नई दिल्ली: कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के पार्टी से इस्तीफा देने से कांग्रेस खुश नहीं है। हालांकि, इस्तीफे से ज्यादा, सबसे पुरानी पार्टी आजाद के चिलचिलाती पत्र से सबसे ज्यादा बौखला गई है, जिसमें राहुल गांधी को 2014 के आम चुनाव में भारी नुकसान और पार्टी के सामान्य राजनीतिक स्वास्थ्य के लिए दोषी ठहराया गया है।
कांग्रेस ने गुलाम नबी आजाद द्वारा पार्टी नेतृत्व की आलोचना करने पर शुक्रवार को पलटवार किया। कांग्रेस पार्टी ने उनके इस्तीफे को उनके राज्यसभा कार्यकाल के अंत से जोड़ा और आरोप लगाया कि उनके विश्वासघात से उनके असली चरित्र का पता चलता है और गुलाम नबी आजाद का डीएनए 'मोडी-फाइड' है।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि जिस व्यक्ति को कांग्रेस नेतृत्व ने सबसे ज़्यादा सम्मान दिया, उसी व्यक्ति ने कांग्रेस नेतृत्व पर व्यक्तिगत आक्रमण करके अपने असली चरित्र को दर्शाया है। पहले संसद में मोदी के आंसू, फिर पद्म विभूषण, फिर मकान का एक्सटेंशन… यह संयोग नहीं सहयोग है !
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट किया, एक व्यक्ति जिसके साथ कांग्रेस नेतृत्व द्वारा सबसे अधिक सम्मान के साथ व्यवहार किया गया है, उसने अपने शातिर व्यक्तिगत हमलों से धोखा दिया है जो उसके असली चरित्र को उजागर करता है। जीएनए (गुलाम नबी आजाद) का डीएनए 'मोडी-फाइड' है।
दुख की बात है कि..: आजाद के इस्तीफा पर अजय माकन
कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के इस्तीफा देने पर कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा कि,' हमने (गुलाम नबी) आजाद साहब का (इस्तीफे का) पत्र देखा। दुख की बात है कि उन्होंने ऐसे समय में कांग्रेस छोड़ने का फैसला किया जब कांग्रेस देश भर में बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी, ध्रुवीकरण की लड़ाई लड़ने जा रही है। दुख की बात है कि वे इस लड़ाई में हिस्सा नहीं बन रहे|
कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि,;गुलाम नबी आजाद जी को कांग्रेस ने संगठन व सरकार में अनेकों बार कई पदों से नवाजा। 2 बार लोकसभा सांसद बनाया, जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री बनाया। चुनाव की हार जीत से बचाकर 5 बार RS सांसद बनाया उसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी मुझे इस बात का बड़ा दुख है|
दिग्विजय सिंह ने कहा कि,"आपने (;गुलाम नबी आजाद) लिखा कि भारत जोड़ो अभियान न चलाकर कांग्रेस जोड़ो अभियान चलाना चाहिए वो भी उस वक़्त जब आप स्वयं कांग्रेस पार्टी तोड़कर निकल गए। राहुल गांधी जी पर लगाये आपके आरोप निराधार हैं। आपने जो इस्तीफा दिया और जो पत्र लिखा है उसकी मैं घोर निंदा करता हूँ।
भाजपा की बी टीम बनने के लिए गुलाम नबी आजाद ने पार्टी से नाता तोड़ने का ऐलान किया
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि,"गुलाम नबी आजाद पार्टी को धोखा देने का मन बहुत पहले से बना चुके थे। जब उन्होंने कुछ साथियों के साथ पहला पत्र लिखा था, उस समय ही उनकी मंशा बिल्कुल साफ थी। फिर भी हम लोगों को उम्मीद थी कि सब ठीक हो जाएगा। इतने सालों का पार्टी से रिश्ता है, वो उसका मूल्य समझेंगे।
हरीश रावत ने कहा कि,"मगर अनंतोगत्वा भाजपा की बी टीम बनने के लिए गुलाम नबी आजाद ने कई-कई बहानों के साथ पार्टी से नाता तोड़ने का ऐलान किया है। मैं बहाना शब्द इसलिए कह रहा हूं क्योंकि गुलाम नबी साहब लंबे समय तक पार्टी के कर्ताधर्ता रहे हैं। उस समय भी ऐसे ही कुछ मिले-जुले सवाल उठते थे। पार्टी में ऊंच-नीच होता था।
मगर जिस प्रकार गुलाम नबी आजाद ने ऐसे समय में पार्टी को धोखा दिया है, वह पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं का अपमान है। पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं ने पिछले दो-तीन महीनों के अंदर पूरी शक्ति लगाकर पार्टी को संघर्ष के लिए तैयार कर दिया है, महंगाई के खिलाफ कांग्रेस की हुंकार रैली और भारत जोड़ो यात्रा ऐतिहासिक होगी।
हरीश रावत ने कहा कि," गुलाम नबी आजाद के त्यागपत्र का कार्यकर्ताओं व कांग्रेस के मनोबल पर कोई असर नहीं पड़ेगा। गुलाम नबी आजाद को यह नहीं भूलना चाहिए कि यह कांग्रेस पार्टी व गांधी-नेहरू परिवार ही था जिसने उन्हें देश के नेतृत्व की शीर्ष पंक्ति तक पहुंचाया। गुलाम नबी आजाद को अनंतोगत्वा अपने निर्णय पर पछताना पड़ेगा, वो भाजपा की बी टीम बनकर रह जाएंगे।