दिल्ली न्यूज़ : दिल्ली चुनाव 2025: बीजेपी की दिल्ली में 27 वर्षों बाद वापसी
सबसे पहले हम बीजेपी को बधाई देते है दिल्ली की सता में 27 वर्षों बाद वापसी करने के लिए।
अगर दिल्ली चुनाव की बात की जाए तो इस बार दिल्लीवासियों ने रेवड़ी को नकार के गारंटी को चुना और पार्टियों को यह बताया कि सिर्फ मुफ्त की योजना से ज्यादा मूलभूत सुविधाएं जरूरी है जिसका स्तर दिन प्रतिदिन घटता गया और यही वजह रही कि दिल्लीवासियों ने आप को नकार दिया।
जिसमें से खास मूलभूत मुद्दे थे पानी, सीवर, रोड एवं प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूलना जिस पर तत्कालीन आप की सरकार ने कोई कार्य नहीं किया और जनता के जनादेश ने उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया।
अब देखना यह है कि बीजेपी अपनी गारंटी कैसे और कितने समय पर पूरा करती है और ज्वलंत मुद्दों (पानी, सीवर, सड़क एवं प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी) पर कैसे कार्य करती है और लोगो को राहत प्रदान करती है।
ग़ौतलब बात यह है कि ज्यादातर विधानसभा सीटों पर अगर तीन मुख्य पार्टियों (बीजेपी, आप एवं कांग्रेस) के उम्मीदवारों को छोड़ कर दिया जाए तो बाकी पार्टियों या निर्दलीय उम्मीदवारों को जितने वोट पड़े उसके ही आसपास वोट नोटा (NOTA) पर पड़े,
शायद चुनाव आयोग अगर नोटा को प्रमुखता से प्रचारित करता तो यह कहना गलत नहीं होता कि देश की राजधानी में तीसरे नंबर पर सबसे ज्यादा वोट नोटा पर पड़ते।
अब देखना है कि बीजेपी किसको अपना मुख्यमंत्री बनाती है और दिल्लीवासियों की उम्मीदों पर कैसे कार्य करती है या फिर से दिल्लीवासियों को यह मुहावरा दोहराना पड़ेगा कि
"कुर्सी वोही है,
चेहरे बदल गए है,
नियत वोही है,
चोर सब है,
कोई ज्यादा है,
कोई थोड़ा और ज्यादा है!
अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि दिल्ली वालों के विश्वास को फिर ठेस पहुंचेगी या मुकाम मिलेगा।
