नई दिल्ली: दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। दिल्ली शराब घोटाले (Delhi Liquor Policy Scam Case) को लेकर मचे घमासान के बीच उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने रविवार को केजरीवाल सरकार द्वारा 1000 लो-फ्लोर बसों की खरीद की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने के अनुरोध को मंजूरी दे दी।
DTC द्वारा खरीदी गई इन बसों की खरीद में गंभीर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने के बाद मुख्य सचिव नरेश कुमार ने इस मामले को सीबीआई को सौंपने का प्रस्ताव भेजी।
एलजी कार्यालय ने कहा,DTC द्वारा 1000 लो-फ्लोर बसों की खरीद में अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामले में एलजी सचिवालय को मिली शिकायत पर सीबीआई को जांच सौंपने के मुख्य सचिव के प्रस्ताव को दिल्ली के उपराज्यपाल ने मंजूरी दे दी है |
1000 लो-फ्लोर बसों की खरीद मामले में उपराज्यपाल को 9 जून 2022 को एक शिकायत मिली थी,जिसमें दिल्ली परिवहन मंत्री द्वारा डीटीसी बोर्ज का चेयरमैन भी बन जाने के मामले में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। शिकायत में यह भी कहा गया था कि बसों की निविदा और खरीद के लिए गलत काम को सुविधाजनक बनाने के लिए बोली प्रबंधन सलाहकार के रूप में DIMTS की नियुक्ति की गई थी।
शिकायत में 1,000 लो फ्लोर BS-IV और BS-VI बसों के लिए जुलाई 2019 की खरीद बोली में अनियमितता का आरोप लगाया गया था, और मार्च 2020 में लो फ्लोर BS-VI बसों की खरीद और वार्षिक रखरखाव अनुबंध के लिए एक और बोली लगाई गई थी।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) के संबंधित विभागों से टिप्पणियां प्राप्त करने के लिए शिकायत को मुख्य सचिव को भेज दिया गया था। हालांकि,पिछले साल शिकायत के बाद बस खरीद का टेंडर रद्द कर दिया गया था।
उपराज्यपाल को अगस्त में मुख्य सचिव से एक रिपोर्ट मिली जिसमें पता चला कि निविदा प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियां की गई थीं। रिपोर्ट में कहा गया है, "केंद्रीय सतर्कता आयोग के दिशानिर्देशों और सामान्य वित्तीय नियमों का घोर उल्लंघन है।" इसमें यह भी कहा गया है कि डीआईएमटीएस को जानबूझकर एक सलाहकार बनाया गया था ताकि निविदा प्रक्रिया में विसंगतियों का समर्थन किया जा सके।