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शाह के बयान पर कपिल सिब्बल ने PM मोदी और गृह मंत्री को दी खुली चुनौती, बोले-समय और जगह आप तय करें और हम..

  • by: news desk
  • 21 January, 2020
शाह के बयान पर कपिल सिब्बल ने PM मोदी और गृह मंत्री को दी खुली चुनौती, बोले-समय और जगह आप तय करें और हम..

नई दिल्ली: अमित शाह के बयान पर कपिल सिब्बल ने गृह मंत्री और प्रधानमंत्री को दी खुली चुनौती | अमित शाह के बयान (राहुल गांधी, मायावती या कोई भी विपक्षी नेता मेरे साथ CAA पर डिबेट करे) पर कपिल सिब्बल ने कहा कि, मैं गृह मंत्री और प्रधानमंत्री को खुली चुनौती देता हूं, आप दोनों एक तरफ और मैं दूसरी तरफ, मेरे साथ डिबेट करें, आप समय और जगह तय करें और हम प्रोसीजर तय करेंगे।




प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि,मैं मोदी जी से कहना चाहता हूं और अमित शाह से कहना चाहता हूं कि पहली बार हमारे इतिहास में नागरिकता धर्म के आधार पर दी जा रही है, इसलिए हम इस कानून का विरोध कर रहे हैं। उन्होने कहा,9 दिसंबर 2019 को अमित शाह ने लोकसभा में कहा था कि CAA के पास होने के बाद देश भर में NRC कराया जाएगा। इसलिए ये कहना झूठ है कि CAA और NRC में कोई संबंध नहीं है।





सिब्बल ने कहा कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने CAA के बारे में नौ झूठ फैलाए हैं। उन्होने कहा, इनका पहला झूठ है कि CAA भेदभावपूर्ण नहीं है। संविधान में भारत की नागरिकता के 5 प्रावधान हैं, जिनमें कहीं भी धर्म का कोई ज़िक्र नहीं है। 1955 के नागरिकता एक्ट में भी यही प्रावधान हैं|





 कपिल सिब्बल ने कहा कि, दूसरा झूठ- CAA का NRC से कोई ताल्लुक नहीं। अप्रैल 2019 में अमित शाह ने कहा कि पहले CAB आएगा, उसके बाद NRC आएगा। 9 दिसंबर 2019 को लोकसभा में अमित शाह ने CAB के पास होने के बाद राष्ट्रव्यापी NRC की बात की। ऐसे में CAA-NRC के ताल्लुक को नकारा नहीं जा सकता|




तीसरा झूठ- मोदी ने 22 दिसंबर 2019 को एक रैली में कहा कि उनकी सरकार आने के बाद NRC पर कोई चर्चा नहीं हुई। जबकि, 20 जून 2019 को संसद के संयुक्त अधिवेशन में राष्ट्रपति के संबोधन में NRC को प्राथमिक तौर पर लागू होने की बात कही गई|




चौथा झूठ- NRC की प्रक्रिया को न तो अधिसूचित किया गया और न ये कानूनी है। यह पूरी तरह झूठ है। क्योंकि, 2003 में जब NRC एडॉप्ट किया गया, तो उसके अनुच्छेद 14 (a) में इसके कानूनी होने का उल्लेख है और उसमें देश के प्रत्येक नागरिक को पहचान पत्र की बात है|




पांचवां झूठ- NRC अभी शुरू होना है। जबकि पहली अप्रैल से NRC शुरू होने का नोटिफिकेशन जारी हो चुका है| छठा झूठ- NPR का NRC से कोई संबंध नहीं है। गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2018-19 में कहा गया कि, "NPR NRC को लागू करने का पहला कदम है" 




सातवां झूठ- किसी भारतीय को डरने की जरूरत नहीं है। जबकि हमारे पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन साहब के परिवारजनों; कारगिल युद्ध के पुरस्कार विजेता सनाउल्लाह खान का नाम असम की NRC में नहीं था। अब ऐसे में किसी गरीब आदमी का नाम गायब हो गया, तो वो क्या करेगा..?




आठवां झूठ- मोदी ने कहा कि देश में कोई डिटेंशन सेंटर नहीं है। जबकि, अकेले असम में 6 डिटेंशन सेंटर में 988 लोग कैद हैं। जनवरी 2019 भारत सरकार ने डिटेंशन सेंटर बनाने के निर्देश दिए|




नौवां झूठ- प्रदर्शनों के खिलाफ कोई बल प्रयोग नहीं किया गया। 28 लोग अकेले यूपी में मारे गए। लोगों के घर जलाए गए, दुकानें जलाई गई, लोगों को घरों में घुसकर मारा गया और भाजपा सरकार झूठ बोल रही है|




उन्होने कहा, 1893 में स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि, "मुझे गर्व है कि मैं उस देश का वासी हूँ, जो दुनिया के सभी देशों और धर्मों के प्रताडितों और पीड़ितों को शरण देता है।" अब जिनके पास विवेक ही नहीं है, वो स्वामी जी की क्या ही बात करेंगे|





कपिल सिब्बल ने कहा कि,आज गीता गोपीनाथ ने कहा है कि IMF के अनुसार हमारी विकास दर 4.8% रहेगी। साथ ही, उन्होंने ये भी कहा है कि इससे विश्व अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। ठीक इसी तरह हमारे प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के क्रिया-कलाप हमारे लोकतंत्र के लिए विनाशकारी है|




सिब्बल ने कहा कि कांग्रेस को मणिपुर में 28 सीटें मिलीं, बीजेपी को 21 सीटें मिलीं। बीजेपी ने एनपीपी के साथ गठबंधन किया और कांग्रेस से एक विधायक लिया, अगले दिन, वह मंत्री बन गया। उसके खिलाफ अयोग्यता का आवेदन दायर किया गया था लेकिन स्पीकर ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद रिट याचिका दायर की गई थी|




उन्होंने कहा कि SC का फ़ैसला कहता है कि "संसद को अब स्वतंत्र न्यायाधिकरण के लिए कानून तैयार करना चाहिए, स्पीकर से सत्ता छीन लेनी चाहिए (अयोग्यता याचिकाओं का फैसला करने पर) | SC फैसले में यह भी कहा गया है- कोई भी स्पीकर देरी नहीं कर सकता है, कोई मामला तय करने में और देरी तीन महीने से ज्यादा नहीं हो सकती है और उन्होंने मणिपुर स्पीकर को तीन महीने में इसे तय करने का निर्देश दिया है|







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