नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) और उसके सहयोगियों या सहयोगी संगठनों या मोर्चों को तत्काल प्रभाव से पांच साल की अवधि के लिए एक ''गैरकानूनी संघ'' के रूप में घोषित किया। केंद्र सरकार द्वारा आज 5 साल के लिए PFI को बैन और उसके सहयोगियों को गैरकानूनी घोषित करने के बाद PFI कार्यालय के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
केंद्र ने कहा,''पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और उसके सहयोगी संगठनों या संबद्ध संस्थाओं या अग्रणी संगठनों को गंभीर अपराधों में लिप्त पाया गया है जिनमें आतंकवाद और उसका वित्तपोषण, नृशंस हत्याएं, देश के संवैधानिक ढांचे की अवहेलना, सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ना आदि शामिल हैं जो कि देश की अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता के लिए हानिकारक हैं।
इसलिए गृह मंत्रालय ने इस संगठन की नापाक गतिविधियों पर अंकुश लगाना आवश्यक पाया और इसलिए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और उसके सहयोगी संगठनों या संबद्ध संस्थाओं या अग्रणी संगठनों को विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 के प्रावधानों के अंतर्गत "विधिविरुद्ध संगठन" घोषित कर दिया है, जिनमें रिहैब इंडिया फाउंडेशन (आरआईएफ), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई), ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (एआईआईसी), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स आर्गेनाइजेशन (एनसीएचआरओ), नेशनल विमेंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन, केरल शामिल हैं।
एक सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि,'पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (जिसे इसमें इसके पश्चात 'पीएफआई कहा गया है) को सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अंतर्गत पंजीकरण संख्या एस/226/जिला दक्षिण/2010 के तहत दिल्ली में पंजीकृत किया गया था और रिहैब इंडिया फाउंडेशन (आरआईएफ)(पंजीकरण संख्या 1352, दिनाँक 17.03.2008), कैंपस फ्रंट ऑफ़ इंडिया (सीएफआई), आल इंडिया इमाम काउंसिल (एआईआईसी), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स आर्गेनाईजेशन (एनसीएचआरओ) (पंजीकरण संख्या एस-3256, दिनाँक 12.09.2010), नेशनल विमेंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन (पंजीकरण संख्या के सीएच-IV-00150/2016-17, दिनांक 02.12.2016) और रिहैब फाउंडेशन, केरल (पंजीकरण संख्या 1016/91) सहित इसके कई सहयोगी संगठन या सम्बद्ध संस्थाएं या अग्रणी संगठन हैं ;
और जबकि, , अन्वेषण से पीएफआई और इसके सहयोगी संगठन या सम्बद्ध संस्थाओं या अग्रणी संगठनों के बीच स्पष्ट सम्बन्ध स्थापित हुआ है,
और जबकि, , रिहैब इंडिया फाउंडेशन, पीएफआई के सदस्यों के माध्यम से धन जुटाता है और कैंपस फ्रंट ऑफ़ इंडिया, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन, रिहैब फाउंडेशन, केरल के कुछ सदस्य पीएफआई के भी सदस्य हैं तथा पीएफआई के नेता जूनियर फ्रंट, आल इंडिया इमाम काउंसिल, नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स आर्गेनाईजेशन (एनसीएचआरओ) और नेशनल विमेंस फ्रंट की गतिविधियों की निगरानी/ समन्वय करते हैं;
और जबकि, पीएफआई ने समाज के विभिन्न वर्गों जैसे युवाओं, छात्रों, महिलाओं, इमामों, वकीलों या समाज के कमजोर वर्गों के बीच अपनी पहुँच को बढाने के उद्देश्य से उपरोक्त सहयोगी संगठनों या सम्बद्ध संस्थाओं या अग्रणी संगठनों की स्थापना की है जिसका एकमात्र उद्देश्य इसकी सदस्यता, प्रभाव और फण्ड जुटाने की क्षमता को बढ़ाना है;
और जबकि, उपरोक्त सहयोगी संगठनों या सम्बद्ध संस्थाओं या अग्रणी संगठनों और पीएफआई के बीच “हब और स्पोक” जैसा संबध है, जिसमें पीएफआई 'हब' के रूप में कार्य करते हुए सहयोगी संगठनों या सम्बद्ध संस्थाओं या अग्रणी संगठनों की जनता के बीच पहुँच और फण्ड जुटाने की क्षमता का उपयोग विधि विरुद्ध क्रियाकलापों हेतु अपनी क्षमता बढाने के लिए करता है तथा ये सहयोगी संगठन या सम्बद्ध संस्थाएं या अग्रणी संगठन “जड़ और शिराओं" की तरह भी कार्य करते हैं जिनके माध्यम से पीएफआई को निधि एवं शक्ति प्राप्त होती है;
और जबकि, पीएफआई और इसके सहयोगी संगठन या सम्बद्ध संस्थाएं या अग्रणी संगठन सार्वजनिक तौर पर एक सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक संगठन के रूप में कार्य करते हैं लेकिन ये गुप्त एजेंडा के तहत समाज के एक वर्ग विशेष को कट्टर बनाकर लोकतंत्र की अवधारणा को कमजोर करने की दिशा में कार्य करते हैं तथा देश के संवैधानिक प्राधिकार और संवैधानिक ढाँचे के प्रति घोर अनादर दिखाते हैं;
और जबकि, पीएफआई और इसके सहयोगी संगठन या सम्बद्ध संस्थाएं या अग्रणी संगठन विधिविरुद्ध क्रियाकलापों में संलिप्त रहे हैं, जो देश की अखंडता, सम्प्रभुता और सुरक्षा के प्रतिकूल है और जिससे शांति तथा साम्प्रदायिक सदभाव का माहौल खराब होने और देश में उग्रवाद को प्रोत्साहन मिलने की आशंका है,
और जबकि, पीएफआई के कुछ संस्थापक सदस्य स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के नेता रहे हैं तथा पीएफआई का सम्बन्ध जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) से भी रहा है, ये दोनों संगठन प्रतिबंधित संगठन
और जबकि, पीएफआई के वैश्विक आतंकवादी समूहों, जैसे कि इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस), के साथ अंतर्राष्ट्रीय सम्पर्क के कई उदाहरण हैं;
और जबकि, पीएफआई और इसके सहयोगी संगठन या सम्बद्ध संस्थायें या अग्रणी संगठन, चोरी-छिपे देश में असुरक्षा की भावना को बढ़ावा देकर एक समुदाय के कट्टरपंथ को बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं, जिसकी पुष्टि इस तथ्य से होती है कि इसके कुछ सदस्य अंतर्राष्ट्रीय आतंकी संगठनों से जुड़ चुके हैं;
और जबकि, , केंद्रीय सरकार का यह मत है कि उपर्युक्त कारणों के दृष्टिगत विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 (1967 का 37) की धारा 3 की उप-धारा (1) के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग करना आवश्यक है, जिसकी निम्नलिखित तथ्यों से भी पुष्टि होती है; यथा,
1- पीएफआई कई आपराधिक और आतंकी मामलों में शामिल रहा है और यह देश की संवैधानिक प्राधिकार का अनादर करता है तथा बाह्य स्रोतों से प्राप्त धन और वैचारिक समर्थन के साथ यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है,
2- विभिन्न मामलों में अन्वेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि पीएफआई और इसके काडर बार-बार हिंसक और विध्वंसक कार्यों में संलिप्त रहे है। जिनमें एक कॉलेज प्रोफेसर का हाथ काटना, अन्य धर्मों का पालन करने वाले संगठनों से जुड़े लोगों की निर्मम हत्या करना, प्रमुख लोगों और स्थानों को निशाना बनाने के लिए विस्फोटक प्राप्त करना, सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाना आदि शामिल हैं,
3-पीएफआई काडर कई आतंकवादी गतिविधियों और कई व्यक्तियों यथा संजीत (केरल, नवम्बर, 2021), वी. रामलिंगम (तमिलनाडु, 2019), नंदू (केरल, 2021), अभिमन्यु (केरल, 2018), बिबिन (केरल 2017), शरत (कर्नाटक 2017), आर. रुद्रेश (कर्नाटक 2016), प्रवीण पुजारी (कर्नाटक 2016) शशि कुमार (तमिलनाडु, 2016) और प्रवीण नेत्तारू ( कर्नाटक, 2022) की हत्या में शामिल रहे हैं और ऐसे अपराधिक कृत्य और जघन्य हत्याएं, सार्वजानिक शांति को भंग करने और लोगों के मन में आतंक का भय पैदा करने के एकमात्र उद्देश्य से की गई है,
4-पीएफआई के वैश्विक आतंकवादी समूहों के साथ अंतर्राष्ट्रीय सम्पर्क के कई उदाहरण हैं और पीएफआई के कुछ सदस्य आईएसआईएस में शामिल हुए हैं और सीरिया, ईराक और अफगानिस्तान में आतंकी कार्यकलापों में भाग लिए हैं। इनमें से पीएफआई के कुछ काडर इन संघर्ष क्षेत्रों में मारे गए और कुछ को राज्य पुलिस तथा केंद्रीय एजेंसियों ने गिरफ्तार किया। इसके अलावा, पीएफआई का सम्पर्क प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जमात-उलमुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) से भी रहा है,
5- पीएफआई के पदाधिकारी और काडर तथा इससे जुड़े अन्य लोग बैंकिंग चैनल, हवाला, दान आदि के माध्यम से सुनियोजित आपराधिक षडयंत्र के तहत भारत के भीतर और बाहर से धन इकट्ठा कर रहे हैं और फिर उस धन को वैध दिखाने के लिए कई खातों के माध्यम से उसका अंतरण, लेयरिंग और एकीकरण करते हैं तथा, अंतत: ऐसे धन का प्रयोग भारत में विभिन्न आपराधिक, विधिविरुद्ध और आतंकी कार्यों के लिए करते हैं,
6-. पीएफआई की ओर से उनसे सम्बंधित कई बैंक खातों में जमा धन के स्रोत खाताधारकों के वित्तीय प्रोफाइल से मेल नहीं खाते और पीएफआई के कार्य भी उसके घोषित उद्देश्यों के अनुसार नहीं पाए गए, इसलिए आयकर विभाग ने, आयकर अधिनियम, 1961 ( 1961 का 3) की धारा 12-A या 12-AA के तहत मार्च, 2021 में सका पंजीकरण रद्द कर दिया। इन्हीं कारणों से , आयकर विभाग ने, आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 12-A या 12-AA के तहत, रिहैब इंडिया फाउन्डेशन के पंजीकरण को भी रद्द कर दिया।
7- उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात राज्य सरकारों ने पीएफआई को प्रतिबंधित करने की अनुशंसा की है।
और जबकि, पीएफआई और इसके सहयोगी संगठन या सम्बद्ध संस्थाएं या अग्रणी संगठन देश में आतंक फैलाने और इसके द्वारा राष्ट्र की सुरक्षा और लोक व्यवस्था को खतरे में डालने के इरादे से हिंसक आतंकी गतिविधियों में शामिल रहे हैं तथा पीएफआई की राष्ट्र- विरोधी गतिविधियां राज्य के संवैधानिक ढांचे और सम्प्रभुता का अनादर और अवहेलना करते हैं, और इसलिए इनके विरुद्ध तत्काल और त्वरित कार्रवाई अपेक्षित है,
और जबकि, केंद्रीय सरकार का यह मत है कि यदि पीएफआई और इसके सहयोगी संगठन या सम्बद्ध संस्थाओं या अग्रणी संगठनों के विधिविरुद्ध क्रियाकलापों पर तत्काल रोक अथवा नियंत्रण न लगाया गया, तो पीएफआई और इसके सहयोगी संगठन या सम्बद्ध संस्थाएं या अग्रणी संगठन इस अवसर को निम्नलिखित हेतु प्रयोग करेंगे -
1- अपनी विध्वंसात्मक गतिविधियों को जारी रखेंगे, जिससे लोक व्यवस्था भंग होगी और राष्ट्र का संवैधानिक ढांचा कमजोर होगा;
2- आतंक आधारित पश्चगामी तंत्र (रिग्रेसिव रिजीम)को प्रोत्साहित एवं लागू करेंगे;
3-एक वर्ग विशेष के लोगों में देश के प्रति असंतोष पैदा करने के उद्देश्य से उनमें राष्ट्र-विरोधी भावनाओं को भड़काना और उनको कट्टरवाद के प्रति उकसाना जारी रखेंगे;
4-देश की अखण्डता, सुरक्षा और सम्प्रभुता के लिए खतरा उत्पन्न करने वाली गतिविधियों को और तेज करेंगे;
और जबकि, केंद्रीय सरकार का उपर्युक्त कारणों की वजह से यह दृढ़ मत है कि पीएफआई और इसके सहयोगी संगठनों या सम्बद्ध संस्थाओं या अग्रणी संगठनों की गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए, पीएफआई और इसके सहयोगी संगठनों या सम्बद्ध संस्थाओं या अग्रणी संगठनों को तत्काल प्रभाव से विधिविरुद्ध संगम घोषित करना आवश्यक है,
इसलिए अब. केंद्रीय सरकार विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1967 (1967 का 37) की धारा 3 की उप-धारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग करते हुए, एतद्वारा पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और इसके सहयोगी संगठनों या सम्बद्ध संस्थाओं या अग्रणी संगठनों, रिहैब इंडिया फाउंडेशन (आरआईएफ), कैंपस फ्रंट ऑफ़ इंडिया (सीएफआई), आल इंडिया इमाम काउंसिल (एआईआईसी), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स आर्गेनाईजेशन (एनसीएचआरओ), नेशनल विमेंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन, केरल सहित को “विधिविरुद्ध संगम" घोषित करती है,
और जबकि,, उपर्युक्त परिस्थितियों के सन्दर्भ में केंद्रीय सरकार का यह दृढ़ मत है कि पीएफआई और इसके सहयोगी संगठनों या सम्बद्ध संस्थाओं या अग्रणी संगठनों को तत्काल प्रभाव से विधिविरुद्ध संगम घोषित करना आवश्यक है और उक्त अधिनियम की धारा 3 की उप-धारा (3) के परंतुक द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्रीय सरकार एतद्वारा यह निदेश देती है कि यह अधिसूचना, इसके राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से पाँच वर्ष की अवधि के लिए लागू होगी, जो उक्त अधिनियम की धारा 4 के तहत जारी किए जाने वाले किसी भी आदेश के अध्यधीन होगी।