नई दिल्ली : कांग्रेस ने आर्थिक असमानता बढ़ने का दावा करने वाले एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए आगामी आम बजट में गरीबी और अमीरी के बीच खाई को पाटने के लिए 'न्याय' जैसी योजना लाने की मांग की है| पीपुल्स रिसर्च ऑन इंडियाज इकोनॉमी की आईसीई 360 सर्वे 2021 की हालिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोमवार को मोदी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि वह अर्थव्यवस्था में बढ़ती आय असमानता के मुद्दे की अनदेखी कर रही है| कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने संवाददाताओं से कहा, ‘पहले ऑक्सफैड इंडिया की रिपोर्ट आई। अब ‘पीपल्स रिसर्च ऑन इंडियाज कंज्यूमर इकॉनमी’ की ओर से किया गया सर्वेक्षण सामने आया है, जिससे साबित होता है कि मोदी सरकार में अमीरी और गरीबी के बीच खाई बढ़ती जा रही है|
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि, इसी मंच से मेरे सहयोगी और सहकर्मी प्रो. गौरव वल्लभ ने हफ्ते पहले ऑक्सफैम की रिपोर्ट पर एक प्रेस वार्ता की थी और आज एक और रिपोर्ट आई है, आईसीई 360 सर्वे 2021 (ICE 360°) का, जिसको पिपुल रिसर्च ऑन इंडियास कंज्यूमर इकॉनमी ने किया है और ये दोनों ही रिपोर्ट एक बात बताती हैं कि इस देश में गरीब और गरीब होता जा रहा है, अमीर और अमीर होता जा रहा है और ये खाई इतनी बढ़ रही है कि ये भयावह स्थिति पैदा कर रही है। मैं इस रिपोर्ट के बारे में पहले बात करुंगी और ये किन कारणों से ऐसा हो रहा है, उसके बारे में भी हम चर्चा करेंगे।
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,'सबसे पहले तो इस रिपोर्ट के मुताबिक आज इस देश की 20 प्रतिशत सबसे गरीब आबादी, मोटा-मोटा 15 करोड़ परिवारों की आय पिछले साल 53 प्रतिशत कम हो गई है और ये कम नहीं हुई है, 53 प्रतिशत आय पर मोदी सरकार ने सेंध लगाई है। ये 20 प्रतिशत सबसे गरीब आबादी, 15 करोड़ परिवार मोटा-मोटा की आबादी पर मोदी सरकार ने, सूट-बूट की सरकार ने सेंध लगाई है। ये 7 साल पहले भी सूट-बूट की सरकार थी और आज भी सूट-बूट की सरकार है और हम सबसे गरीब परिवारों की बात नहीं कर रहे हैं, इसमें जो लोअर-मिडिल कैटेगरी है, उसकी आय करीब-करीब 32 प्रतिशत कम हुई है, जो मिडिल इंकम कैटेगरी है, उसकी आय 9 प्रतिशत कम हुई है। तो मोटे तौर पर 60 प्रतिशत घरों की, 60 प्रतिशत जनता की आय पर मोदी सरकार ने डाका डालने का काम किया है और ये आय निरंतर कम होती जा रही है, इनके शासनकाल में।
सूट-बूट की सरकार अमीरों से प्यार करती है और गरीबों पर अत्याचार करती
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''''इसी दौरान महत्वपूर्ण है ये समझना। इसी दौरान सबसे अमीरों की आय 40 प्रतिशत बढ़ी है और कुछ भी कहने से पहले मैं एक फिगर आपके सामने जरुर रखना चाहती हूं। 2005 से 2015 के बीच, वस्तुत: जो यूपीए का शासन काल था, उसमें 20 प्रतिशत जो सबसे गरीब हाउसहोल्ड थे, जो सबसे गरीब परिवार थे, उनकी आय 183 प्रतिशत बढ़ी थी। तो एक शासनकाल में 183 प्रतिशत बढ़ी है और एक शासनकाल में आय आधी हो गई है, 53 प्रतिशत होना, मतलब पांच साल में आय आधी हो गई है और ये क्यों हुआ है, क्योंकि सूट-बूट की सरकार अमीरों से प्यार करती है और गरीबों पर अत्याचार करती है। सूट-बूट की सरकार की नीतियां, उनके नियम, उनके कानून, उनकी अर्थव्यवस्था पूंजीपतियों के लिए चलती है, उनका गरीबों से, मिडिल क्लास से, लोअर मिडिल क्लास से कोई लेना-देना नहीं है।
गरीब वर्ग की आय UPA के दौरान 183% बढ़ी थी, 27 करोड़ लोग ग़रीबी से निकले थे
उन्होंने कहा,'''यहाँ पर एक बात बतानी और भी जरुरी है, जब मैंने कहा 2005 से 2015 के बीच में 183 प्रतिशत बढ़ी इंकम, उसी दौरान 27 करोड़ लोग गरीबी की सीमा रेखा से निकाले गए थे और ये सारे सरकारी आंकड़ों की मैं बात कर रही हूं। यहाँ पर ये भी कहना जरुरी होगा कि न्यू इंडिया में गरीबों को और गुरबत में धकेला जाएगा और अमीरों के हाथ में और पैसा, और संसाधन और पावर दिया जाएगा। ऑक्सफैम की रिपोर्ट में दिखाया था कि कैसे कुछ लोगों की आय 8 गुना हो गई और एक बात मैं यहाँ पर बताना चाहती हूं कि सरकार कोविड के पीछे, सरकार कोरोना के पीछे नहीं छुप सकती है, क्योंकि कोरोना और कोविड तो अमीरों के लिए भी था। लेकिन उनकी आय 40 प्रतिशत बढ़ती है और सबसे गरीब लोगों की आय अधिया जाती है, आधी हो जाती है। ये इसलिए था क्योंकि सरकार की जो नीति, नियम, कानून अर्थव्यवस्था को चलाने का तरीका है, वो अमीरों के लिए होता है।
मोदी सरकार ने 15 करोड़ सबसे गरीब परिवारों से ₹1.5 लाख प्रत्येक परिवार एंठ 5 करोड़ सबसे अमीर परिवारों को दिए
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा,''पिछले पांच सालों में जब हमने ये फर्क देखा कि कैसे उनकी आय आधी हो गई, उस दौरान सरकार ने क्या किया – पेट्रोल के दाम बढ़े, डीजल के दाम बढ़े, रसोई गैस के दाम बढ़े, लेकिन कॉर्पोरेट टैक्स कम हुआ। तो मोटे तौर पर 15 करोड़ सबसे गरीब परिवारों से, हर एक परिवार से, 15 करोड़ सबसे गरीब हर एक परिवार से मोदी सरकार ने डेढ़ लाख रुपए एंठ कर 5 करोड़ सबसे अमीर परिवारों को देने का काम किया। ये मोटा-मोटा एक फॉर्मुला बनता है। अगर 40 प्रतिशत, 20 प्रतिशत की बढ़ रही है और 53 प्रतिशत, आधी हो रही है, सबसे नीचे वाले 20 प्रतिशत की, तो उन्होंने सबसे गरीब परिवारों से डेढ़ लाख रुपए लेकर सबसे अमीर परिवारों को देने का काम किया और ये क्यों हुआ, क्या ये गलती से हो गया - बिल्कुल नहीं। क्या कोरोना काल के पीछे छुपा जा सकता है – बिल्कुल नहीं, क्योंकि कोरोना के पहले ही अर्थव्यवस्था को जिस तरह से चलाया जा रहा था, उसके चलते हमारी जीडीपी की ग्रोथ की जो दर थी, वो 8.2 से 4.1 प्रतिशत हो गई थी। 45 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी हो गई थी और ये सब दिख रहा है।
गरीब और गरीब हो रहा है, अमीर और अमीर हो रहा है
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,'''जब गरीब और गरीब हो रहा है, अमीर और अमीर हो रहा है, तो वो कहाँ हो रहा है, ये भी जानना जरुरी है, और ये आंकड़ा बहुत जरुरी है जानना, क्योंकि जो सबसे ज्यादा गरीबी बढ़ी है, जो 20 प्रतिशत सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, वो ज्यादातर शहरी इलाकों में हुआ है। अर्बन पॉवर्टी जिसे कहते हैं, वो बहुत जोरों से बढ़ी है, रुरल पॉवर्टी उसके मुकाबले में कम बढ़ी है और इसका सिर्फ एक कारण है - जिस मनरेगा को मोदी जी हमारी विफलताओं का प्रमाण कहते थे, वो संजीवनी साबित हुआ, उसने रुरल एरिया में, ग्रामीण क्षेत्रों में संजीवनी का काम किया, लोगों के हाथ में पैसा दिया और उससे लोगों की अर्थव्यवस्था थोड़ी बहुत चलती रही।
उन्होंने कहा,'ग्रामीण क्षेत्रों में वो हुआ, लेकिन शहरी क्षेत्रों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है और इसीलिए न्याय जैसी योजना की आज जरुरत है। हम लगातार कह रहे हैं, जिस दिन से पैंडेमिक शुरु हुआ है, उसी दिन से हम लगातार कह रहे हैं, न्याय जैसी व्यवस्था की जरुरत है, जहाँ पर गरीब लोग, जो प्रभावित हैं, उस अर्थव्यवस्था के पूरी तरह से नष्ट होन के कारण, उनके हाथ मैं पैसा डाला जा सके, उनका उपभोग बढ़े, उनका निवेश बढ़े। लेकिन सरकार ऐसा नहीं करती है और आज ये बात इसलिए जरुरी है, क्योंकि बजट में अब कुछ ही दिन रह गए हैं। आज से 6 से 7 ही दिन बजट में रह गए हैं और इस बजट का एक ही और सिर्फ एक केन्द्र बिंदु होना चाहिए। इस बजट का केन्द्र बिंदु होना चाहिए, इस बजट का सिर्फ और सिर्फ एक फोकस बिंदु होना चाहिए – अमीरों और गरीबों के बीच में बढ़ती हुई इस खाई को पाटना, लोगों के हाथ में पैसा देना, लोगों को, गरीबों के लिए नीतियां, नियम और कानून बनाना। इसके अलावा बाकी जो बजट होगा, वो तो जुबानी जमाखर्च की बात है।
..मोदी सरकार 'बेरोजगारों के साथ, गरीबों के साथ क्या कर रही है ?
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''मैं ये भी कहना चाहती हूं, क्योंकि सरकार को सर्वे में बड़ा भरोसा है। एक सर्वे और हम इस मंच से कहते हैं कि एक नया सर्वे इंस्टीट्यूट करिए - ग्रॉस इकॉनमिक मिसमैनेजमेंट इंडेक्स, ये एक नया इंडेक्स मोदी सरकार को बनाना चाहिए। ग्रॉस इकॉनमिक मिसमैनेजमेंट इंडेक्स, इस इंडेक्स के चलते पता तो चले कि ये सरकार बेरोजगारों के साथ, गरीबों के साथ क्या कर रही है। किस तरह से इकॉनमिक ग्रोथ को अधिया दिया गया। किस तरह से निवेश खत्म हो गया, किस तरह से उपभोग प्रभावित हुआ। किस तरह से निर्यात खत्म हुआ इस इकॉनमी में, ये अगर पता करना है, तो मोदी जी के नीति, नियम और कानून देखने है, जो अमीरों के लिए बनते हैं और गरीबों का उसमें शोषण होता है।
मैं इस मंच से एक बात ये भी कहना चाहती हूं और ये जरुरी बात है कहने के लिए कि हम पहली बार जो टेक्निकल रिसेशन में गए, हमने जिस तरह से रोजगार नष्ट होते हुए देखे। इस रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर रोजगार छोटे, मध्यम, लघु उद्योगों के द्वारा पैदा किए जाते हैं और राहुल जी लगातार कहते ये हैं कि ऐसे जो उद्योग होते हैं, वो किसी भी इकॉनमी की रीढ़ की हड्डी होते हैं। उनका नष्ट होना, उनका क्षतिग्रस्त होना, इकॉनमिक बदहाली का कारण बनता है।
गरीबों और अमीरों की खाई को पाटिए, गरीबों के हाथ में पैसा दीजिए
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा,'''तो इस मंच से हम दो चीजें कहना चाहते हैं। बजट आने वाला है। इस बजट का एक ही केन्द्र बिंदु होना चाहिए कि आप गरीबों और अमीरों की खाई को पाटिए, गरीबों के हाथ में पैसा दीजिए। जो शहरी गरीबी बढ़ती जा रही है, जो शहरी गुरबत बढ़ रही है, उसके बारे में कुछ कीजिए। सबसे पहले तो समस्या का समाधान ढूंढने के लिए, आपको समस्या का निवारण करने के लिए समस्या को एक्सेप्ट करना, उसको स्वीकार करना जरुरी है, लेकिन ये सरकार समस्या को स्वीकार ही नहीं करना चाहती है।
श्रीनेत ने कहा,''जरा सी ग्रोथ आती है, आप साढ़े सात फीट अंदर चले गए थे जमीन के, अगर आप आठ फीट ऊपर भी आ रहे हैं, तो आप आधा फीट ही ऊपर आए हैं, उस पर तालियां होने लगती हैं, एक-दूसरे की पीठ ठोकने लगते हैं। तो जरुरी है समझना कि गरीबों की सुरक्षा की जाए, अमीरों के हाथ में, जो सबसे गरीब परिवारों से डेढ़-डेढ़ लाख रुपए लेकर आपने प्रत्येक परिवार के डाले हैं, उस व्यवस्था को खत्म कीजिए। सूट-बूट की जो सरकार आप पिछले 8 सालों से चला रहे हैं और आपने बदहाली के इस आलम पर ला दिया है कि आज इस देश की 20 प्रतिशत की आबादी की आय आधी हो गई है और 60 प्रतिशत आबादी की आय पांच साल में सबसे ज्यादा कम हो गई है, उसके बारे में निवारण कीजिए।
आईसीई 360 सर्वे 2021 के संदर्भ में पूछे एक प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि इन्होंने 2021 की आय का कंपेरिजन वित्तीय वर्ष 201516 से किया है, तो पांच साल में हालात कितने बद्तर हुए हैं, वो कंपेरिजन है। पाचं साल में सबसे गरीब 20 प्रतिशत परिवारों की आय आधी हो गई है, जो यूपीए के 10 साल के दौरान 183 प्रतिशत बढ़ी थी। 53 प्रतिशत पांच साल में घटी है, यूपीए के 10 साल में 183 प्रतिशत बढ़ी थी। मोटे तौर पर आज सबसे गरीब परिवार पांच साल में आधा कमा रहे हैं और ये सिर्फ सबसे गरीब परिवारों पर आकर बात नहीं रुकती है, ये लोअर मिडिल इंकम ग्रुप और मिडिल क्लास के ऊपर भी लागू है। 60 प्रतिशत देश की आबादी आज 5 सालों के कंपेरिजन में, 2015 से 2021 के कंपेरिजन में कम कमा रही है।
एक अन्य प्रश्न पर कि क्या आप सरकार से डिमांड कर रहे हैं इस समस्या को स्वीकार करने के लिए? श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि हमारा काम है डिमांड करना और हमारा काम है जनता के मुद्दे उठाना, हमारा काम है आर्थिक जगत की बातें सामने रखना, जिससे लोगों को पता चले कि आखिर सरकार करना क्या चाहती है। ये सरकार कोई भी समस्या देख कर, सिर्फ आर्थिक जगत से नहीं, इस सरकार की अमूमन समस्या देखकर मुँह फेरने की आदत है, मुँह फेर लेते हैं या पट्टी बांध लेते हैं। हमारे गोरखपुर की तरफ एक कहावत होती है, हे राम जी जगत बना ही नहीं, देखोगे तो समस्या है ही नहीं। तो इस सरकार की जो आदत है, वो इस तरह की है कि समस्या का निवारण करने के बजाए, समस्या से मुँह मोड़ना समझते हैं। लेकिन इस समस्या से मुँह मोड़ने के नाते, और पिछले 8 साल से मुँह मोड़ते आए हैं। समस्या से मुँह मोड़ने के नाते खामियाजा जनता भुगत रही है।
उन्होंने कहा,'बेरोजगारी जनता की बढ़ रही है, महंगाई जनता के लिए बढ़ रही है, गरीब और गरीब होता जा रहा है, अमीर और अमीर होता जा रहा है, अमीर के पास और संसाधन हैं और ये जो एक खाई है अमीर और गरीबों के बीच में बढ़ती जा रही है, इसका जवाब सिर्फ चुनी हुई सरकार दे सकती है और कदम उठा सकती है, लेकिन कदम ये तब उठाएंगे, जब ये निवारण करेंगे।
विधानसभा चुनावों के मुद्दे के संदर्भ में पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि मैं एक बात कहूंगी इस मंच से और पूरी जिम्मेदारी के साथ कहूंगी, क्योंकि उत्तर प्रदेश से आती हूं। उत्तर प्रदेश का चुनाव जिन्ना बनाम गोडसे नहीं है, उत्तर प्रदेश का चुनाव बेरोजगारी, भुखमरी, महंगाई, महिला अस्मिता बन???म ये सारे मुद्दे हैं और उत्तर प्रदेश की जनता ये तय करेगी कि एक्चुअल मुद्दा क्या है। सच तो ये है कि जिस बयान का आप जिक्र कर रही हैं, मैंने ना वो बयान सुना है, ना पढ़ा है, लेकिन ये सच है कि हमारी सरहद पर आज अगर पाकिस्तान, चीन और चीन के इशारों पर नाचता अफगानिस्तान हमारा दुश्मन है, तो हमारे देश के अंदर बेरोगारी, भुखमरी, ये जो खाई अमीरों और गरीबों के बीच में बढ़ रही है, ये जो महंगाई है और जिस तरह का लोकतंत्र पर प्रहार किया जा रहा है, ये हमारे देश के अंदर भी बहुत बड़े मुद्दे हैं और बहुत बड़े हमारे देश के दुश्मन हैं। तो मुझे ऐसा लगता है कि इस तरह की बातें करके ध्यान भटकाने की बजाए ये गांधी का देश है, ये गांधी की अस्मिता से चलने वाला देश है और इस देश में जनता की बात करनी ही पड़ेगी। जनता की थाली में अगर दो रोटी कम हो रही है, तो आपको उसके बारे में बात करनी ही पड़ेगी। अगर 20 प्रतिशत आबादी की आय आधी हो रही है, तो आपको उसकी बात करनी पड़ेगी। ये भटकाने वाले मुद्दे हैं और एक्चुअली मैं कहना चाहूं तो जॉर्ज फर्नांडिस, डिफेंस मिनिस्टर ने भाजपा की एनडीए की सरकार में कुछ ऐसी ही बात बोली थी, मैं इसका समर्थन या खंडन नहीं करती हूं, लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि आज ये जरुरत है ये बोलने की कि अमीरों और गरीबों की खाई को पाटेगा कौन, उत्तर प्रदेश के बेरोजगारों को नौकरी कौन देगा, महिलाओं को सुरक्षित कौन रखेगा? क्या उत्तर प्रदेश के बेरोजगार जब प्रदर्शन करेंगे, तो उन पर लाठियां बरसाई जाएंगी या उनसे संवाद किया जाएगा? आज मुद्दा ये है उत्तर प्रदेश का।
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के द्वारा दिए बयान को लेकर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि पूरे सर्व सम्मान के साथ हमारे बड़े नेता रहे, हम लोगों का लंबा साथ रहा, लेकिन कैप्टन साहब जिस तरह की बात कर रहे हैं, मुझे लगता है शर्मनाक है। वो एक संवैधानिक पद पर रह चुके हैं। चुने हुए मुख्यमंत्री थे। इस तरह की बातें करना गलत है और अगर ऐसा था तो आपने ये क्यों किया, ये सवाल आपके सामने बनता है। सुर्खियाँ बटोरना, खबरों में बने रहना, एक डिवाइड प्ले करना, ये सब बेकार के मुद्दे हैं। आज पंजाब में मुद्दा किसानों का है। आज पंजाब में मुद्दा एमएसपी का है। आज पंजाब में मुद्दा बेरोजगारी का होगा। आज पंजाब में ये मुद्दे हैं। इस तरह के मुद्दे से सिर्फ ध्यान भटकाया जा सकता है, जो वो कर रहे हैं।
इंडिया गेट पर जलने वाली अमर जवान ज्योति के स्थान को बदलने को लेकर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि मेरा अपना मानना है कि कुछ ट्रेडिशन हैं। मुझे ऐसा लगता है, हमारा बड़ा गौरवशाली इतिहास रहा है, जो हमने अमर जवान ज्योति पर होते हुए देखा, वो शर्मनाक है। वो शर्मनाक इसलिए है क्योंकि हमारे गौरवशाली इतिहास का हिस्सा है। हम में से हर एक व्यक्ति 50 साल से जलती हुई उस लौ के आगे, मुझे लगता है सिर झुकाता है, और उसको एक्सटिंग्विश करके ये कुतर्क देना कि हम विलय कर रहे हैं या आपने जो बीटिंग रिट्रीट की बात की, इतिहास पर छाप अपने कामों से छोड़ी जाती है। इतिहास पर छाप 20 हजार की एक इमारत बनाकर नहीं छोड़ी जा सकती है। मुझे लगता है कि भविष्य का निर्माण करना जरुरी है और भविष्य का निर्माण इस देश के युवाओं के साथ, महिलाओं के साथ, इस देश की अस्मिता के साथ करना पड़ेगा। जिस तरह की बातें हो रही हैं, वो इतिहास के साथ खिलवाड़ करने के तरीके हैं और ये वही लोग करते हैं, जो इतिहास बनते वक्त मुखबिरी और माफीनामा लिखते थे।
उत्तर प्रदेश की महिला बाल विकास मंत्री के बयान को लेकर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि ये विडंबना है और मैं कुछ दिनों पहले उनके साथ एक पैनल पर थी और हमारी महिलाओं को लेकर बहस हुई। ये विडंबना है कि उत्तर प्रदेश की महिला बाल विकास मंत्री, सबसे पहले तो एक कैबिनेट मंत्री तक नहीं हैं। वो एमओएस, मिनिस्टर ऑफ स्टेट हैं, राज्य मंत्री हैं, वो एक कैबिनेट मंत्री तक नहीं हैं, ये इन्होंने औरतों को दर्जा दिया है। आपकी जो बात है, वो वहाँ पर सर्वविदित है। उनके परिवार के जो भी आपसी मामले हैं, मैं उन पर नहीं बोलना चाहूँगी, लेकिन ये सर्वविदित है कि उनके पति भी टिकट मांग रहे हैं, और वो भी टिकट मांग रही हैं और ऐसा कोई वीडियो वायरल हुआ है, या ऑडियो वायरल हुआ है, तो मुझे लगता है, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, इसका 80 प्रतिशत पैसा फंड पर खर्चा होता है और प्रधानमंत्री पढ़ाओ को पटाओ कहकर निकल जाते हैं और उसका संशोधन भी नहीं करते हैं और मुझे लगता है, ये उसी असलियत का एक नतीजा है। मैं उनके पारिवारिक मुद्दे पर नहीं बोलना चाहती हूँ, लेकिन ये कहीं पर आपको दिखाता है कि एक चुनी हुई विधायक, एक चुनी हुई मंत्री, जो मंत्रालय में रहकर अगर वो ऐसी बात कह रही हैं, तो उत्तर प्रदेश में औरतों की क्या स्थिति है, और हमारे लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ, अभियान की क्यों जरुरत है, ये अपने आप में उजागर करता है।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि मुझे लगता है और मुझे थोड़ा गुस्सा आता है, जब लोग लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ को ड्रामा कहते हैं। इसलिए गुस्सा आता है, क्योंकि ये सिर्फ एक राजनैतिक मुद्दा नहीं है। ये उत्तर प्रदेश की आधी आबादी की आवाज है। ये महिलाओं का मुद्दा है। ये उन महिलाओं का मुद्दा है, जो हाथरस, उन्नाव, लखीमपुर, शाहजहांपुर में हिंसा का सामना करती हैं, आप जान नहीं दे सकते हैं, आप दूसरे का मजाक मत उड़ाइए। मुझे ऐसा लगता है, प्रियंका गांधी जी, जनरल सेक्रेटरी, इंचार्ज उत्तर प्रदेश में हैं। उन्होंने वहाँ पर एक क्रांतिकारी कदम उठाया और मैं ये भी कह सकती हूँ, पूरी ईमानदारी के साथ कि लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ जो अभियान है, उसकी सुगबुगाहट आज अन्य दलों में भी है। उसकी चर्चा कांग्रेस के भी अन्य शासित प्रदेशों में है, लेकिन जैसा कि राहुल जी ने पहले कहा है, हम लोगों की आदत ये नहीं है कि एक जगह करें तो दूसरी जगह पर थोपा जाए, ये एक ऐसा निर्णय है, जो समय आने पर सबको करना पड़ेगा। ये 40 प्रतिशत टिकट की बातें खोखला दावा नहीं है, खोखली बातें नहीं हैं। ये आधी आबादी के सशक्तिकरण की बात है और ऐसा नहीं है कि ये हो नहीं सकता है। अगर 30 लाख निर्वाचित सदस्यों में, जो कि जिला पंचायत, ग्राम पंचायत और ब्लॉक में आते हैं, 10 लाख महिलाएं हो सकती हैं, तो आगे क्यों नहीं हो सकती? मुझे लगता है कि ये एक बड़ा कदम उठाया गया है और वक्त जब आएगा, तो बाकी लोग भी ये काम करेंगे। हम आशा करते हैं और हमारा विश्वास है कि इससे अब कोई पीछे नहीं मुड़ सकता है।
बीजेपी के एक नेता द्वारा कांग्रेस परिवार को लेकर दिए जाने वाले बयानों से संबंधित पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि मुझे ऐसा लगता है कि भाजपा इस तरह की चीजें करती है। न हमारी चाल ऐसी है, न हमारा चरित्र ऐसा है। इंडिविजुअल प्रत्याशियों को उनका आंकलन करके टिकट दिया जाता है। जिनका आप जिक्र कर रहे हैं, वो शायद सुविधाजनक और मौका परस्त राजनीति का सबसे बड़ा प्रमाण है।