नई दिल्ली: दुनियाभर के 17 मीडिया संस्थानों की कंसोर्टियम ने दावा किया है कि सरकारें पत्रकारों और ऐक्टिविस्टों की जासूसी करा रही है। भारतीय मंत्रियों, विपक्षी नेताओं और पत्रकारों के फोन नंबर उस लीक डाटाबेस में पाए गए हैं, जिन्हें इजरायली स्पाईवेयर Pegasus के इस्तेमाल से हैक किया गया है| द वायर और 16 मीडिया सहयोगियों की एक पड़ताल के मुताबिक, इजराइल की एक सर्विलांस तकनीक कंपनी के कई सरकारों के क्लाइंट्स की दिलचस्पी वाले ऐसे लोगों के हजारों टेलीफोन नंबरों की लीक हुई एक सूची में 300 सत्यापित भारतीय नंबर हैं, जिन्हें मंत्रियों, विपक्षी नेताओं, पत्रकारों, न्यायपालिका से जुड़े लोगों, कारोबारियों, सरकारी अधिकारियों, अधिकार कार्यकर्ताओं आदि द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है|
द गार्जियन ने पेगासस स्पाईवेयर साफ्टवेयर के डेटा का अध्ययन कर दावा किया है कि इस सूची में समाचार वेबसाइट द वायर के एक सह-संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन और वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठकुरता का नाम शामिल है। ठकुराता के फोन को 2018 में हैक कर लिया गया था। गार्जियन की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उस समय ठकुराता इस बात की जांच कर रहे थे कि नरेंद्र मोदी सरकार कैसे फेसबुक का इस्तेमाल करके भारतीय लोगों के बीच ऑनलाइन 'गलत सूचना' फैला रही है।
द वायर और सहयोगी मीडिया संस्थानों द्वारा दुनिया भर में हजारों फोन नंबरों- जिन्हें इजरायली कंपनी के विभिन्न सरकारी ग्राहकों द्वारा जासूसी के लिए चुना गया था, के रिकॉर्ड्स की समीक्षा के अनुसार, 2017 और 2019 के बीच एक अज्ञात भारतीय एजेंसी ने निगरानी रखने के लिए 40 से अधिक भारतीय पत्रकारों को चुना था| लीक किया हुआ डेटा दिखाता है कि भारत में इस संभावित हैकिंग के निशाने पर बड़े मीडिया संस्थानों के पत्रकार, जैसे हिंदुस्तान टाइम्स के संपादक शिशिर गुप्ता समेत इंडिया टुडे, नेटवर्क 18, द हिंदू और इंडियन एक्सप्रेस के कई नाम शामिल हैं|
The Wire के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 2019 के लोकसभा आम चुनावों से पहले 2018 और 2019 के बीच ज्यादातर को निशाना बनाया गया|पेगासस को बचेने वाली इजरायली कंपनी NSO ग्रुप का दावा है कि वह अपने स्पाईवेयर केवल अच्छी तरह से जांची-परखी सरकारों को ही ऑफर करती है|
दरअसल, यह डेटा सबसे पहले पेरिस स्थित मीडिया एनजीओ फॉरबिडन स्टोरीज और एमनेस्टी इंटरनेशनल के पास लीक होकर पहुंचा था। बाद में इसे एक रिपोर्टिंग कंसोर्टियम के हिस्से के रूप में वॉशिंगटन पोस्ट, द गार्जियन समेत 17 मीडिया संस्थानों के साथ शेयर किया गया। लीक हुए डेटा में 50000 से अधिक फोन नंबरों की सूची है। ऐसा माना जा रहा है कि 2016 से एनएसओ अपने पेगासस साफ्टवेयर के जरिए इन लोगों की जासूसी कर रहा था।
रिपोर्ट के अनुसार, लीक हुए आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि संयुक्त अरब अमीरात की पहली महिला पत्रकार रौला खलाफ, मोरक्को के स्वतंत्र पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता उमर रेडी और अजरबैजानी खोजी पत्रकार खदीजा इस्मायिलोवा के नाम भी शामिल हैं। रौला खलाफ पिछले साल अखबार के इतिहास में पहली महिला संपादक बनी थीं। 2018 में जब उनका फोन हैक किया गया तब वह फाइनेंशियल टाइम्स में डिप्टी एडिटर थीं। उमर रेडी सरकार के कई भ्रष्टाचार का खुलासा कर चुके हैं। दावा किया जा रहा है कि 2018 और 2019 के दौरान एनएसओ के इस साफ्टवेयर से उनका फोन हैक किया गया था।