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अखिलेश यादव ने बोला BJP सरकार पर हमला, कहा-भाजपा की रणनीति धोखा देना है, वह कभी नहीं बदलेगी

  • by: news desk
  • 14 February, 2020
अखिलेश यादव ने बोला BJP सरकार पर हमला, कहा-भाजपा की रणनीति धोखा देना है, वह कभी नहीं बदलेगी

लखनऊ:  समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने BJP सरकार पर हमला बोला| अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि भाजपा की रणनीति धोखा देना है। वह कभी नहीं बदलेगी, आपसी भाईचारे में जहर घोलने का काम किया है और धर्म तथा जाति की राजनीति का प्रदूषण फैलाया हैं।





उन्होने कहा भाजपा की रणनीति धोखा देना है। वह कभी नहीं बदलेगी। उसने पूरा सामाजिक तानाबाना तोड़ दिया है। आपसी भाईचारे में जहर घोलने का काम किया है और धर्म तथा जाति की राजनीति का प्रदूषण फैलाया हैं। अपराधिक सियासत से मुल्क को बचाना है। सियासत में अच्छे लोग आएंगे तो सियासत स्वस्थ होगी। नफरत की पराजय तब सुनिश्चित होगी। अखिलेश यादव आज पार्टी मुख्यालय लखनऊ में कवियों एवं शायरों से वार्ता के दौरान ये बात कही|




उन्होने कहा कि अधिकांश भारतीय आज भी सामाजिक रूप से उदार, राजनीतिक रूप से समझदार और धर्म जैसे व्यक्तिगत विषय को राजनीति के मंच में घसीटकर अपना सियासी फूल खिलाने वालों के विरूद्ध है। उन्होंने भाजपा पर आरक्षण व्यवस्था को लगातार कमजोर करने और दलित, वंचित तथा दमित समाज को उपेक्षित व अपमानित करने का दोषी ठहराया। उन्होंने फिर जातियों की गणना पर जोर दिया ताकि सबको संख्यानुपात में उनका हक मिल सके। समाजवादी चाहते हैं भारतीय संविधान की व्यवस्था लागू रहे।




अखिलेश ने सीएए के विरोध में आवाज उठाने वाली महिलाओं को अपमानित किए जाने के प्रति आक्रोश जताते हुए कहा कि औरतो को भी आजादी का परचम उठाने का हक है। संघर्ष कभी हिन्दू-मुसलमान नहीं हो सकता हैं भाजपा बदले और विद्वेष की भावना से विपक्ष पर हमलावर है। उसे अपनी कुनीतियों का विरोध ‘देशद्रोह‘ लगता है।





उन्होने कहा कि समाजवादी सरकार के ‘यशभारती‘ सम्मान को भाजपा की राज्य सरकार द्वारा समाप्त किए जाने का योगी सरकार का अपयश पूर्ण निर्णय बताया। यह निर्णय ‘यशभारती‘ का ही अपमान नहीं है बल्कि विद्धानों और अपने अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों का भी अपमान है। पुनः समाजवादी सरकार में पहले से भी अधिक सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा अपसंस्कृति का वाहक राजनीतिक संगठन है और आरएसएस तथा कथित सांस्कृतिक संगठन है। इनकी विचार धारा लोगों को जोड़ने के बजाय तोड़ने वाली है। इनका स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों से कुछ लेना देना नहीं है। भाजपा सरकार में सरकार कम्पनी बन गई है।





साहित्यकारों ने इस मौके पर कहा कि जो सपना कवि शायर देखते हैं उसे राजनेता लागू करते हैं। गंगा-यमुनी संस्कृति से ही समाज बच सकता है। सत्ता दल के अहंकार को देखते हुए वे सभी आशा की किरन के रूप में अखिलेश जी को देखते है। एक शायर ने पढ़ा- ‘तुम्हारे जैसा या हूबहू अच्छा नहीं लगता। कोई भी अब तुम्हारा जैसा अच्छा नहीं लगता। लौट भी आओ अब तुम्हारे बिना लखनऊ अच्छा नहीं लगता। ‘‘कवियों-शायरों की यह भी हुंकार थी-सिंहासन खाली करना ही पड़ेगा, क्योंकि जनता आती है।‘‘ उदय प्रताप सिंह ने यह पढ़ा-‘‘बूंद में अटकी हवा है, बुलबुला कुछ भी नहीं। किस कदर मगरूर है जैसे खुदा कुछ भी नहीं।‘‘ उनका दूसरी मशहूर रचना है ‘‘ना मेरा है न तेरा है, ये हिन्दुस्तान सबका है। नहीं समझी गई ये बात तो नुकसान सबका हैै।‘‘ वसीम बरेलवी एमएलसी ने पढ़ा- ‘‘आसमां इतनी बुलंदी पर इतराता है। भूल जाता है जमीं से ही नज़र आता है।‘






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