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बी. पी. शर्मा समिति का ओबीसी समाज बहिष्कार करता है, क्रीमी लेयर असंबैधानिक इसे खत्म करो - मंडल आर्मी चीफ

  • by: news desk
  • 10 July, 2020
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बी. पी. शर्मा समिति का ओबीसी समाज बहिष्कार करता है, क्रीमी लेयर असंबैधानिक इसे खत्म करो - मंडल आर्मी चीफ

क्रीमी लेयर का जिक्र संविधान व मंडल कमीशन में दर्ज नहीं है. भारतीय संविधान में आरक्षण का आधार "सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन"  माना गया है. इसी को आधार बना कर मंडल मसीहा स्व. बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल ने पूरे देश का भृमण करके पिछड़ा वर्ग के  सामाजिक व शैक्षिणक पिछड़ापन के उत्थान के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट सौंपी जिसमें 40 सिफारिशें पिछड़ों के उत्थान के लिए की गईं हैं. उसी पिछड़ा वर्ग आयोग रिपोर्ट को हम सब मंडल कमीशन के नाम से जानते हैं. दुर्भाग्य से अभी तक केंद्र सरकार की नौकरियों व शिक्षा में 27 प्रतिशत आरक्षण की दो सिफारिशों को ही लागू किया गया जबकि 38 सिफारिशों को अभी लागू किया जाना बाकी है.




जब केंद्र सरकार की नौकरियों में 27 % ओबीसी आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई तब 9 जजों की संविधान पीठ ने इंदिरा साहनी मुकद्दमे में ये फैसला दिया कि सरकार ओबीसी को 27 % आरक्षण दे सकती है लेकिन ये आरक्षण ओबीसी के आगे बढे हुए तबके यानी क्रीमी लेयर को नहीं दिया जाएगा. जिसको मैं एक असंबैधानिक फैसला मानता हूँ जिसने ओबीसी को दो भागों क्रीमी लेयर ओबीसी व गैर क्रीमी लेयर ओबीसी में बाट कर ओबीसी के आंदोलन को कमजोर किया व ओबीसी को आपस में ही लड़ा दिया है.




इसी कोर्ट के फैसले के आधार पर केंद्र सरकार ने 1993 में आदेश जारी करके निर्धारित किया कि कौन - कौन से लोग क्रीमी लेयर में आएंगे. इसमें संवैधानिक पदों पर मौजूद व्यक्ति ,क्लास वन अफसर और कई तरह की कैटेगरी निर्धारित की गई. कुल आदमी की लिमिट 1 लाख तय की गई लेकिन वेतन की आय को आमदनी में नहीं जोड़ा गया. हालांकि क्रीमी लेयर का सिद्धांत केवल ओबीसी पर ही लागू होता है. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा क्रीमी लेयर को परिभाषित करने का काम सरकार के जिम्मे छोड़ दिया गया , अफसरों व उस समय की लीडरशिप ने इसे आर्थिक रूप से परिभाषित कर दिया ,बार्षिक ,पारिवारिक आय को क्रीमी लेयर का माप दंड बना दिया गया.




ये पूरी तरह से असंबैधानिक है इसे खत्म किया जाना चाहिए इसी का फायदा सामंतवादी ,आरक्षण विरोधी सरकारें उठाती रहीं हैं. वर्तमान क्रीमी लेयर की परिभाषा के दायरे में क्लर्क , ड्राइवर ,चपरासी आदि वर्ग 3 और वर्ग 4 के कर्मचारियों के बच्चे फस कर आरक्षण से वंचित हो गए हैं। इसलिए वर्तमान क्रीमी लेयर को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता है. क्रीमी लेयर के आर्थिक आधार को हटाया जाये ,संविधान की मूल भावना के मद्देनजर क्रीमी लेयर को पुनः परिभाषित किया जाये जिससे वर्ग 3 और वर्ग 4 के कर्मचारियों के बचे हक से वंचित न रहें. किंतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व भाजपा संघ और ही गहरी व घिनौनी साजिश ओबीसी आरक्षण के खिलाफ रच रही है.



मोदी सरकार ने 9 मार्च 2019 को बी. पी. शर्मा की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति का गठन किया था . जिसका उद्देश्य क्रीमी लेयर की सीमा 8 लाख से 15 लाख किये जाने के बारे में रिपोर्ट सरकार को सौपना था , लेकिन इस कमेटी ने सरकार को राय दी कि बार्षिक आय में वेतन से प्राप्त होने बाली आय को भी शामिल किया जाये. अगर मोदी सरकार इस कमेटी की अनुसंशा को मान कर बार्षिक आय में वेतन को शामिल करती है तो बड़ी संख्या में ओबीसी के लोग क्रीमी लेयर में शामिल हो जायेगे और आरक्षण से बाहर हो जायेगे.





दरअसल मोदी भाजपा आर एस एस का ही सुनियोजित ढंग से रचा गया षणयंत्र है. जो काम पिछड़ा वर्ग आयोग का है उसे सरकार ने अलग से समिति बना कर क्यों करवाया..? नरेंद्र मोदी ने यदि अलग से समिति का गठन किया ही था तो उसका अध्यक्ष व सदस्य ओबीसी से आने बाले लोगों को क्यों नहीं बनाया..? आरक्षण विरोधी तबके से आने बाले लोगों को इसकी जिम्मेदारी क्यों सौपी...? जो खुद ओबीसी नहीं है वो ओबीसी के लिए समर्पित कैसे हो सकता है...? समिति के सदस्यों की पृष्ठभूमि क्या है...? तमाम सवाल हैं. बी. पी. शर्मा समिति का वेतन को बार्षिक आय में शामिल करने की अनुशंसा संविधान के अनुच्छेद 15 (4) व 16 (4) का उलंघन है। जब वेतन भोगी व कृषक क्रीमीलेयर में शामिल हो जायेगे तो ओबीसी आरक्षण बचाने या मंडल कमीशन को लागू कराने ,ओबीसी जाति आधारित जनगणना कराने की लड़ाई कौन लड़ेगा...? रिक्से वाला ,रेहड़ी वाला या  दिहाड़ी मजदूर...? सीधा - सीधा समझ में आता है कि मोदी सरकार ओबीसी आरक्षण व ओबीसी आंदोलन को कुचल देने का षणयंत्र कर रही है.




मोदी सरकार द्वारा अलग से गठित बी. पी. शर्मा समिति का मंडल आर्मी व पिछड़ा समाज विरोध करता है . किसी गैर ओबीसी खासकर आरक्षण विरोधी तबके के सदस्यों को लेकर बनाई गई समिति को ओबीसी समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा. मोदी सरकार यदि क्रीमी लेयर की सीमा बढ़ाना ही चाहती है तो ओबीसी समाज से व ओबीसी आंदोलन से जुड़े पृष्ठभूमि वाले व संवैधानिक पदों पर रहे सदस्यों की समिति बनाये. क्रीमी लेयर बार्षिक आय में ग्रास इनकम व वेतन को शामिल न करते हुए वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए क्रीमी लेयर की सीमा बड़ा कर 24 से 25 लाख निर्धारित करे. ओबीसी की जाति आधारित जनगणना कराये व जनसंख्या के हिसाब से 54% ओबीसी आरक्षण लागू करे व मंडल कमीशन की सभी सिफारिशों को लागू करे. पद्दोन्नति में आरक्षण ,लोकसभा ,विधानसभा सीटों में ओबीसी आरक्षण लागू करे.




यदि केंद्र सरकार बी. पी. शर्मा समिति की अनुशंसा को लागू करती है व वेतन को बार्षिक आय में शामिल करती है तो मंडल आर्मी राष्ट्र व्यापी उग्र आंदोलन करेगी. ओबीसी समाज अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरेगा. बी . पी . शर्मा समिति का मंडल आर्मी पूर्ण बहिष्कार करती है.







अनिरुध्द सिंह विद्रोही, राष्ट्रीय अध्यक्ष - मंडल आर्मी





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