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नागरिक संशोधन बिल पर बोले ओवैसी -इस तरह के कानून से देश को बचाओ अन्यथा गृह मंत्री का नाम हिटलर और डेविड बेन-गुरियन के साथ चित्रित किया जाएगा

  • by: news desk
  • 09 December, 2019
नागरिक संशोधन बिल पर बोले ओवैसी -इस तरह के कानून से देश को बचाओ अन्यथा गृह मंत्री का नाम हिटलर और डेविड बेन-गुरियन के साथ चित्रित किया जाएगा

नई दिल्ली: गृह मंत्री अमित शाह ने सियासी विवाद के बीच आज लोकसभा में नागरिक संशोधन बिल पेश कर दिया। उनके बिल पेश करते ही सदन में हंगामा मच गया। लोकसभा में एआईएमआईएम सांसद ने असदुद्दीन ओवैसी ने गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ विवादस्पद बयान दिया, जिसके बाद सदन में हंगामा मच गया।




उन्होंने कहा, मैं आपसे (स्पीकर) और गृह मंत्री से अपील करता हूं इस देश को बचा लीजिए। मुस्लिम इसी देश का हिस्सा हैं। उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन हो रहा है। ओवैसी ने कहा, मैं आपसे (स्पीकर) अपील करता हूं, इस तरह के कानून से देश को बचाओ और गृह मंत्री को भी बचाओ अन्यथा नूर्नबर्ग रेस कानूनों और इजरायल की नागरिकता अधिनियम में, गृह मंत्री का नाम हिटलर और डेविड बेन-गुरियन के साथ चित्रित किया जाएगा।




असदुद्दीन ओवैसी की इस टिप्पणी पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, कृपया ऐसी अप्राकृतिक भाषा का प्रयोग सदन में न करें, यह टिप्पणी रिकॉर्ड से बाहर कर दी जाएगी।




विधेयक पेश करने के बाद अमित शाह ने कहा कि मैं, एक बार फिर सदन में सभी को आश्वस्त करना चाहूंगा कि जो विधेयक मैं पेश कर रहा हूं, वह भारत के संविधान के किसी अनुच्छेद के खिलाफ नहीं है|कुछ सदस्यों को लगता है कि समानता का अधिकार इससे प्रभावित होगा। मैं सभी को यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि यह गलत न हो| 1971 में, श्रीमती इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश से आए सभी को नागरिकता देने का फैसला किया था। तब पाकिस्तान के लोगों को नागरिकता नहीं दी गई थी..?





शाह ने कहा- 1971 के बाद भी, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को लगातार सताया गया है। नरसंहार बंद नहीं हुआ है। कांग्रेस ने युगांडा की नागरिकता नहीं बल्कि इंग्लैंड से शरणार्थी दिए। क्यूं कर? इसके पीछे एक उचित वर्गीकरण था..?अतीत में उचित वर्गीकरण के साथ अनुच्छेद 14 के साथ बहुत सारे कानून बनाए गए हैं। तीन देश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश, भारत की जमीनी वास्तविकताओं से निकटता से जुड़े हैं। यह देश अफगानिस्तान के साथ 106 किमी की सीमा साझा करता है|





उन्होंने कहा, यदि हमें इस विधेयक को समझना है तो हमें इन 3 देशों के संविधान को विस्तार से देखना होगा। अनुच्छेद 2 अफगानिस्तान के संविधान में कहता है कि इस्लाम देश का धर्म है। पाकिस्तान और बांग्लादेश के संविधान में भी इसी तरह के प्रावधान हैं|विभाजन के दौरान, शरणार्थियों का आदान-प्रदान किया गया था। नेहरू-लियाकत पैक्ट 1950 में हुआ था जिसमें दोनों देशों ने अपने अल्पसंख्यकों की देखभाल करने का वादा किया था|विधेयक का उद्देश्य धार्मिक रूप से उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करना है जो भारत आए हैं। हम मुसलमानों से कोई अधिकार नहीं छीन रहे हैं, लोकप्रिय धारणा के विपरीत हैं|





उन्होंने कहा,अगर कांग्रेस पार्टी धर्म के आधार पर इस देश के विभाजन की अनुमति नहीं देती, तो इस विधेयक की आवश्यकता नहीं होती। यह हमारी गलती नहीं है, यह उनका है। उन्हें अब इसे सुनना होगा क्योंकि यह हमारा इतिहास है|यदि कोई भी मुस्लिम व्यक्ति इसके लिए आवेदन करता है, तो इसे खुले दिमाग से माना जाएगा। धार्मिक उत्पीड़न का आधार सवाल से बाहर है, क्योंकि तीनों देशों में मुसलमानों का बहुमत है|




शाह ने कहा- तीनों देशों में हिंदू, सिख, पारसी, जैन, ईसाई, बुद्ध इन धर्मों का पालन करने वालों के साथ धार्मिक प्रताड़ना हुई। जो बिल मैं लेकर आया हूं, वो धार्मिक रूप से प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का है। इस बिल में मुसलमानों के हक नहीं छीने गए हैं|आजादी के वक्त अगर कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का विभाजन न किया होता, तो ये बिल लाने की जरूरत ही नहीं पड़ती| तीन देशों से कोई मुस्लिम सज्जन अगर हमारे कानून के आधार पर आवेदन करता है, तो देश खुले मन से विचार करेगा। लेकिन इस बिल का फायदा उन लोगों का इसलिए नहीं मिल सकता क्योंकि उनके साथ धार्मिक प्रताड़ना नहीं हुई है|








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