पर उन शक्तियों का हावी हो जाना अति - चिन्तनीय जो अपने संकीर्ण राजनीतिक एवं चुनावी स्वार्थ की ख़ातिर बाबा साहेब व संविधान का सहारा तो लेते हैं, किन्तु उनकी असली मंशा के विरुद्ध देशवासियों के वास्तविक हित व कल्याण के विरुद्ध ज्यादातर धन्नासेठों के हाथों में खेलकर उसकी अवहेलना करते हैं। 


उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि, ''इसीलिए सरकारें सभी प्रकार के अपने द्वेष व अहंकार को त्यागकर संविधान की असली मंशा के प्रति ईमानदार व समर्पित होकर काम करके लोगों को यहाँ व्याप्त जबरदस्त गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा व स्वास्थ्य आदि जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से मुक्ति दिलाएं यही संविधान का सम्मान व बाबा साहेब डा. अम्बेडकर को सच्ची श्रद्धाजलि होगी। उन्होंने कहा कि,''गरीबों, दलितों, पिछड़ों, अक्लियतों के हक व न्याय की उपेक्षा तत्काल बंद हो । क्योंकि अति- मानवतावादी व कल्याणकारी संविधान पर पूरी निष्ठा व ईमानदारी के साथ अमल नहीं होने के कारण ही देश के करोड़ों गरीब, मजदूर, मजलूम किसान तथा अन्य मेहनतकश समाज की उपेक्षा व तिरस्कार लगातार जारी, उनके अच्छे दिन कब आयेंगे?| बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के समतामूलक व कल्याणकारी संविधान व उसके मानवीय मूल्यों के रक्षा व संघर्ष की शपथ सभी को बार-बार लेते रहने की जरूरत है तथा उनके बताए हुए लोकतांत्रिक रास्ते से सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करके मूल समस्या का समाधान निकालना होगा 


सत्ता में बैठे लोग राजनीतिक एवं चुनावी स्वार्थ की ख़ातिर बाबा साहेब का सहारा लेते हैं

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने यहाँ सत्ता पर उन शक्तियों के हावी हो जाने पर गहरी चिन्ता व्यक्त की जो अपने संकीर्ण राजनीतिक एवं चुनावी स्वार्थ की ख़ातिर संविधान व बाबा साहेब का सहारा तो लेते नहीं थकते हैं, किन्तु संविधान की असली मंशा के विरुद्ध देशवासियों के वास्तविक हित व कल्याण के मामले में धन्नासेठों के हाथों में खेलकर उनकी घोर अवहेलना करने की नीति पर चलते हैं।


इसीलिए केन्द्र व यूपी की सरकार भी अपनी सभी प्रकार के द्वेषपूर्ण व असमावेषी नीति, व्यवहार एवं अहंकार आदि को त्यागकर संविधान की मंशा के प्रति ईमानदार व समर्पित होकर काम करके लोगों को यहाँ व्याप्त जबरदस्त गरीबी, बेरोजगारी एवं महंगाई से मुक्ति दिलाने को प्राथमिकता दें, यही संविधान का सम्मान व इसके निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को सच्ची श्रद्धाजलि होगी।



इसी क्रम में यह सवाल उचित ही है कि बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के समतामूलक एवं कल्याणकारी संविधान पर अगर पूरी निष्ठा व ईमानदारी के साथ अमल हो रहा होता तो क्या देश को पिछड़ापन से तथा देशवासियों को गरीबी, बेरोज़गारी, शोषण, अन्याय-अत्याचार तथा असुरक्षा आदि की घुटन से अब तक काफी कुछ मुक्ति मिलकर भारत विश्वगुरु के रूप में अग्रसर नहीं हो गया होता? सरकारों द्वारा मजलूम व मेहनतकश समाज की इस प्रकार की घोर उपेक्षा व तिरस्कार लगातार क्यों?


हर चुनाव को किसी भी कीमत पर जीतने को ही राजनीति का मुख्य मकसद बनाना....
इसके साथ ही, यहाँ देश में होने वाले हर चुनाव को किसी भी कीमत पर जीतने को ही राजनीति का मुख्य मकसद बनाना और फिर उस सरकार को कायम रखने के लिए सभी मान मर्यादा, बुनियादी मूल्यों तथा लोक-लज्जा आदि को त्याग कर सत्ता का दुरुपयोग व संविधान को उसकी असली मंशा के विरुद्ध अनैतिक इस्तेमाल करने से ही देश अपने रास्ते से भटक कर यहाँ के लोगों का जीवन और भी अधिक कष्टदायी बनाता जा रहा है। इसके लिए हर तरफ से उंगली का उठना स्वाभाविक है, जो संविधान का सम्मान करने वाली किसी भी सरकार के लिए भी चिन्ता की बात जरूर होनी चाहिए।


देशवासियों की दशा व दिशा लगातार अति - दुःखद व चिन्तनीय

इस प्रकार इस घोर स्वार्थी माहौल में अति- मानवतावादी, समावेशी (inclusive) व अपार कल्याणकारी संविधान रखने वाले भारत देश की सरकारें भी अगर संकीर्ण सोच, स्वार्थी एवं जनहित के प्रति बेफिक्र व बेखौफ हो जाएं तो इससे देश व दुनिया को होने वाले नुकसान से कौन बचा सकता है। निश्चय ही आज बाबा साहेब डा. अम्बेडकर परिनिर्वाण दिवस पर देश के लोगों की ज्वलन्त समस्याओं से जुड़ी ऐसी ख़ास बातें ज़रूरी है क्योंकि संविधान को उसकी असली जनहितैषी मंशा व प्रावधानों के हिसाब से लागू नहीं किया जाना दुःखद व दुर्भाग्यपूर्ण । इस कारण देशवासियों की दशा व दिशा लगातार अति - दुःखद व चिन्तनीय बनी हुई है, जिसमें गरीब, मजलूम व दबे-कुचले समाज के लोगों की संख्या सर्वाधिक है। इस विशाल बहुजनों की दयनीय दशा के लिए यहाँ की सत्ता पर काबिज सरकार की गलत नीति व कार्यकलाप ही अगर जिम्मेदार नहीं हैं तो फिर और कौन कसूरवार है?


अम्बेडकर  के आदर्शों को जीवित रखेंगे, तभी जनता का भला हो पाएगा

बी एसपी की प्रमुख मायावती ने सरकारों से कहा कि वे अपनी कथनी से ज्यादा अपनी करनी के माध्यम से परमपूज्य बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के आदर्शों को जीवित व जीवन्त रखेंगे तभी देश की जनता का सही से यहाँ भला हो पाएगा, वरना केवल रस्म अदाएगी से न तो पहले उन गरीब मेहनतकशों का कुछ खास भला हुआ है और न ही आगे उनके कुछ अच्छे दिन आने वाले हैं।


देश में सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक लोकतंत्र का घोर अभाव

इसके अलावा, सर्वविदित है कि अपने देश में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का नाम आते ही उनके समतामूलक संविधान की स्वतः याद आ जाती है तथा संविधान का कहीं भी जिक्र होते ही बाबा साहेब के देश निर्माण की अपार जनहितैषी मानवतावादी सोच स्वाभाविक तौर पर दिल-दिमाग को कुरदने लगती है और वे संघर्ष व उम्मीद की नई किरण बन जाते है। ऐसे अनुपम व मिशनरी सोच का संविधान वाले अपने भारत देश के लगभग 125 करोड़ लोगों की गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव तथा उस पर सरकारी अहंकार से त्रस्त जीवन की वास्तविकता दुःखद एवं दुर्भाग्यपूर्ण भी है। देश में सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक लोकतंत्र का घोर अभाव ।



यूपी व देश में हर जगह उभर रहे अधिकतर गैर-समावेशी (non-inclusive) जातिवादी, साम्प्रदायिक गैर-संवैधानिक दोष एवं द्वेषपूर्ण सोच व कार्यशैली आदि के कारण भारत देश का उसकी मर्यादा व विशिष्ट पहचान के विरुद्ध चर्चा का विषय होना अति चिन्ताजतक स्थिति है। देश की स्वतंत्रता के उपरान्त भारत की नई विशिष्ट पहचान उसके समतामूलक मानवतावादी संविधान से ही बनी है, जिसके आधार पर ही सरकार विश्व में अपने कार्यों का बचाव भी करती रहती है, जबकि इसकी कथनी व करनी में काफी फर्क साफ तौर पर उजागर है।


देश के सौ करोड़ से अधिक लोग दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज

देश के सौ करोड़ से अधिक आत्म-सम्मान व स्वाभिमानी मेहनतकश लोग दो वक्त की रोटी के लिए आज मोहताज बना दिए गए है। यह सरकार की विफलता नही तो और क्या है? बाबा साहेब डा. अम्बेडकर ने पूरी जिन्दगी द्वेष तथा हर प्रकार की दुःख तकलीफ झेलकर ख़ासकर देश के बहुजन गरीबों व उपेक्षितों को इज्जत के साथ जीने के लिए संविधान में जो अधिकार व व्यवस्थायें की हैं उनको तिलांजलि दिया जाना क्या घोर अनुचित नहीं? सरकार गरीबों, मजलूमों व अन्य उपेक्षितों के प्रति इतनी ज्यादा अहंकारी एवं निरंकुश हो जाएंगी, ऐसी कल्पना इस देश के संविधान ने कभी भी नहीं की थी।


लोकतांत्रिक रास्ते से सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त कर मूल समस्या का समाधान निकालना होगा

इसीलिए परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के संविधान के सम्मान व उसके समतामूलक मानवीय मूल्यों के रक्षा व संघर्ष की शपथ उनके अनुयाइयों के साथ-साथ सभी देशप्रेमियों को बार-बार लेते रहने की जरूरत है। जनता को अपने साथ-साथ देश की सच्ची संवैधानिक चिन्ता अन्ततः खुद ही करनी होगी तथा बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के बताए हुए लोकतांत्रिक रास्ते से सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करके अपनी चिर-परिचित समस्याओं का समाधान भी निकालना होगा, इसी में ही मुक्ति है ।





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