नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2016 में नरेंद्र मोदी सरकार के नोटबंदी के कदम की पुष्टि करते हुए कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई दोष नहीं था।सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने सोमवार को केंद्र सरकार के 2016 के नोटबंदी के फैसले को 4-1 के बहुमत से बरकरार रखा, जिसमें ₹500 और ₹1,000 के मूल्यवर्ग के नोट चलन से बाहर कर दिए गए थे।
नोटबंदी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि,''सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी को वैधानिकता को चुनौती देने वाली 58 याचिकाओं को अस्वीकार कर दिया है... कांग्रेस पार्टी ने भी इस पर हंगामा खड़ा किया था। नोटबंदी के अगले साल ही टैक्स कलेक्शन में 18% की वृद्धि हुई थी और 2.38 लाख शेल कंपनियां भी पकड़ी गई थीं|
रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि,' 2016 में मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले, जिसमें 500 और 1,000 के नोटों को जो डिमोनेटाइज किया था, उसकी वैधानिकता को चुनौती देने वाली सारी याचिकाओं को कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया है।
रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि,ये पूरी नीति टेरर फंडिंग, फेक करेंसी और मनी लॉन्ड्रिंग आदि को रोकने के लिए की गई थी। टेररिज्म की रीढ़ को तोड़ने में डिमोनेटाइज ने महत्वपूर्ण काम किया। यह फैसला देशहित में किया गया था और आज कोर्ट ने इस निर्णय को सही पाया है। जबकि कांग्रेस ने इसे लेकर काफी हंगामा किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी को सही ठहराया, कहा- केंद्र की निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई खामी नहीं थी