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लव जिहाद: यह जनहित का कानून, अध्यादेश पर बोले यूपी मंत्री मोहसिन रज़ा- कोई अपना नाम सुरेश- दिनेश बताकर बच्चियों को ज़बरदस्ती बहलाते फुसलाते थे....

  • by: news desk
  • 24 November, 2020
लव जिहाद: यह जनहित का कानून, अध्यादेश पर बोले यूपी मंत्री मोहसिन रज़ा- कोई अपना नाम सुरेश- दिनेश बताकर बच्चियों को ज़बरदस्ती बहलाते फुसलाते थे....

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी कैबिनेट ने 'उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म समपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020' (Love jihad' Ordinance News in UP) पास कर दिया है।लव जिहाद के खिलाफ लाए गए अध्यादेश पर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहसिन रज़ा ने कहा कि ,'' योगी सरकार ने पहले ही कहा था कि अगर जरूरत होगी तो अध्यादेश लाया जाएगा और हमें जरूरत लगी। जिस तरह से धर्म परिवर्तन को लेकर घटनाएं बढ़ रही थी। बच्चियों को धर्मांतरण कराया जा रहा था|




मंत्री मोहसिन रज़ा ने कहा कि ,'कोई अपना नाम सुरेश, कोई दिनेश, कोई रमेश बताकर बच्चियों को ज़बरदस्ती बहलाते फुसलाते थे। जब पकड़े जा रहे थे तो कोई मुख्तार, कोई अंसार, कोई रईस निकल रहा था... यह जनहित का कानून है, इससे हमारी बच्चियों की जिंदगी सुरक्षित होंगी| मोहसिन रज़ा ने कहा कि,'' हमने देखा कि धर्म परिवर्तन 'लव जिहाद' की साजिश का हिस्सा थे। इन धर्मांतरणों के पीछे एक बड़ी साजिश है, जिसे हमारी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सुलझाया गया था|




उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज मंत्रिपरिषद द्वारा ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020’ के आलेख को अनुमोदित कर दिया गया है।



यह अध्यादेश ऐसे धर्म परिवर्तन को एक अपराध की श्रेणी में लाकर प्रतिषिद्ध करेगा, जो मिथ्या निरूपण, बलपूर्वक, असम्यक प्रभाव, प्रपीड़न, प्रलोभन या अन्य किसी कपट रीति से या विवाह द्वारा एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए किया जा रहा हो। यह अवयस्क महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के सम्बन्ध में ऐसे धर्म परिवर्तन के लिए वृहत दण्ड का प्रावधान करेगा। सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामले में कतिपय सामाजिक संगठनों का पंजीकरण निरस्त करके उनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जायेगी।




धर्म परिवर्तन, मिथ्या निरूपण, बलपूर्वक, असम्यक प्रभाव, प्रपीड़न, जबरदस्ती, प्रलोभन या अन्य किसी कपटपूर्ण रीति से या विवाह द्वारा एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन नहीं किया गया, के सबूत का भार ऐसे धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्ति पर एवं ऐसे संपरिवर्तन-व्यक्ति पर होगा।




एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए विहित प्राधिकारी के समक्ष उद्घोषणा करनी होगी कि यह धर्म परिवर्तन, मिथ्या निरूपण, बलपूर्वक असम्यक, प्रभाव, प्रपीड़न, जबरदस्ती, प्रलोभन या अन्य किसी कपटपूर्ण रीति से या विवाह द्वारा एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन करने के लिए नहीं है। किसी एक धर्म से अन्य धर्म में लड़की के धर्म में परिवर्तन से एक मात्र प्रयोजन के लिए किये गये विवाह पर ऐसा विवाह शून्य की श्रेणी में लाया जा सकेगा।



उक्त अध्यादेश में मिथ्या निरूपण बल, असम्यक प्रभाव, प्रपीड़न, प्रलोभन या किसी कपटपूर्ण माध्यम द्वारा एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन हेतु विवश किये जाने पर उस कृत्य को एक संज्ञेय अपराध के रूप में मानते हुए सम्बन्धित अपराध गैर जमानतीय प्रकृति का होने और उक्त अभियोग को प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में विचारणीय बताये जाने का प्राविधान किया जा रहा है।



उपबन्धों का उल्लंघन करने हेतु कम से कम 01 वर्ष अधिकतम 05 वर्ष की सजा जुर्माने की राशि 15,000 रुपए से कम नहीं होगी, का प्राविधान किया गया है, जबकि अवयस्क महिला, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की महिला के सम्बन्ध में धारा-3 के उल्लंघन पर कारावास कम से कम 02 वर्ष अधिकतम 10 वर्ष तक का होगा और जुर्माने की राशि 25,000 रुपए से कम नहीं होगी। सामूहिक धर्म परिवर्तन के सम्बन्ध में करावास 03 वर्ष से कम नहीं किन्तु 10 वर्ष तक हो सकेगा और जुर्माने की राशि 50,000 रुपए से कम नहीं होगी।




अध्यादेश के अनुसार धर्म परिवर्तन के इच्छुक होने पर विहित प्रारूप पर जिला मजिस्ट्रेट को एक माह पूर्व सूचना देनी होगी। इसका उल्लंघन किये जाने पर 06 माह से 03 वर्ष तक की सजा और जुर्माने की राशि 10,000 रुपए से कम की नहीं होने का प्राविधान किया जा रहा है।




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