नई दिल्ली: कांग्रेस ने देश में अरबपतियों की संपत्ति बढ़ने संबंधी एक रिपोर्ट को लेकर सोमवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि सरकार ने महामारी के समय अपने ‘मित्र’ पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाया और आम लोगों को कोई राहत नहीं दी। विपक्षी पार्टी ने सरकार से यह आग्रह किया कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम की जाएं और आवश्यक वस्तुओं पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर घटाई जाए।कांग्रेस प्रवक्ता प्रो. गौरव वल्लभ ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि साथियों, मोदीनॉमिक्स का अर्थ लेकर आज हम हमारी विशेष प्रेस वार्ता में आपके समक्ष उपस्थित हुए हैं। अगर हम समझें कि मोदीनॉमिक्स क्या है, तो मोदीनॉमिक्स के 5 भाग हैं – बेरोजगारी की दर 7 प्रतिशत, जो कॉन्स्टेंट चल रही है। महंगाई की दर 13.56 प्रतिशत, होलसेल इन्फ्ले शन की दर। यूएसडी टू आईएनआर जिसको हम कहते हैं डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत 74 के पार। 84 प्रतिशत परिवारों की आय 2021 में गिरती है और पांचवा जो कि मोदीनॉमिक्स का सबसे प्रमुख स्तंभ है, इन चारों के लिए हमारा उत्तरदायित्व नहीं है, हम उत्तरदायी नहीं हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा कि,''अगर मैं हिंदी में कहूं तो मोदी जी की आर्थिक नीति को तीन लाइनों में लिख सकता हूं। पहला – अमीरों का विकास। दूसरा - गरीबों का नहीं दिया साथ और तीसरा - अब मोदी सरकार के जुमलों पर देश को नहीं है विश्वास। So these are three sentences, अमीरों का विकास, गरीबों का नहीं दो साथ और अब देश की जनता को मोदी जी के जुमलों पर नहीं रहा है विश्वास।
प्रो. ने कहा कि,''जो कल ऑक्सफैम की रिपोर्ट आई, जिससे कि देश में इंकम इनइक्वेलिटी का एक आंकड़ा देश के समक्ष आया। बहुत चौंकाने वाला आंकड़ा है। क्या कहता है वो आंकड़ा कि देश में बिलेनियर्स, खरबपतियों की संख्या 102 से बढ़कर 142 हो गई है। लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि है खरबपतियों की संख्या में, पर 2021 में 84 प्रतिशत भारतीयों की आय घटी है। ये मोदीनॉमिक्स है। मतलब एक तरफ तो खरबपति की संख्या 40 प्रतिशत से बढ़ रही है और दूसरी और अगर हम कहें तो हम ये पाएंगे कि जो 84 प्रतिशत जो हाउस होल्ड हैं, उनकी आय में 2021 में कमी आ गई है। ये मोदीनॉमिक्स का सफरनामा है। Richest 98 इंडियन जो देश के सबसे अमीर 98, जो खरबपति हैं, उनकी आय देश के 55.20 करोड़ लोगों के बराबर है। मतलब अगर हम 98 लोगों की आय जो सबसे अमीर हैं, उनकी आय, उनकी वेल्थ जो देश में 55.2 करोड़ अर्थात् 40 प्रतिशत जनसंख्या की जो वेल्थ है, वो जो टॉप 98 लोगों की वेल्थ के बराबर है। मोदी जी खामोश हैं। मोदी जी के वित्त मंत्री जी को इसके बारे में पता भी नहीं होगा, शायद उन्होंने पढ़ा भी नहीं होगा इसके बारे में।
उन्होंने कहा,''इस ऑक्सफैम की रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि जो देश फर्स्ट और सेकंड वेव का सामना कर रहा था कोरोना में, जब देश में फर्स्ट और सेकंड वेव अपने चरम पर थी, उस दौरान खरबपतियों की आय और खरबपतियों की संख्या बढ़ रही थी।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,''मैं आपको आंकड़ा देना चाहता हूं कि जो खरबपतियों की कुल संपत्ति मार्च, 2020 में थी, 23.14 लाख करोड़, मतलब लगभग 23 लाख करोड़। वो बढ़कर 2021 में हो जाती है, 53.16 लाख करोड़। अर्थात् जो मार्च, 2020 से लेकर नवंबर, 2021 के बीच खरबपतियों की वेल्थ में इजाफा होता है 30 लाख करोड़ का और ध्यान रहे साथियों, देश का जो एनुअल बजट आया था 2021-22 का, वो था 34.8 लाख करोड़ का अर्थात् जो एनुअल बजट था देश का, उसकी लगभग 86 प्रतिशत of annual budget size में एक साल में खरबपतियों की वेल्थ में वृद्धि हो जाती है और हम यहाँ पर बोल रहे हैं कि हमारी 'वी' शेप रिक्वरी हो गई। ये 'वी' शेप रिक्वरी नहीं है, इसको कहते हैं 'के' शेप रिक्वरी, जिसमें 86 प्रतिशत हिंदुस्तानियों की आय घट रही है, मात्र कुछ खरबपतियों की आय बढ़ रही है और वो कौन हैं, उनका ब्यौरा भी मैं लेकर आया हूं और ये ऑक्सफैम रिपोर्ट आगे कहती है कि ऐसा क्यों हुआ, ऐसा क्या हुआ कि देश में 84 प्रतिशत लोगों की आय तो घटी और मात्र कुछ खरबपतियों की आय बढ़ी।
उन्होंने कहा,''ऐसा क्यों हुआ - इसका कारण वो देते हैं कि सबसे पहले मोदी सरकार ने लगातार आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी की दरें बढ़ाई। भले ही वो खेती पर टैक्स वसूलने का काम मोदी सरकार ने किया था। भले ही वो जो फार्म इक्विपमेंट हों, भले ही वो फर्टिलाइजर्स हों, भले ही पेस्टीसाइड हों, भले ही एसेंशल आइटम हों, जैसे गारमेंट हैं, जूते हैं, मतलब जिस पर लगातार जीएसटी की दरें बढ़ाई जा रही हैं और ध्यान रहे, जब जीएसटी की दर बढ़ती है, तो वो खरबपति के लिए भी उतनी बढ़ती है, जितनी एक किसान के लिए जिसकी आय मोदी सरकार के आंकडे के अनुसार 27 रुपए प्रतिदिन है। तो वो जो पहला कारण बताया है इंकम इनइक्वेलिटी का, वो बताया गया है इनक्रिज इन जीएसटी ऑफ एंसेशल आइटम। दूसरा कारण जो बताया, ये मैं नहीं कह रहा हूं, ये कांग्रेस पार्टी नहीं कह रही है। ये ऑक्सफैम की रिपोर्ट कह रही है।
कांग्रेस ने कहा कि,''दूसरा कारण बताया गया है कि फ्यूल पर जिस तरह से टैक्स की दर लगातार बढ़ाई गई और ऑक्सफैम की रिपोर्ट में लिखा गया है कि 2020-21 के पहले 6 महीनों में जो पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 33 प्रतिशत से बढ़ाई गई, ये हम नहीं कह रहे हैं, हम तो कहते ही थे, आज ऑक्सफैम की रिपोर्ट भी कह रही है और जब पेट्रोल भरवाने जाते हैं, तो वो अडानी जी के लिए भी पेट्रोल का उतना ही भाव है, डीजल का उतना ही भाव है, जितना हिंदुस्तान के मेहनतकश अन्नदाता के लिए। उन भाव में बिल्कुल अंतर नहीं है। पेट्रोल के भाव में कोई अंतर नहीं रहता, भले ही वो खरबपति हों या एक ऐसा युवक जो नौकरी की तलाश कर रहा हो। तो ये ऑक्सफैम ने दूसरा कारण बताया इंकम इनइक्वेलिटी का कि constant increase in tax imposed on fuel.
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,'तीसरा कि मोदी सरकार वो इकलौती सरकार है, जिन्होंने पैंडेमिक के दौरान, जिन्होंने आपदा के दौरान कॉर्पोरेट टैक्स को 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दिया। इस आपदा के दौरान मध्यम आय वर्गीय व्यक्ति के टैक्स में कोई कमी नहीं हुई। इस आपदा के दौरान निम्न आय वर्गीय व्यक्ति के टैक्स में कोई कमी नहीं हुई। इस आपदा ???े दौरान कॉर्पोरेट टैक्स को 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दिया। जिसका नतीजा क्या हुआ, जिसका नतीजा ये हुआ कि देश का फिजिकल डेफिसिट (fiscal deficit) बढ़ा। जिसका नतीजा ये हुआ कि सरकार ने आय के अन्य साधन जुटाने के लिए जीएसटी की रेट बढ़ाई। पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को बढ़ाया और अंतिम, चौथा कारण जो ऑक्सफैम रिपोर्ट कहती है कि मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद सुपर रिच पर वेल्थ टैक्स लगता था, उसको अबोलिशन कर दिया।
उन्होंने कहा,''इन चार कारणों से क्या नतीजा निकला, नतीजा ये निकला कि पिछले साल 2021 में 4 करोड़ 60 लाख इंडियन एक्सट्रीम पॉवर्टी में चले गए। हमने 2003 से लेकर 2014 तक मनरेगा से लोगों को गरीबी से बाहर निकाला, करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के आधार पर लगभग 14 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला और यहाँ पर एक साल में मोदी सरकार ने अपनी गलत नीतियों के कारण, अपनी ऐसी नीति जो अमीर लोगों को ज्यादा फेवर करती है, मध्यम आय वर्गीय लोगों को और निम्न आय वर्गीय लोगों को कोई फायदा नहीं देती, ऐसी नीतियों के कारण 4 करोड़ 60 लाख हिंदुस्तानियों को गरीबी में झोंक दिया।
प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा कि,'अब आगे की कहानी सुनिए, मिनिमम वेजिस तो देश में 178 रुपए है 2020 से। 2020 से मिनिमम वेजिस में कोई अंतर नहीं आया, 178 रुपए प्रतिदिन सरकार ने निश्चित कर दी। पर अडानी की आय, अडानी की वेल्थ, गौतम अडानी की वेल्थ 2020 से लेकर 21 के मध्य 8 गुना बढ़ गई। मिनिमम वेजिस में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, मध्यम आय वर्गीय व्यक्ति का तो डीए सरकार ने लिया, रोक लिया कि आपदा के दौरान आपको डीए देंगे सरकार के केन्द्रीय सरकारी कर्मचारियों को, उस डीए पर भी रोक लगा ली। पर उसी दौरान गौतम अडानी की जो वेल्थ थी जो 2020 में लगभग 65,860 करोड़ थी, वो 8 गुना से ज्यादा बढ़कर 3 लाख 73 हजार करोड़ हो गई और जो नवंबर 2021 का आंकडा है, उसके अनुसार गौतम अडानी की जो वेल्थ है, वो 6 लाख 8 हजार करोड़ हो गई है। तो आपके मित्रों की जो संपत्ति है, उसमें 8 गुना इजाफा और मिनिमम वेजिस में एक गुना भी इजाफा नहीं। क्यों मोदी जी, ऐसी आपकी क्या नाराजगी है? ऐसा लोगों ने क्या गुनाह कर दिया आपको वोट देकर कि उनकी आय में एक रुपए में वृद्धि नहीं और आपके दोस्तों की आय में 8 गुना की वृद्धि?
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,'पिक्चर अभी यहीं खत्म नहीं हुई। जो मोदी जी के दूसरे दोस्त हैं, जो अंबानी जी हैं, मुकेश अंबानी जी, उनकी आय डबल हो गई, 2020 में जितनी उनकी संपत्ति थी, 2021 में वो डबल हो गई। 2020 में उनकी 2 लाख 72 हजार करोड़ की संपत्ति थी, जो डबल से ज्यादा बढकर 6 लाख 32 हजार करोड़ रुपए हो गई।
उन्होंने कहा,''साथियों मोदी जी के दोस्तों की आय निरंतर 8 गुना से ज्यादा बढ़ रही है। एक दोस्त की आय 8 गुना बढ़ गई, एक दोस्त की आय दोगुनी हो गई, जबकि 84 प्रतिशत हिंदुस्तानियों की आय कम हुई है। ये मैं नहीं कह रहा हूं, ये ऑक्सफैम की जो रिपोर्ट आई है, वो कह रही है। वो ये कह रही है कि मोदी सरकार की प्रो रिच टैक्सेशन पॉलिसी है, जिसमें रिच लोगों को, जो धनी उनके दोस्त लोगों की करों में उनको रियायत दी जाती है, पर मध्यम आय वर्गीय व्यक्ति को नहीं दी जाती, निम्न आय वर्गीय व्यक्ति को नहीं दी जाती। आप कॉर्पोरेट टैक्स की दर 30 से 22 प्रतिशत कर देते हैं, पर मिडिल इंकम ग्रूप के लिए एक प्रतिशत, एक पैसे का भी रिलीफ नहीं देते हैं। उनकी जो टेक होम सैलरी है, उसको भी आप डीए में रोक करके, उसमें कमी कर देते हैं।
प्रो. वल्लभ ने कहा कि,''अभी इसी रिपोर्ट का हवाला देकर आगे की बात कह रहा हूं। ये रिपोर्ट आगे कहती है कि इसी दौरान जो हमारा हेल्थ पर खर्चा था, वो जो 2020-21 का रिवाइज्ड एस्टिमेट था, उससे 10 प्रतिशत कम हुआ। क्यों मोदी जी, हेल्थ पर आपदा के दौरान आपने 10 प्रतिशत 2020-21 का जो रिवाइज्ड एस्टिमेट था, उससे 10 प्रतिशत कम क्यों आपने एलोकेट किया? यही रिपोर्ट कहती है कि एजुकेशन पर जो खर्चा था, उसमें 6 प्रतिशत की कमी आई। यही रिपोर्ट कहती है कि सोशल सिक्योरिटी की जितनी भी स्कीम थी, जो कि डेढ़ प्रतिशत ऑफ यूनियन बजट साइज होती थी, उसको मोदी जी ने 0.6 प्रतिशत ऑफ यूनियन बजट साइज कर दिया और यही रिपोर्ट आगे जाकर कहती है जो कि बहुत महत्वपूर्ण तथ्य मैं रखने जा रहा हूं -
उन्होंने कहा,''ये रिपोर्ट ये कहती है कि जब आपदा आई, जब पैंडेमिक आई तो भारत की केन्द्र सरकार ने, भारत की मोदी सरकार ने अपने हाथ झटक लिए और स्टेट गवर्मेटस के ऊपर पूरा दारोमदार डाल दिया। ना उसके पास संसाधन थे, ना उनके पास ह्यूमन रिसोर्स थे कि वो आपदा को टेकल कर पाएं। नतीजा क्या हुआ कि 84 प्रतिशत हिंदुस्तानियों की आय कम हुई। नतीजा क्या हुआ कि 4 करोड़ से ज्यादा, 4 करोड़ 60 लाख लोग गरीबी में, एक्सट्रीम पॉवर्टी में चले गए। नतीजा क्या हुआ, लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई, ऐसा क्यों हुआ?
इस बाबत हमारे 4 प्रश्न हैं मोदी सरकार से
प्रो. वल्लभ ने कहा कि,''''नंबर एक - मोदी जी दोस्तों की आय 8 गुना बढ़ जाए और मध्यम आय वर्गीय की आय में कमी हो जाए। 84 प्रतिशत हिंदुस्तानियों की आय कम हो जाए, ऐसा फॉर्मुला जो दोस्तों की आय 8 गुना बढ़ा देता है, वो हिंदुस्तान के और लोगों की आय क्यों नहीं बढ़ा पाता मोदी जी? आप एक बार मन की बात कीजिए टीवी पर आकर और देश को बताइए कि वो कौन सा फॉर्मुला है, जिससे 8 गुना आय आपदा में बढ़ी, दो लोगों के लिए आपदा में अवसर बन गया और देश के 84 प्रतिशत लोगों की आय आपदा में कम हो गई, आपने उन लोगों का हाथ आपदा में क्यों नहीं पकड़ा? उनके खातों में सीधे मनी ट्रांसफर क्यों नहीं की? ये हमारा पहला सवाल है।
प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा कि,''हमारा दूसरा सवाल ये है कि मोदी जी आपदा में कॉर्पोरेट टैक्स 30 से 22 प्रतिशत कर दिया, पर आपदा में मिडिल इंकम जो ग्रूप है, लोअर इंकम ग्रूप है, उसको एक पैसे का भी टैक्स में फायदा नहीं, ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों देश के लोगों के साथ मोदी जी? ऐसा व्यवहार क्यों, जिसके कारण 40 प्रतिशत हिंदुस्तान के जो बॉटम ऑफ 40 प्रतिशत लोग हैं, जो 55 करोड़ हिंदुस्तानियों की जो संपत्ति है, वो मात्र 98 लोगों की संपत्ति के बराबर हो गई, ऐसा क्यों मोदी जी?
तीसरा सवाल कि तुरंत पेट्रोल और डीजल के दाम लगभग 25 से 30 रुपए प्रति लीटर कम कीजिए। ये हम तो मांग कई सालों से कर रहे हैं, पर अब तो ऑक्सफैम भी कह रही है कि पेट्रोल और डीजल के दाम पर जो टैक्स लगाया जाता है, वो रिग्रेसिव होता है, वो अमीर हो या गरीब हो, सब पर एक समान कष्ट होता है, अमीर को कोई फर्क नहीं पड़ता, गरीब को बहुत कष्ट देता है। जिस व्यक्ति की आय 6 लाख करोड़ है, उसके लिए 30 रुपए प्रति लीटर का कोई इशू नहीं है, पर जिस किसान की आय मात्र 27 रुपए प्रति दिन है, उसके लिए ये टैक्स बहुत ही ज्यादा इंपैक्टफुल रहता है। तो हमारी तीसरी मांग है कि पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत प्रभाव से 25 से 30 रुपए प्रति लीटर कम करिए।।
प्रो. वल्लभ ने कहा कि,''And, last but not the least, कि जीएसटी में जो आपने 1 जनवरी से आपने वृद्धि करने का निर्णय किया है, भले ही वो जूते हों, रेडीमेड गारमेंट को आपने दो महीनों के लिए मुल्तवी किया है। जो एसेंशियल आइटम की जो जीएसटी है, उसको तुरंत प्रभाव से कम करें। भले ही रोजमर्रा में काम आने वाले जूते हों, मध्यम आय वर्गीय और निम्न आय वर्गीय लोगों के कपड़े हों। भले ही वो जैसे बाइक, बाइक को मोदी सरकार लग्जरी आइटम मानती है, तो ये लग्जरी आइटम ना मानिए। इन इसेंशियल आइटम पर जो जीएसटी लगती है, उनमें तुरंत कमी करके मध्यम आय वर्गीय और निम्न आय वर्गीय लोगों को राहत दें, अन्यथा जो इंकम इनइक्वेलिटी है, आपके दोस्तों की आय 8 गुना बढ़ेगी और हिंदुस्तान के 84 प्रतिशत लोगों की आय गिरेगी। ये ऑक्सफैम रिपोर्ट में सामने आया है।
एक प्रश्न पर कि पिछले साल की ऑक्सफैम की रिपोर्ट में भी इनइक्वेलिटी की बात कही गई थी? प्रो. वल्लभ ने कहा कि,'' हमने हमारे चार प्रश्न और मांगे रखी हैं, मैं फिर से दोहरा देता हूं, पर उसको दोहराने से पहले मैं आपको ये बताना चाहता हूं कि उस समय भी हमने इन चीजों को हाईलाइट किया था, ना केवल रिपोर्ट के बाद में, पर दूसरी प्रेस वार्ता में भी उस आंकडे को हमने हाईलाइट किया था।हमारी मांग ये है पहली कि मोदी जी देश को बताएं कि दोस्तों की जो संपत्ति 8 गुना बढ़ती है आपदा के दौरान और 84 प्रतिशत हिंदुस्तानियों की आय कम जाती है, वो फार्मुला 84 प्रतिशत लोगों के साथ भी साझा करें।
प्रो. वल्लभ ने कहा कि,''मोदी जी से हमारी दूसरी मांग ये है कि कॉर्पोरेट टैक्स को आप आपदा के दौरान 30 प्रतिशत से 22 प्रतिशत कर देते हैं, पर मिडिल क्लास से, लोअर इंकम क्लास से आपको इतनी नफरत क्यों है कि आपने आपदा के दौरान उनको टैक्स बेनिफिट देना तो छोड़ दीजिए, उनकी जो जायज सैलरी थी, उसमें आपने डीए में कटौती कर दी। आप अपने लिए महल बनवाते हैं, अपने लिए जहाज खरीदते हैं, पर सरकारी कर्मचारियों का डीए रोक लेते हैं, ये दोहरे मापदंड क्यों?
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,''तीसरी, तुरंत प्रभाव से पेट्रोल और डीजल के दाम 25 रुपए प्रति लीटर से कम कीजिए, क्योंकि पेट्रोल और डीजल पर टैक्स रिग्रेसिव होता है, ये हम तो कह ही रहे हैं पिछले कई वर्षों से, पर इस ऑक्सफैम रिपोर्ट में भी लिखा हुआ है और चौथा प्वाइंट ये है कि जीएसटी जो एसेंशियल आइटम हैं, उसको एसेंशियल आइटम को जीएसटी से एग्जैम्ट (exempt) कीजिए। क्योंकि मान लो ये पैन एक एसेंशियल आइटम है, इस पर मान लो 2 रुपए जीएसटी लगती है, तो वो 2 रुपए मेरे लिए भी है और मोदी जी के मित्रों के लिए भी वो 2 रुपए है और वो निम्न आय वर्गीय कोई तीसरे व्यक्ति के लिए भी 2 रुपए है। तो ये टैक्स सारे रिग्रेसिव इन नेचर हैं, इनको रेशनलाइजेशन की जरुरत है। ये हमारी चौथी मांग है।
एक अन्य प्रश्न पर कि क्या आप इन मुद्दों को आम जनता के बीच जाकर समझाएंगे? प्रो. वल्लभ ने कहा कि जो आपने सवाल किया, 1 जनवरी, 2022 जब पहला साल शुरु हुआ, कांग्रेस पार्टी ने जो मध्यम आय वर्गीय लोग और निम्न आय वर्गीय लोगों के खिलाफ जो जीएसटी की रेट को बढ़ाया गया, उसके संदर्भ में देश के सारे बड़े शहरों में प्रेस वार्ता की। आगे भी इकोनॉमी, महंगाई और किस तरह से इंकम इनइक्वेलिटी बढ़ रही है। सरकार का काम होता है लोगों की इंकम को इक्वल करना और यहाँ मोदी सरकार ने अपने दो दोस्तों की वेल्थ को इक्वल कर दिया है। सरकार का काम ये होता है कि रिग्रेसिव टैक्स को कम से कम रखें, यहाँ पर सरकार ने रिग्रेसिव टैक्स को कॉस्टेंटेली बढ़ाया है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,''सरकार का काम होता है कि एक इन्क्लूजिव इकोनॉमी पॉलिसी बनाना, पर यहाँ मोदी सरकार ने कॉर्पोरेट टैक्स तो 30 से 22 प्रतिशत कर दिया, पर मध्यम आय वर्गीय व्यक्ति को एक रुपए का भी फायदा नहीं दिया। सरकार का काम होता है कि ऐसी नीतियां बनाएं जिससे लोगों का माइग्रेशन बिलो पॉवर्टी लाइन से अबव पॉवर्टी लाइन हो। यहाँ मोदी सरकार की गलत नीतियों के कारण 4 करोड़ 60 लाख हिंदुस्तानी आज एक्सट्रीम पॉवर्टी में 2020 में जा चुके हैं। Who is responsible for this?
प्रो. वल्लभ ने कहा कि,''हम ये सारे मुद्दे इलेक्शन के दौरान भी, संसद के बजट सेशन के दौरान भी, सड़क पर भी हम ये सारे मुद्दे पूरी ताकत के साथ उठाएंगे और लोगों को अवगत कराएंगे कि आज जो देश में बेरोजगारी बढ़ रही है, उसका कारण मोदी सरकार की गलत नीतियां हैं। आज जो होलसेल प्राइस इन्फ्लेशन अपने 10 साल के सर्वोच्च स्तर पर है, उसका कारण मोदी सरकार की गलत नीतियां हैं। आज जो रुपया निरंतर गिरता जा रहा है, उसका कारण मोदी सरकार की गलत नीतियां हैं। आज जो 84 प्रतिशत हिंदुस्तानियों की आय घट रही है और सिर्फ कुछ लोगों की आय बढ़ रही है, उसका कारण मोदी सरकार की गलत नीतियां है। आज जो सेकंड वेव के बाद जो 'के' शेप रिक्वरी हो रही है देश में,
उन्होंने कहा,''मतलब धनी लोग और धनी होते जा रहे हैं और गरीब लोग, मध्यम आय वर्गीय लोग या तो मध्यम आय वर्गीय निम्न आय वर्गीय में ट्रांसफर हो रहे हैं और निम्न आय वर्गीय व्यक्ति बिलो पॉवर्टी लाइन में जा रहा है, इसका कारण मोदी सरकार की गलत नीतियां हैं और ये हम नहीं कह रहे हैं, मैंने आपको चार कारण बताए इंकम इनइक्वेलिटी के। ये चारों कारण प्रो. गौरव वल्लभ ने इजाद नहीं किए हैं, कांग्रेस पार्टी के व्यूज नहीं है, ये ऑक्सफैम रिपोर्ट में लिखा गया है कि पेट्रोल पर टैक्स, एसेंशियल आइटम पर जीएसटी, कॉर्पोरेट टैक्स रेट को 30 से 22 प्रतिशत करना और वेल्थ टैक्स को परमानेंट एबोलिश करना। ये चार कारण हैं भारत में बढ़ती हुई इंकम इनइक्वेलिटी के। ये चार कारण हैं कि 98 देश के जो सबसे अमीर 98 खरबपति हैं, उनकी आय देश के 55 करोड़ 20 लाख लोगों के बराबर हैं। एक तरफ 55 करोड़ 20 लाख लोगों की आय है, दूसरी तरफ 98 खरबपतियों की आय है। दोनों बराबर हो चुके हैं।
उन्होंने कहा,''ये सारी चीजें हम सड़क से लेकर संसद तक और चुनावी हो या दूसरे राज्यों हों, हर जगह पर इन मुद्दों को उठाने का हम काम करेंगे।
आय का इतना भेदभाव किसी भी प्रजातांत्रिक देश के लिए ख़तरनाक है
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि 142 भारतीय अरबपतियों के पास कुल 719 अरब अमेरिकी डॉलर (53 लाख करोड़ रुपये से अधिक) की संपत्ति है। देश के सबसे अमीर 98 लोगों की कुल संपत्ति सबसे गरीब 55.5 करोड़ लोगों की कुल संपत्ति के बराबर है। उन्होंने कहा कि आय का इतना अंतर किसी भी प्रजातांत्रिक देश के लिए खतरनाक है। ऐसे में भारत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सपनों का देश कैसे बन पाएगा।