नई दिल्ली: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट स्नातकोत्तर (NEET PG) काउंसलिंग 2021 में हो रही देरी के खिलाफ रेजिडेंट डॉक्टरों ने आज देश की राजधानी दिल्ली में जोरदार प्रदर्शन किया। NEET-PG काउंसलिंग में देरी को लेकर रेजिडेंट डॉक्टरों ने शहीदी पार्क के सामने भी प्रदर्शन किया। वहीँ, दिल्ली पुलिस ने बताया आज आईटीओ के पास रेजिडेंट डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान 7 पुलिसकर्मी घायल हो गए|
सोमवार शाम को रेजिडेंट डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया के घर की ओर कूच किया, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया| हालांकि इस दौरान पुलिसकर्मियों पर डॉक्टरों से मारपीट और महिला डॉक्टरों से बदसलूकी को लेकर डॉक्टरों में आक्रोश फैल गया| इससे नाराज करीब चार हजार डॉक्टरों ने सरोजिनी नगर पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठ गए और पुलिसकर्मियों की कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी की| इस दौरान डॉक्टर लगातार नारेबाजी करते रहे|
इसके बाद रात में सफदरजंग अस्पताल में भी रेजिडेंट डॉक्टरों ने NEET-PG की काउसंलिंग में हो रही देरी को लेकर धरना दिया। नीट पीजी काउंसलिंग में देरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे रेजिडेंट डॉक्टर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से आक्रोशित हैं। सोमवार शाम डॉक्टरों ने सभी स्वास्थ्य सेवाओं को बंद करने की घोषणा की जिसके बाद देर रात तक राजधानी के ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं तक प्रभावित रहीं। अभी तक यह हड़ताल राजधानी के करीब छह बड़े अस्पतालों में चल रही थी लेकिन अब सभी अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टर इसमें शामिल हुए हैं।
पुलिसकर्मियों पर मारपीट और बदसलूकी के आरोप
आरोप है कि पुलिस ने धरने पर बैठे डॉक्टरों के साथ बदसलूकी की है। साथ ही महिला डॉक्टरों के साथ मारपीट भी की है। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। जबकि फोर्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मनीष कुमार का कहना है कि कई पुलिसकर्मियों ने डॉक्टरों के साथ मारपीट की है। उन्हें थप्पड़ तक मारे हैं और कुछ के कपड़े भी फटे हैं। महिला डॉक्टरों के साथ गलत व्यवहार किया। डॉ. मनीष का कहना है कि पुलिस जवानों ने उन्हें गालियां तक दी हैं। पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ डॉक्टरों ने अब पूरी तरह से शट डाउन करने का फैसला लिया है।
दिल्ली पुलिस ने मारपीट की बात से किया इनकार
मध्य जिला पुलिस उपायुक्त ने डॉक्टरों के आरोपों से इनकार किया है। उपायुक्त का कहना है कि डॉक्टरों के साथ कोई मारपीट या बल प्रयोग नहीं किया गया। इन लोगों ने जब सड़क को जाम कर दिया था तो उनको हिरासत में लेकर आईपी इस्टेट थाने लाया गया। बाद में सभी को रिहा कर दिया गया। पुलिस ने हिरासत में लेने से पूर्व इनको समझाकर हटाने का प्रयास किया था।
सफदरजंग RDA अध्यक्ष डॉ. मानिक ने बताया, "हम चाहते हैं कि सरकार काउंसलिंग जल्दी कराए।हम सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध करते हैं कि अगर सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही तो स्वत: संज्ञान लें।"
इससे पहले इन डॉक्टरों ने सोमवार को सांकेतिक तौर पर अपने लैब कोट लौटा दिए' और सड़कों पर मार्च निकाला| डॉक्टरों का आंदोलन जारी रहने से केंद्र द्वारा संचालित तीन अस्पतालों सफदरजंग, आरएमएल और लेडी हार्डिंग अस्पतालों के साथ ही दिल्ली सरकार के कुछ अस्पतालों में मरीजों के इलाज पर असर पड़ा है| फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहा है|
नीट परीक्षा में बार-बार हो रही देरी के खिलाफ चल रहे विरोध को तेज करने के लिए डॉक्टर सोमवार को मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च कर रहे थे| हालांकि, पुलिस ने उन्हें शीर्ष अदालत के रास्ते में रोक दिया, जिसके बाद उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए अपने लैब कोट को सड़क पर रख दिया|
राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के महासचिव डॉ. सर्वेक्षण पांडे ने बताया, “हम 17 दिसंबर से दिल्ली के अस्पतालों में नियमित और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं का बहिष्कार कर रहे हैं| निर्माण भवन के बाहर हमारे विरोध का कोई नतीजा नहीं निकला, इसलिए हमने सुप्रीम कोर्ट के बाहर विरोध करने और अपने लैब कोट को सुप्रीम कोर्ट को सौंपने का फैसला किया था, लेकिन हमें बीच में ही रोक दिया गया| उन्होंने कहा, “हम अदालत से मामले में सू मोटो (स्वत: संज्ञान) लेने का अनुरोध करते हैं, क्योंकि तीसरी लहर (कोविड की) दरवाजे पर दस्तक दे रही है और हम पर नीट पीजी काउंसलिंग में देरी के कारण अधिक बोझ बना हुआ है
दरअसल नीट पीजी काउंसलिंग का यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। कोर्ट की ओर से सुनवाई के लिए आगामी छह जनवरी का दिन तय किया गया है लेकिन काउंसलिंग पहले कराने के लिए डॉक्टर बीते 11 दिन से हड़ताल पर हैं। सफदरजंग, लोकनायक, जीटीबी, जीबी पंत, आरएमएल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टर मरीजों का इलाज नहीं कर रहे हैं। यहां ओपीडी से लेकर सभी तरह की स्वास्थ्य सेवाएं पहले से प्रभावित हैं लेकिन एम्स सहित कुछ अस्पतालों में इलाज मिल रहा है जिसकी वजह से मरीजों को थोड़ी बहुत राहत थी लेकिन सोमवार शाम सभी अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टर विरोध में उतर आए हैं।
रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि मोदी सरकार ने पिछले साल कोरोना योद्घाओं पर फूल बरसाए थे। उनके लिए थालियां भी बजवाईं लेकिन अब वही सरकार कोरोना महामारी की जब तीसरी लहर आ रही है तो डॉक्टरों पर लाठी बरसा रही है। सफदरजंग अस्पताल की डॉ. सविता ने बताया कि उनके साथ दिल्ली पुलिस के पुरुष जवानों ने खींचतान की और उन्हें घसीटने का प्रयास भी किया।
सोमवार देर शाम जब पुलिस ने डॉक्टरों को हिरासत से मुक्त किया तो डॉक्टर सफदरजंग अस्पताल पहुंचे। इसके बाद राजधानी के अलग अलग अस्पतालों से एकत्रित होकर हजारों की संख्या में रेजिडेंट डॉक्टर पहुंचे हैं। अस्पताल परिसर में देर रात तक विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
देर रात सफदरजंग अस्पताल में चली बैठक के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों ने फैसला लिया है कि मंगलवार सुबह से राजधानी के सभी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं नहीं चलने देंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि सभी अस्पतालों की ओपडी में ताला लगाया जाएगा और इमरजेंसी में भी ड्यूटी नहीं देंगे। डॉ. मनीष ने कहा कि मरीजों की परेशानी को समझते हुए अब तक उग्र प्रदर्शन नहीं किया जा रहा था लेकिन सरकार की जिद और पुलिस की कार्रवाई के विरोध में अब यह फैसला लिया गया है।
सोमवार देर रात 11 बजे तक सरोजनरी नगर थाने के बाहर रेजिडेंट डॉक्टर धरना देते रहे। आईटीओ स्थित शहीद पार्क पर विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से नाराज रेजिडेंट डॉक्टर रात साढ़े आठ बजे सफदरजंग अस्पताल से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के आवास की ओर रवाना हुए लेकिन रिंग रोड पर पहुंचने के बाद ही दिल्ली पुलिस ने सभी को रोक दिया। इस दौरान काफी देर तक रास्ते पर जाम लगा रहा। यहां सरोजनी नगर थाने पहुंचे हजारों की तादाद में रेजिडेंट डॉक्टर रात 11 बजे तक प्रदर्शन करते रहे| उधर दिल्ली एम्स और सफदरजंग अस्पताल के फैकल्टी एसोसिएशन ने भी दिल्ली पुलिस के आयुक्त को पत्र लिख घटना की निंदा की है और डॉक्टरों पर बल इस्तेमाल को लेकर आक्रोश व्यक्त किया है। हालांकि दिल्ली पुलिस ने डॉक्टरों के आरोपों से साफ इंकार किया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के चलते उनके सात जवान चोटिल हुए हैं।