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'आपको डर एग्जाम का नहीं बल्कि आपके आसपास के माहौल का है': छात्रों और अभिभावकों से बोले PM मोदी

  • by: news desk
  • 07 April, 2021
'आपको डर एग्जाम का नहीं बल्कि आपके आसपास के माहौल का है': छात्रों और अभिभावकों से बोले PM मोदी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए छात्रों और अभिभावकों के साथ 'परीक्षा पे चर्चा 2021' कर रहे हैं। मोदी ने कहा,''हमें बच्चों पर दबाव नहीं बढ़ाना चाहिए। अगर बाहर का दबाव खत्म हो गया तो परीक्षा का दबाव कभी महसूस नहीं होगा।आत्मविश्वास फलेगा-फूलेगा। बच्चों को घर में तनाव मुक्त जीना चाहिए|



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,''आजकल बच्चों का आकलन परीक्षा के नतीजों तक ही सीमित हो गया है। परीक्षा में अंकों के अलावा भी बच्चों में कई ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें अभिभावक देख नहीं पाते। परीक्षा एक प्रकार से लंबी जिंदगी जीने का अवसर है। समस्या तब होती है, जब हम परीक्षा को जीवन-मरण का सवाल बना देते हैं|




आपको डर एग्जाम का नहीं बल्कि आपके आसपास के माहौल का है। मैं उन सब से , खासकर के माता-पिता से कहना चाहूंगा कि हमें दवाब नहीं बनाना है। एग्जाम जिंदगी में कई पड़ावों में से एक है। बच्चों को तनाव मुक्त जीवन देना है: प्रधानमंत्री 



आज कुछ माता-पिता को बच्चों के लिए वक्त नहीं होता है। मार्क्स के परे ही बच्चों में कई ऐसे टेलेंट होते हैं जिसे पेरेंट्स मार्क ही नहीं कर पाते हैं। एग्जाम आखिरी मौका नहीं है बल्कि एग्जाम तो लंबी जिंदगी के लिए अपने आप को कसने का उत्तम अवसर है : प्रधानमंत्री




समस्या तब होती है जब हम एग्जाम को ही जीवन-मरण का प्रश्न बना लेते हैं। दरअसल एग्जाम जीवन को गढ़ने का अवसर है। ताकि हम जीवन में और बेहतर कर सकें|जो लोग जीवन में बहुत सफल हैं, वो हर विषय में पारंगत नहीं होते हैं। लेकिन उनकी किसी एक विषय पर पकड़ जबरदस्त होती है:: प्रधानमंत्री



आपको भले कुछ विषय मुश्किल लगते हों, ये कोई आपके जीवन में कोई कमी नहीं है। आप बस ये ध्यान रखिए की इस मुश्किल लगने वाले सब्जेक्ट की पढ़ाई से खुद को दूर मत कीजिए । उससे भागिए मत: प्रधानमंत्री



खाली समय, इसको खाली मत समझिए, ये खजाना है, खजाना। खाली समय एक सौभाग्य है, खाली समय एक अवसर है। आपकी दिनचर्या में खाली समय के पल होने ही चाहिए, वरना तो जिंदगी एक रोबोट जैसी हो जाती है| खाली समय में आप ऐसा कुछ कर सकते हैं जिससे आपको सुख मिलता हो। आपको यह भी ध्यान रखना है कि खाली समय में हमें क्या नहीं करना चाहिए: प्रधानमंत्री



यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि खाली समय में किन चीजों से बचना चाहिए, नहीं तो वो ही चीज सारा समय खा जायेगी, पता भी नहीं चलेगा और अंत में रीलैक्स  होने के बजाय आप तंग आ जाएंगे, थकान महसूस करने लगेंगे: प्रधानमंत्री




अपने विचारों को, भावनाओं को प्रकट करने का एक क्रियेटिव तरीका दीजिये। क्रियेटिव आपको उस क्षेत्र में ले जा सकती है, जहां पहले कभी कोई नहीं पहुंचा हो, जो नया हो: प्रधानमंत्री



बच्चे बड़े स्मार्ट होते हैं। जो आप कहेंगे, उसे वो करेंगे या नहीं करेंगे, यह कहना मुश्किल है, लेकिन इस बात की पूरी संभावना होती है कि जो आप कर रहे हैं, वो उसे बहुत बारीक़ी से देखता है और दोहराने के लिए लालायित हो जाता है|मूल्यों को कभी भी थोपने का प्रयास न करें। मूल्यों को जीकर प्रेरित करने का प्रयास करें: प्रधानमंत्री





बच्चों के पीछे इसलिए भागना पड़ता है, क्योंकि उनकी रफ्तार हमसे ज्यादा है। बच्चों को सिखाने की, बताने की, संस्कार देने की जिम्मेदारी परिवार में सबकी है। लेकिन कई बार बड़े होने के बावजूद हमें भी तो जरा मूल्यांकन करना चाहिए| किसी को भी मोटिवेट करने का पहला पार्ट है - ट्रेनिंग। एक बार बच्चे का मन ट्रेन हो जाएगा तब उसके बाद मोटिवेशन का समय शुरू होगा: प्रधानमंत्री




बच्चों के अंदर जो प्रकाश आप देखना चाहते हैं, वो प्रकाश उनके भीतर से प्रकाशमान होना चाहिए। और वो आपके जाग्रत सक्रिय प्रयासों से संभव है, आप अपने एक्शन में जो बदलाव दिखाएंगे, वो बच्चे बहुत बारीकी से ऑबजर्व करेंगे| बच्चों को कभी भी भय पैदा करके, बदलने की कोशिश मत कीजिए। इससे एक तरह से नकारात्मक मोटिवेशन की संभावनाए बढ़ जाती हैं। इसलिए सकारात्म मोटिवेशन के साथ-साथ, बार-बार पॉजिटिव री-एन्फोर्समेंट पर बल देते रहना चाहिए: प्रधानमंत्री




सपनों में खोए रहना अच्छा लगता है। सपने देखना अच्छी बात है, लेकिन सपने को लेकर के बैठे रहना, और सपनों के लिए सोते रहना ये तो सही नहीं है। सपनों से आगे बढ़कर, अपने सपनों को पाने का संकल्प ये बहुत महत्वपूर्ण है| आपको सोचना चाहिए कि आपका वो कौन सा एक सपना है जिसे आप अपने जीवन का संकल्प बनाना चाहेंगे? जैसे ही आप ये संकल्प ले लेंगे आपको आगे का रास्ता भी उतना ही साफ दिखाई देने लगेगा: प्रधानमंत्री




वो बातें जिनसे आप पूरी तरह जुड़ गए हैं, मग्न हो गए हैं। वो बातें जो आपका हिस्सा बन गई हैं, आपके विचार प्रवाह का हिस्सा बन गई हैं। उन्हें आप कभी नहीं भूलते है| याद करने पर जोर देने के बजाय आपको उसे जीने की कोशिश करनी चाहिए,सहजता, सरलता, समग्रता के साथ। आपके पास भी वही सारी शक्तियां हैं, जो किसी टेलेंटेड व्यक्ति के पास होती है: प्रधानमंत्री





अपनी सारी टेंशन परीक्षा हॉल के बाहर छोड़कर जाना चाहिए। और आपको ये भी सोचना चाहिए कि जितनी तैयारी आपको करनी थी, आपने कर ली है। अब आपका फोकस प्रश्नों के अच्छे से उत्तर देने में होना चाहिए: प्रधानमंत्री




कोरोना काल में हमने अपने परिवार में एक दूसरे को ज्यादा नजदीकी से समझा है। कोरोना ने सोशल डिस्टेंसिंग के लिए मजबूर किया, लेकिन परिवारों में इमोशनल बॉन्डिंग को भी इसने मजबूत किया है| कोरोना काल ने ये भी दिखाया है कि एक संयुक्त परिवार की ताकत क्या होती है, घर के बच्चों के जीवन निर्माण में उनका कितना रोल होता है। कोरोना काल ने खुद के भीतर झांकने का भी अवसर दिया है| कोरोना आने के बाद आयुर्वेदिक काढ़ा,पौष्टिक भोजन, साफ-सफाई, इम्यूनिटी, ऐसे अनेक विषयों पर हम सबका ध्यान गया है। इन सब के लिए लोगों ने जो जो किया , वो अगर पहले से करते आ रहे होते तो शायद परेशानी इससे भी कम होती| अपने बच्चे के साथ उसकी generation की बातों में, उतनी ही दिलचस्पी दिखाइएगा, आप उसके आनंद में शामिल होंगे, तो आप देखिएगा generation gap कैसे खतम हो जाती है। 





आप जो पढ़ते हैं, वो आपके जीवन की सफलता और विफलता का पैमाना सिर्फ यही एकमात्र हो सकता। आप जो जीवन में करेंगे, वो आपकी सफलता और असफलता को तय करेंगे। लोगों के प्रेशर, सोसाइटी के प्रेशर, माता-पिता के प्रेशर, इन सबसे बाहर निकलिए| आज में आपको एक बड़े एग्जाम के लिए तैयार करना चाहता हूँ। ये बड़ा एग्जाम है जिसमें हमें शत-प्रतिशत मार्क्स लेकर पास होना ही है। ये है- अपने भारत को आत्मनिर्भर बनाना। ये है - वोकल फॉर लोकल को जीवन मंत्र बनाना: प्रधानमंत्री









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