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पुलिस ने पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया, आधी रात बच्ची का करवाया जबरन अंतिम संस्कार: बुलंदशहर में पीड़िता के परिवार से मुलाक़ात के बाद प्रियंका गांधी बोली -यहां हाथरस जैसा कांड

By tvlnews February 3, 2022
 पुलिस ने पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया, आधी रात बच्ची का करवाया जबरन अंतिम संस्कार: बुलंदशहर में पीड़िता के परिवार से मुलाक़ात के बाद प्रियंका गांधी बोली -यहां हाथरस जैसा कांड

बुलंदशहर : कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी गुरुवार को  बुलंदशहर पहुंचीं। यहाँ उन्होंने गैंगरेप पीड़िता के परिवार से मुलाक़ात की| यूपी कांग्रेस ने कहा भाजपा के जंगलराज में बेटियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। सरकार ने पहले हाथरस की बेटी के साथ बर्बर व्यवहार किया और अब बुलन्दशहर में भी वही दोहराया गया।यूपी कांग्रेस ने कहा,''कांग्रेस महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी जी ने पीड़िता के परिवार से मिलकर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया| मीडिया से बात करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि,''पुलिस प्रशासन ने पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया है। जैसे हाथरस में पीड़िता के शव को जलाया गया, वैसे ही बुलंदशहर में पीड़िता के परिवार पर दबाव डालकर रात में शव को जलवाया गया।



बुलंदशहर में पीड़िता के परिवार से मुलाक़ात के बाद कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा कि,'जैसे हाथरस की घटना हुई ठीक उसी तरह से परिवार पर दबाव बनाकर आधी रात में अंतिम संस्कार किया गया। परिवार का आरोप है कि प्रशासन और पुलिस मिली हुई है। FIR की कॉपी अभी परिवार को नहीं मिली है|



 प्रियंका गांधी ने कहा कि,''अनिल शर्मा का फोन पुलिस को आ रहा था, परिवार को शक है कि इनका इस घटना के साथ कनेक्शन है। परिवार का कहना है गैंगरेप हुआ है लेकिन पुलिस इसे नकार रही है। 17 साल की बच्ची को पुलिस 21 साल का बता रही है। मैं हर तरह पीड़ित परिवार की मदद करूंगी, हम इनके लिए लड़ेंगे|



प्रियंका गांधी ने कहा कि,'''पुलिस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है।पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया जा रहा है। परिजन कह रहे हैं कि सामूहिक दुष्कर्म हुआ है लेकिन पुलिस कोई ध्यान नहीं दे रही है। हमने परिवार को आश्वासन दिया है और उन्हें न्याय सुनिश्चित करेंगे|



यूपी कांग्रेस ने कहा,''प्रियंका गांधी जी बुलंदशहर में रेप पीड़िता के घर पहुंचीं। पीड़ित परिवार ने सुनाई दर्द भरी कहानी।  बुलंदशहर में हाथरस जैसी घटना हुई थी, जहां रेप करके पीड़िता की हत्या कर दी गई थी। घर वालों का आरोप है कि पुलिस ने लड़की का शव रात में ही जबरन जलवा दिया था।



कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पीड़िता के परिजनों का मोबाइल नम्बर भी लिया। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही उनसे संपर्क करेंगी। वह बिल्कुल भी खुद को अकेला और असहाय न समझें। हम कंधे से कंधा मिलाकर यह लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें कांग्रेस पार्टी की तरफ से आर्थिक सहयोग भी किया जाएगा। पार्टी के जिलाध्यक्ष जल्द ही सहयोग राशि आप तक पहुंचा देंगे।



बता दें कि 2 फरवरी को बुलंदशहर में गैंगरेप की घटना सामने आई थी। यहां खेत में काम करने गई किशोरी की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई। पुलिस ने खुद तो शव नहीं जलाया, बल्कि परिवार को धमकाकर आधी रात को ही पीड़ित का अंतिम संस्कार करने को कथित रूप से मजबूर किया। बुलंदशहर और अलीगढ़ की सरहद पर बसे एक गांव में 21 जनवरी को पुलिस-प्रशासन ने डरा-धमकाकर दबा दिया था। 



मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,'बुलंदशहर और अलीगढ़ की सरहद पर बसे एक गांव निवासी उनकी 16 वर्षीय भांजी अपने घर पर थी। वह 21 जनवरी को घर से चारा लेने गई थी। दोपहर में धोरऊ गांव निवासी सौरभ शर्मा और उसके तीन साथी उसको जबरन उठाकर कर उसी गांव में ट्यूबवैल पर ले गए। वहां उसके साथ सभी ने गैंगरेप किया । उसके बाद सौरभ ने किशोरी के सिर में गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस के फोन से परिजनों को घटना का पता चला।



रिपोर्ट्स के मुताबिक,'किशोरी के परिजनों का आरोप है कि वहां ट्यूबवैल के कमरे की बाहर से कुंडी लगी हुई थी। अंदर भांजी का खून फर्श पर था। आरोपी सौरभ भी वहीं था। वहां की स्थिति को देखकर कोई भी समझ सकता था कि बच्ची के साथ गलत काम किया गया है। पुलिस वाले भांजी के शव को अलग और आरोपी को अलग गाड़ी में बैठाकर ले गए। शाम को ही पुलिस शव को बुलंदशहर जिला अस्पताल ले गई। हमें कोई जानकारी नहीं दी।



अगले दिन 22 जनवरी को अधिकारियों का फोन आया कि बुलंदशहर जिला अस्पताल में बेटी का पोस्टमार्टम हो रहा है। परिजन पोस्टमार्टम से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने अपनी मौजूदगी में अगले दिन पोस्टमार्टम करवाने की मांग की, लेकिन पुलिस ने वहां लाठी का भय दिखाकर शव रवाना कर दिया। हमने पुलिस अधिकारियों से कहा कि बिटिया का शव गांव में ले आओ, लेकिन अफसरों ने मना कर दिया।



इसके बाद हम बुलंदशहर अस्पताल पहुंचे। हमने लड़की के साथ बुरा काम होने का अंदेशा जताया, लेकिन पुलिस इनकार करती रही। हमने FIR में गैंगरेप की धारा जोड़ने व सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की, लेकिन पुलिस ने धमकाकर चुप करा दिया। हमें रात करीब 8 बजे शव सौंप दिया।



शव को लेकर हम डिबाई पहुंचे ही थे कि पीछे से पुलिस की गाड़ी आ गई। हम शव लेकर थाने पर गए और विरोध जताया। उन्होंने कहा कि परिवार 22 जनवरी की रात को अंतिम संस्कार नहीं कराना चाहता था। हमारे यहां इसे अशुभ माना जाता है। इसलिए परिजन सामाजिक रीति रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार के लिए गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन पुलिस नहीं मानी।



पुलिस ने कोविड एक्ट के प्रावधान व कार्रवाई का दबाव बनाकर तत्काल अंतिम संस्कार करने को कहा। जब हम शव लेकर श्मशान घाट पहुंचे तो एक पुलिस की गाड़ी साथ थी। इसके बाद पुलिस की एक और गाड़ी आई। हमें अंदर करने और हम पर ही केस दर्ज करने की धमकी दी। आखिर रात 12 बजे अपनी बेटी का अंतिम संस्कार करना पड़ा। परिजनों व ग्रामीणों ने मामले में पुलिस पर आरोपियों के दबाव में एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया है।



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