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दीपक कुमार त्यागी का BLOG: मौसम के प्रहार से फसलों को भारी नुकसान, बेहाल किसानों के हाल पर सरकार को देना होगा तत्काल ध्यान

  • by: news desk
  • 18 March, 2020
दीपक कुमार त्यागी का BLOG: मौसम के प्रहार से फसलों को भारी नुकसान, बेहाल किसानों के हाल पर सरकार को देना होगा तत्काल ध्यान

नई दिल्ली: अपने खेतों में लहलहाती फसलों के दम पर अपने परिवार का जीवनयापन करने के साथ-साथ, सभी देशवासियों के पेट भरने की जिम्मेदारी का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने वाले हमारे प्यारे अन्नदाता किसान भाईयों पर वर्ष 2020 में फरवरी व मार्च का महीना बहुत ज्यादा भारी पड़ रहा है, प्रकृति के प्रहार से किसान बेहद बेहाल हो गया है। 




देश में जगह-जगह भारी बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं व आंधी के चलने से जिस तरह से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश आदि कई राज्यों में हर प्रकार की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, वह स्थिति किसान के साथ-साथ मंदी व कोरोना की मार झेल रहे हमारे देश के लिए भी ठीक नहीं है। 





आयेदिन असमय लगातार हो रही ओलावृष्टि, बारिश व तेज हवाओं ने किसानों को एकदम से झकझोर कर बेहद परेशान करके रख दिया है। अपनी तैयार फसलों को खेतों में मौसम की मार से बर्बाद होता देखकर, किसानों की आँखों से अपनी बर्बादी के आँसू लगातार बह रहे हैं। अभी तक उसके आँसू को पूछने के लिए सरकार के द्वारा कोई ठोस प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है, मौसम की मार के चलते बेचारे अन्नदाता किसानों का दिनों का चैन गायब हो गया है, रातों की नींद उड़ गयी है।





क्योंकि एकतरफ तो उनकी लम्बे समय की मेहनत खेत में खड़ी फसल आलू, सरसों, गेहूं, चने, आम, सब्जियों आदि की फसल उनकी आँखों के सामने ही नष्ट हो रही है। वहीं दूसरी तरफ किसानों के अपने व परिजनों के सुनहरे सपने भी मौसम की इस मार में फसलों के साथ तबाह हो रहे हैं। किसान अपनी बहूमूल्य गाढ़ी कमाई को अपनी आँखों के सामने बर्बाद होता देखकर बेहद हताश व निराश हो गए हैं। 





मौसम के इस जबरदस्त कहर ने किसानों की कमर तोड़ दी है। उनके सामने परिवार के लिए सकून की दो वक्त की रोटी, बच्चों की पढ़ाई के लिए खर्चा, बच्चों की शादी का खर्चा, अपनों की बीमारियों के लिए इलाज व दवाई का खर्चा, साहूकार व बैंक का कर्जा उतारने और सबसे बड़ा संकट अगली फसल उगाने की तैयारी करने के लिए खाद बीज आदि सभी के लिए पैसे का इंतजाम करने का गम्भीर संकट उत्पन्न हो गया है। अब समय आ गया है कि हमारे अन्नदाता किसान के दर्द को अब सभी देशवासियों व नीतिनिर्माताओं को सही ढंग समझ कर उस दर्द का स्थाई निदान करना होगा क्योंकि...




"भारत की पहचान है किसान,

देश की आनबान शान है किसान,

हम सबका अभिमान है किसान,

अन्नदाता के रूप में महान है किसान,

लेकिन अफसोस फिर भी परेशान है किसान,

करना होगा अब किसान की समस्या का निदान।"








वैसे ईश्वर के इशारे पर चलने वाली शक्तिशाली व्यवस्था से परिपूर्ण इस प्रकृति पर मानव की किसी भी तरह की कोई जोर जबरदस्ती नहीं चलती है, जो हालात पैदा होने है मानव के पास केवल उससे लड़ने का ही चारा बचता है। हमारे देश के अन्नदाता किसान भी हर वक्त अपने बुलंद हौसलों के बलबूते ही कठिन से कठिन विपरीत परिस्थितियों का सामना करते रहते है, वो अपने व अपने परिवार के दुख-दर्द को भूलकर देशवासियों के पेट भरने के लिए दोबारा मेहनत करके अन्न पैदा करने में लग जाते हैं। 





लेकिन हम सभी का देशवासियों दायित्व है कि हम उनकी भावनाओं को समझ कर संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनकर अन्नदाता किसान की वेदना दुख-दर्द और कष्ट को कम से कम सरकार के सामने लाने की हिम्मत करें और उनको समय से राहत के नाम पर मुआवजा नहीं बल्कि फसल का उचित मुल्य व नष्ट फसल का आकलन करके उसका तय सरकारी मूल्य नुकसान की भरपाई के लिए दिलवाये। जिस तरह से इस बार बेमौसम बारिश में खासकर दलहन एवं तिलहन, बागवानी और अन्य अधिकांश रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ है, वह किसानों के लिए व देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक जबरदस्त आर्थिक रूप से झटका है। 






हमारे देश के अन्नदाता किसान भाई पिछले कई दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश, ओलावृष्टि व तेज हवाओं से बेहद परेशान हैं। किसानों की गेहूं, सरसों सहित अन्य सभी खड़ी फसलों को 70 से 80 फीसदी कहीं-कहीं तो 100 फीसदी तक भारी नुकसान हुआ है। कुछ प्रदेश में तो इसको लेकर किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ तो शुगर मिलों के मालिकों ने उनका अभी तक बकाया गन्ना भुगतान तक नहीं दिया है, वहीं दूसरी तरफ किसानों को प्रकृति के कोप की भारी मार भी झेलनी पड़ रही है। 





बेमौसम की बारिश व ओलावृष्टि के चलते किसानों को होने वाले नुकसान का  शासन-प्रशासन को तत्काल गांवों में धरातल पर जाकर सही ढंग से आकलन करना चाहिए् और सरकार को किसानों की स्थिति में सुधार करने के लिए नष्ट फसल का सरकारी मुल्य प्रति हेक्टेयर उत्पादन के अनुसार मुआवजा देने के लिए तत्काल ध्यान देना चाहिए। जिससे कि देश के किसानों को भी मंदी की मार से जूझ रहे समय पर कुछ राहत मिल सकें और वो कर्ज के जाल में फसनें से बच सकें और परिवार की कठिनाइयों को देखकर हिम्मत हार कर आत्महत्या ना करें।






।। जय हिन्द जय भारत ।।
।। मेरा भारत मेरी शान मेरी पहचान ।।










हस्तक्षेप / दीपक कुमार त्यागी

स्वतंत्र पत्रकार व स्तंभकार







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